फिल्म 'पद्मावती' पर विवाद चल रहा है। इतिहास के पन्नों से निकलकर बाहर निकली ये कहानियां अपने आप में वीरता और गौरव को समेटे हैं। कई आश्चर्यजनक बातें भी हैं। जौहर यूं तो आग में होता था, लेकिन एक जौहर ऐसा भी हुआ था जहां क्षत्राणियों ने तालाब में कूदकर जल जौहर किया था। राजपूताना के इतिहास में यह अपने आप में अकेला जल जौहर हुआ था।
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11 महीने तक घेरा था किला
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रणथंभौर का किला
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास कार मानते हैं कि जौहर की परम्परा राजस्थान में पुरानी है। लेकिन राजस्थान पहली और एक मात्र बार जल जौहर भी हुआ था। बात साल 1301 की है। कहा जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने रणथंभौर पर हमला कर दिया था। हम्मीर देव की पत्नी रानी रंगादेवी ने पद्मला तालाब में कूदकर जल जौहर कर लिया था। बताया जाता है कि उस वक्त खिलजी ने 11 महीने तक रणथंभौर के किले को घेरा था।
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पद्मावती ने किया था जौहर
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Padmavati Trailer
1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने चितौड़गढ़ पर हमला कर दिया था। इस युद्ध में राजा रतन सिंह की वीरगति को प्राप्त हुए थे। उसके बाद पद्मावती ने अन्य रानियों और दासियों के साथ जौहर कर लिया।
रानियों ने उठाए थे शस्त्र
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जौहर
- फोटो : डेमो पिक
इसके बाद 1534 में गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह के आक्रमण के समय चित्तौड़ की रानी कर्णवती ने जौहर किया। कहा जाता है कि उस समय रानियों ने भी हमलावरों के सामने शस्त्र उठाए थे। इसके बाद 13000 रानियों का साथ उन्होंने जौहर कर लिया था।
फिर 1567 में दिल्ली के बादशाह अकबर के आक्रमण के समय चित्तौड़ की रक्षा कर रहे जयमल राठौड़ और पत्ता सिसोदिया की वीरांगनाओं के साथ हजारों स्त्रियों ने जौहर किया। वीरों का बलिदान और वीरांगनाओं का अग्नि स्नान चित्तौड़ की परम्परा रही है।