दुनियाभर में ये अपनी अलग पहचान बना चुका खाटूश्याम मेला शुरू हो गया है। मेले की शुरुआत के साथ ही श्रीश्याम के दर्शनों के लिए दूर-दराज से भक्तों के यहां आने का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। इस मेले की खास बात ये है कि भक्तों ने इसे कई नाम दिए हैं। कोई लक्ख दातार का मेला कहता है तो कोई फाल्गुन मेला।
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हर ओर बाबा श्याम का जयकारा
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खाटू के लिए रवाना होती पदयात्रा
राजस्थान के सीकर में स्थित खाटूधाम की फाल्गुन माह में महिमा ही अलग नजर आती है। यहां देश के कई हिस्सों से भक्त पैदल ही हाथ में श्रीश्याम के नाम का निशान लिए आते हैं। हर भक्त की जुबां पर केवल एक ही स्वर सुनाई देता है। हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा।
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प्रशासन की ओर से विशेष इंतजाम
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खाटूश्याम
मेले की खास बात ये भी है कि इसकी तैयारियां कई महीनों पहले ही शुरू हो जाती है। यहां आने वाले भक्तों को सुलभ और सुरक्षित प्रभु की मूरत के दर्शन हो सकें, इसके लिए श्रीश्याम मंदिर कमेटी, सीकर जिला प्रशासन और खाटू ग्राम पंचायत का अहम योगदान रहता है। इसके साथ ही यहां आने वाले भक्तों को सुलभ यातायात मुहैया कराने के लिए रोडवेज की ओर से भी विशेष बसों की व्यवस्था की जाती है। वहीं, सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मेले पर सीसीटीवी से नजर रखी जाती है।
भक्तों के लिए ये सुविधाएं
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खाटूधाम में भक्तों की पदयात्रा
यहां आने वाले अधिकांश भक्त अपनी पदयात्रा रींगस से शुरू करते हैं। ऐसे में रींगस से लेकर खाटूधाम तक भक्तों के पैदल चलने के लिए मैटिंग की व्यवस्था रहती है ताकि उनके पैरों में किसी तरह की कोई खरोंच भी नहीं आए। इसके अलावा विभिन्न संगठनों की ओर से खाटूधाम जाने वाले मार्गों पर भक्तों के खाने-पीने, आराम करने सहित चिकित्सा सुविधाएं भी मुहैया करवाई जाती हैं।
मंदिर कमेटी से जुड़े लोगों के अनुसार, फाल्गुन में एकादशी का विशेष महत्व है। ऐसे में यहां आगामी एकादशी को भक्तों की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। बताया जा रहा है कि इस बार ये संख्या 30 लाख पहुंचने वाली है। ऐसे में यहां भक्तों की लम्बी-लम्बी कतारें देखी जा सकती हैं।कहा जाता है कि यहां आने वाले भक्तों की मुरादें श्रीश्याम पूरी करते हैं।