रेत के टीलों की नगरी में बना राजकीय संग्रहालय पर्यटकों का अर्से से इंतजार कर रहा है। जैसलमेर के इस म्यूजियम के हालात ऐसे हैं कि पर्यटक सीजन होने के बावजूद कोई भी इस म्यूजियम को देखने नहीं आता है। ऐसे में सरकार द्वारा इसे मॉर्डन रूप देने के लिए लगाए गए डेढ़ करोड़ रुपए व्यर्थ जा रहे हैं।
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1 लाख पर्यटकों में से 1 हजार भी नहीं पहुंचे यहां
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जैसलमेर म्यूजियम
- फोटो : Amar Ujala
जानकारी के अनुसार 29 अगस्त राजकीय संग्रहाल को नए कलेवर में दोबारा खोला गया था। उसके बाद से लेकर अब तक एक लाख से भी अधिक सैलानी जैसलमेर आ चुके हैं। लेकिन इनमें से एक हजार पर्यटक भी राजकीय संग्रहालय देखने नहीं पहुंचे। अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजकीय संग्रहालय किस हद तक पर्यटकों से दूर होता जा रहा है।
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यहां रखे गए हैं सदियों पुराने फॉसिल्स
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जैसलमेर म्यूजियम
- फोटो : Amar Ujala
गौरतलब है कि सितंबर 2016 में राजकीय संग्रहालय के रिनोवेशन का काम शुरू किया गया था। करीब एक साल तक संग्रहालय बंद रहा और उसमें बाहरी लुक को यथावत रखते हुए अंदर से बिल्डिंग वर्क के साथ दो अलग अलग गैलेरियां बनाई गई हैं। यहां आकर्षक शोकेस बनाए गए हैं जिनमें पेड़ों के पत्थर बन जाने के बाद उससे बने सदियों पुराने फॉसिल्स, पुराने वाद्ययंत्र, जैसलमेर की लोक संस्कृति से जुड़े तमाम तरीके के पहनावे, आभूषण और यहां की रसोईयों में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तन रखे गए हैं।
कमीशनबाजी ने पर्यटकों से म्यूजियम को रखा दूर
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जैसलमेर म्यूजियम
- फोटो : Amar Ujala
राजकीय संग्रहालय के प्रभारी का कहना है की जैसलमेर में पर्यटकों को घुमाने वाले गाइड कमीशन के आधार पर ही काम करते हैं। जहां उनका कमीशन होता है वहां वे सैलानियों को ले जाते हैं लेकिन जहां कमीशन नहीं होता उसके बारे में वे सैलानियों को बताते तक नहीं है। इतना ही नहीं होटल व्यवसायी भी इसमें रूचि नहीं ले रहे हैं जिसकी वजह से रिनोवेशन के बाद माॅर्डन लुक में तैयार किए गए संग्रहालय में सैलानी नहीं पहुंच रहे हैं।
गत 29 अगस्त को नए कलेवर में ये म्यूजियम सैलानियों के लिए खोल दिया गया। मगर म्यूजियम अपने प्रचार प्रसार में पीछे रह गया। पिछले दिनों गाइडों के प्रशिक्षण के दौरान गाइड एसोसिएशन से प्रचार प्रसार को लेकर चर्चा की गई थी। आगामी दिनों में होटलियर्स व अन्य प्रचार प्रसार के संसाधनों से संग्रहालय का प्रचार किया जाएगा। पर्यटकों का इस म्यूजियम तक नहीं पहुंच पाने का कारण इसकी लोकेशन भी मानी जाती है क्योंकि ये मुख्य रोड से अंदर है और इस मार्ग पर सैलानियों के वाहनों का आवागमन नहीं है। वहीं दूसरा कारण यह है कि संग्रहालय का प्रचार प्रसार बिल्कुल नहीं है। यदि जगह जगह पर प्रचार प्रसार के साइन बोर्ड व होटल संचालकों को इस बारे में बताया जाए तो सैलानियों की संख्या बढ़ सकती है।