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भंसाली की 'पद्मावत' 25 को तो 'जौहर ज्वाला' कार्यक्रम 24 को, क्षत्राणियों ने की तैयारी...

Fri, 19 Jan 2018 10:32 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला भले ही फिल्म 'पद्मावत' के निर्माताओं को राहत पहुंचाने वाला हो, लेकिन राजपूत समाज झुकने को तैयार नहीं है। 'पद्मावत' के बैन की मांग पर अड़े राजपूत समाज की महिलाओं ने 24 जनवरी को 'जौहर ज्वाला' कार्यक्रम आयोजित करने का ऐलान कर दिया है। क्षत्राणियों का दावा है उनके इस कार्यक्रम में राजस्थान के अतिरिक्त अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में महिलाएं आ रही हैं। गौरतलब है कि संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावत' 25 जनवरी को रिलीज हो रही है।
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21 को क्ष​त्राणियां निकालेंगी रैली

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फाइल फोटो।
'पद्मावती' रिलीज के मुद्दे पर राजपूत समाज ने आर पार लड़ाई की तैयारी कर ली है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पर राजपूत समाज में नाराजगी दिखाई दी। समाज के नेता सरकार पर दोहरे रवैये के आरोप लगा रहे हैं। वहीं जौहर क्षत्राणी मंच ने फिल्म बैन की मांग को लेकर 21 जनवरी को स्वाभिमान रैली निकालने की तैयारी की है। मंच के अनुसार चित्तौड़गढ़ में निकाली जाने वाली इस रैली में कई राज्यों की महिलाएं सम्मलित होंगी।
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यह स्थल बनेगा गवाह

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फाइल फोटो।
जौहरी क्षत्राणी मंच की ओर से ​स्वाभिमान रैली निकालने के ऐलान के बाद पुलिस प्रशासन भी अलर्ट पर है। मंच की पदाधिकारियों ने कहा है कि रैली की शुरुआत चित्तौड़ दुर्ग स्थित जौहर ​स्थल से होगी। यहां से क्षत्राणियां मिट्टी का तिलक लगाकर फिल्म के विरोध में हुंकार भरेंगी। यहां निकली रैली गांधी नगर भवन में जौहर ज्योति मंदिर पहुंचेगी। जहां सभा का भी आयोजन किया जाएगा। मंच का दावा है कि इस रैली में सैंकड़ों की संख्या में महिलाएं सम्मलित होगी।

पहले भी दे चुके थे चेतावनी

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फाइल फोटो।
गौरतलब है कि जौहर क्षत्राणी मंच कुछ दिन पूर्व ही चित्तौड़ दुर्ग स्थित जौहर स्थल पर जौहर करने की चेतावनी दे चुका है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्षत्राणी मंच ने जौहर ज्वाला कार्यक्रम की तैयारी प्रारंभ कर दी है। 
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सरकार के खिलाफ गुस्सा

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फाइल फोटो।
'पद्मावत' फिल्म को बैन करने वाले राज्यों के खिलाफ आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राजपूत समाज में भाजपा सरकारों के खिलाफ गुस्सा है। समाज का आरोप है पूर्व में गुजरात चुनाव के चलते फिल्म की रिलीज को आगे बढ़ाया गया। लेकिन भाजपा सरकारों ने कोर्ट में फिल्म के विरोध व बैन को लेकर अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रखा। इसी का परिणाम है सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकार का निर्णय दिया है।
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