संजय दत्त की कमबैक फिल्म आज रिलीज हो गई है। फिल्म में एक पिता और बेटी की कहानी को दिखाया गया है। फिल्म इस रिश्ते के साथ इसके फाइट सीन्स और एक्शन के लिए भी चर्चा में आई है। एक खास बात यह भी है कि संजय दत्त इस फिल्म में अपनी बेटी का बदला लेने के लिए ऐसी जगह पहुंचे, जिसके बारे में कई अनसुलझी कहानियां हैं। इसे भूतहा बावड़ी भी कहा जाता है। कोई कहता है कि यहां से एक पूरी बारात गायब हो गई थी,तो कभी कहा जाता है कि यह जगह भूतों ने एक रात में ही बनाई थी।
राजस्थान में दौसा के पास आभानेरी में एक खास बावड़ी है। इसे चांद बावड़ी भी कहा जाता है। यह बावड़ी भूल भूलैया भी मानी जाती है। मान्यता है कि इस बावड़ी की सीढ़ियां इस तरह बनी हैं कि जिस रास्ते से आदमी नीचे जाता है। उस रास्ते से ऊपर नहीं आ पाता है।
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संजय दत्त को देखने उमड़ी थी भीड़
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शूटिंग के दौरान संजय दत्त
- फोटो : अमर उजाला
इस बावड़ी के बारे में यह भी कहा जाता है कि इस बावड़ी को एक रात में ही बनाया गया था। साथ ही यह भी किवदंती है कि यहां एक बार एक बारात आई, बावड़ी में नीचे उतरी और फिर बाहर नहीं आ पाई। ऐसी एक नहीं कई कहानियां जुड़ी हैं चांद बावड़ी से, जहां पर संजय दत्त की इस फिल्म की शूटिंग की गई है। संजय जब शूटिंग के लिए यहां आए थे तो उन्हें देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी थी।
संजय दत्त की इस फिल्म में बाप बेटी के रिश्ते की संवेदनाओं को दिखाया गया। फिल्म में संजय दत्त की बेटी का किरदरा अदिति राव हैदरी ने निभाया है।
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पहले भी नजर आ चुकी है फिल्मों में
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भूलभूलैया के गाने में चांद बावड़ी पर अमीषा पटेल
- फोटो : अमर उजाला
ऐसा नहीं है कि पहली बार चांद बावड़ी को फिल्मों में देखा गया है। इससे पहले भी कई फिल्मों में यह नजर आ चुकी है। अक्षय कुमार अभिनीत फिल्म भुल भुलैया में भी यह बावड़ी नजर आई थी, तो वहीं अंग्रेजी फिल्म द फॉल में भी इसे दिखाया गया था।
चांदनी रात में निखर आता है रूप
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चांद बावड़ी
- फोटो : फाइल फोटो
इसे अंधेरे उजाले की बावड़ी भी कहा जाता है। चांदनी रात में यह बावड़ी एकदम सफेद दिखाई देती है। तीन मंजिला इस बावड़ी में राजा के लिए नृत्य कक्ष तथा गुप्त सुरंग बनी हुई है। बावड़ी की तह तक पहुंचने के लिए करीब 1300 सीढि़यां बनाई गई हैं। यह 19.8 फुट गहरी है।
बावड़ी की सबसे निचली मंजिल पर बने दो ताखों में स्थित गणेश एवं महिसासुर मर्दिनी की भव्य प्रतिमाएं इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। इस बावड़ी में एक सुरंग भी है जिसकी लंबाई लगभग 17 कि.मी. है जो पास ही स्थित गांव भांडारेज में निकलती है। कहा जाता है कि युद्ध के समय राजा एवं उनके सैनिकों द्वारा इस सुरंग का इस्तेमाल किया जाता था।