संजय लीला भंसाली की 'पद्मावती' पर नए-नए विवाद सामने आ रहे हैं, जिसमें इसके कथानक पर भी सवाल उठाए गए हैं। सरकारें भी इस फिल्म पर रोक लगा रही हैं। कहा जा रहा है कि मलिक मुहम्मद जायसी की कृति 'पद्मावत' के आधार पर फिल्म लिखी गई है। जयसी ने 'पद्मावत' रानी पद्मिनी के जौहर की घटना के 200 साल बाद लिखा। इतिहासकारों का कहना है कि वक्त के साथ किवदंतियां जुड़ती गई और कल्पना से मिलकर तैयार हुआ 'पद्मावत'। रानी पद्मिनी या पद्मावती और चित्तौड़गढ़ के बारे में प्रसिद्ध है ‘गढ़ तो चित्तौड़गढ़, बाकी सब गढ़ैया, रानी तो पद्मिनी बाकी सब गधैया’। चित्तौड़ की रानी का इतिहास यह है कि उसने अपने सम्मान, अस्तित्व और सतित्व को आक्रान्ताओं से बचाने के लिए अग्नि स्नान कर लिया।
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अमीर खुसरो ने लिखा है ये
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पद्मावती
- फोटो : अमर उजाला
इतिहास में उनके बारे में सबसे बेहतर लिखने की स्थिति में थे लेखक अमीर खुसरो। अमीर खुसरो अल्लाउद्दीन के साथ वर्ष 1303 में चित्तौड़ हमले के दौरान मौजूद रहे थे। उन्होंने अपनी पुस्तक 'खजाइन उल फतूह' में सिर्फ 6 लाइनों में पद्मिनी का वर्णन किया। यह पुस्तक खुसरों ने अल्लाउद्दीन के युद्ध अभियानों पर लिखी थी। मेवाड़ का इतिहास हो या कहीं और पद्मिनी का वर्णन एक दस्तावेज के तौर पर सिर्फ अमीर खुसरो की पुस्तक 'खजाइन-उल-फतूह' में ही मिलता है। वह भी सिर्फ इतना की उन्होंने आक्रान्ताओं से बचने के लिए अग्नि स्नान किया।
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खिलजी पर लिखी इस किताब में नहीं है वर्णन
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padmavati, ranveer singh
वहीं खिलजी सुल्तान पर लिखी अमीर खुसरो की अन्य पुस्तक या जीवन वृत्त 'तारीख-ए-अलाई' में कहीं भी पद्मिनी का वर्णन नहीं आता है। लेकिन गुजरात की राजकुमारी देबला देवी का वर्णन जरूर आता है। यह राजकुमारी गुजरात के बघेला शासक कर्ण या करण गेलो की बेटी थी। कर्ण की पराजय के बाद अल्लाउद्दीन ने उसकी प्रमुख रानी कमला देवी से शादी कर ली। वह देबला देवी की मां थी। वहीं उसके बेटे खिज्र खां जो देबला देवी पर आसक्त था ने, उसका अपहरण कर उससे निकाह किया। यह वर्णन अमीर खुसरो ने अपने 'दीवान मसनवी एक खिज्र खां देबला देवी' में किया है। वहीं समकालीन फरिश्ता, जियाउद्दीन बरनी व हाजी-उद-दबीर ने भी इस कथा का वर्णन किया।
'पद्मावत' के बारे में जानिए ये भी
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पद्मावती
- फोटो : self
वहीं पद्मिनी के जौहर के करीब पौने दौ सौ साल बाद एक सूफी फकीर और कवि मलिक मुहम्मद जायसी ने अमीर खुसरो की 'खजाइन उल फतूह' में लिखी 6 पंक्तियों के आधार पर 'पद्मावत' की रचना की। यह रचना अपने पद्य, लालित्य, नख शिख वर्णन और अलंकार पूर्ण काव्य के कारण जग प्रसिद्ध हुई। यहीं से पद्मिनी की कथा जग प्रसिद्ध होती है। इस पुस्तक में लेखक ने स्पष्ट किया कि वह सूफी मजूज सप्तपदी अलाई इश्क वर्णन में यह महाकाव्य लिख रहा है।
अल्लाउद्दीन खिलजी के लिए कहा जाता है कि वह अपने सुन्दर नाजिर (हिंजड़े) मलिक काफूर से प्रेम करता था। उसने अपने हरम से अधिक समय मलिक काफूर के साथ गुजारा। यह मलिक काफूर आखिर में उसके परिवार के लिए आफत बन कर उभरा। वहीं चित्तौड़ के हमले में उसने इतना विनाश किया। उसने ही इस क्षेत्र की इमारतों और मंदिरों को तोड़ कर उनके पत्थरों से चित्तौड़गढ़ के निकट से गुजर रही गम्भीरी नदी पर पुल बनवाया। इस पुल पर मिलने वाले अभिलेख उस विनाश की याद दिलाते हैं।