अनोखा डॉल म्यूजियम राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित है। यहां रखी हर गुड़ियां अपने देश— प्रदेश की खासियत बताती हैं। कोई अपने पहनावे से तो कोई बनावट से, किसी के कपड़ों की कारीगरी तो किसी काम करने का अंदाज बताता है कि उसके देश में क्या अनोखा है कार्टून केरेक्टर्स लेकर देशी विदेशी डॉल्स, सब अनोखे अंदाज में रखी गई हैं।
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1974 में हुई थी शुरुआत
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डॉल म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
जवाहरलाल नेहरू मार्ग, तीन मूर्ति सर्किल पर सेठ आनंदी लाल पोद्दार मूक बधिर स्कूल परिसर में बने डॉल म्यूजियम को फिर से तैयार किया गया है। साल 1974 में भगवानी बाई सेकसरिया परिवार ने म्यूजियम की स्थापना की। इसी पुराने म्यूजिमय को रिनोवेट करके दो भागों में बांटा गया है और नई डॉल्स को जोड़ा गया है। नए हिस्से का नाम सविता रणजीतसिंह भंडारी के नाम पर रखा है।
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कार्टून कैरेक्टर वाली डॉल्स भी
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डॉल म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
डॉल म्यूजियम में मौजूद 600 डॉल्स में भारतीय संस्कृति को बताने वाली गुड़िया के साथ ही कार्टून कैरेक्टर वाली डॉल्स भी शामिल हैं। इनमें कार्टून केरेक्टर स्पाइडरमैन, डार्थ मॉल, बैटमैन, हल्क, हान, सोलो जैसी डॉल्स भी हैं। ऐसे में यह डॉल्स बच्चों को बहुत भाएंगी।
चालीस देशों की गुड़िया हैं मौजूद
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डॉल म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
नए संग्रहालय में सेंट्रल कूलिंग सिस्टम, लाइटिंग एवं लकड़ी की आलमारियां हैं। इसमें जापान की प्रसिद्ध डॉल हिना मास्तुराई डॉल भी हैं। इसके अलावा अरब, स्वीडन, स्वीट्जरलैंड, अफगानिस्तान, ईरान आदि देशों की गुड़ियां गैलेरी में रखी गई हैं। करीब चालीस देशों की गुड़िया यहां मौजूद हैं।
जहां तक बात भारत की है, भारत के कई प्रदेशों की डॉल्स यहां मौजूद हैं। हरियाणवी युगल, मराठी युगल, स्कूल में पढ़ते हुए बच्चे, विभिन्न सांस्कृतिक त्यौहारों के चित्रण तो है ही, मीरा बाई और कृष्ण के बीच के अनोखे संबंध को भी चित्रित किया गया है।