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महारानी पद्मिनी के वंशज बोले सुप्रीम कोर्ट ने इन बातों को क्यों किया नजरदांज..

Fri, 19 Jan 2018 11:40 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो।
पद्मावती से पद्मावत हुई संजय लीला भंसाली की फिल्म को लेकर मचा बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद फिल्म जगत से लेकर करणी सेना और इतिहासकारों से लेकर नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आ रही है। लेकिन जिस महारानी पद्मिनी की शौर्य गाथा के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा है उनके वंशजों की प्रतिक्रिया अब सामने आई है। मेवाड़ के पूर्व राजघराने ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उपजी नाराजगी को जायज बताया है। 
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कंटेंट को लेकर टिप्पणी नहीं

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महेन्द्र सिंह मेवाड़
मेवाड़ के पूर्व राजघराने के महेन्द्र सिंह मेवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा है कि कोर्ट ने भले ही फिल्म से बैन हटाने के निर्देश दिए है। लेकिन कोर्ट ने फिल्म के कंटेंट पर कोई टिप्पणी नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट ने बहुत ही महत्वपूर्ण बात को नजरदांज किया है। वहीं मेवाड़ का कहना है ​​कि मनोरंजन के नाम पर इतिहास से छेड़छाड़ करना गलत है। 
 
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नहीं सुनी गई बात 

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फाइल फोटो।
मेवाड़ का कहना है इस फिल्म को लेकर पूर्व में भी सेंसर बोर्ड और संजय लीला भंसाली को पत्र लिखकर आपत्ति जताई गई थी। लेकिन उनकी बात को नहीं सना गया।  इतिहास के साथ छेड़छाड़ और इतिहासकारों की ओर से आपत्ति दर्ज कराने के बाद भी ​फिल्म को प्रदर्शित किया जा रहा है जो कि बिल्कुल सही नहीं है। 

चित्तौड़ में जौहर की चेतावनी

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फाइल फोटो।
गौरतलब है​ कि पद्मावती फिल्म 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। इस को देखते हुए राजपूत समाज में काफी रोष है। फिल्म को बैन करने की मांग को लेकर ​21 जनवरी को चित्तौड़गढ़ में राजपूत समाज की महिलाएं स्वाभिमान रैली निकालेंगी। वहीं जौहरी क्षत्राणी मंच की ओर से 24 जनवरी को जौहर करने की भी चेतावनी दी गई है।
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राज्य सरकार कर रही विचार

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फाइल फोटो।
बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के पद्मावत फिल्म रिलीज के फैसले के बाद करणी सेना व राजपूत समाज के अन्य संगठनों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। इसके अतिरिक्त राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद आगे क्या किया जा सकता है इस पर विचार करने की बात कह चुकी है। गौरतलब है कि पद्मावत फिल्म को राजस्थान, हरियाणा, गुजरात व मध्य प्रदेश सरकार ने बैन करने का निर्णय लिया था। जिसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 
 
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