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ये कैसा विकास! मरने के बाद भी नहीं मिलता सुकून

Sun, 03 Sep 2017 07:28 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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ऐसे ले जाना पड़ता है शव
देश में भले ही सरकारें विकास की बड़ी-बड़ी बातें करती हों, लेकिन स्थिति इसके बिल्कुल उलट ही दिख रही है। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले की कपासन तहसील में लोग अजीब सी मुसीबत में फंसे हुए हैं। यहां राशमी उपखण्ड इलाके के गांव कीरखेड़ा में लोगों को मृतक का अंतिम संस्कार भी जान पर खेलकर करना पड़ता है।
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नदी के बीच से गुजरना पड़ता है

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ऐसे ले जाना पड़ता है शव
लोगों का कहना है कि मृतक का अंतिम संस्कार करने के लिए नदी के बीच से गुजरना पड़ता है। इसका कारण यहां अन्य कोई मार्ग का नहीं होना है।
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पानी के कीड़े काटने लगते हैं

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ऐसे ले जाना पड़ता है शव
गांव में जब भी किसी के घर में ​कोई मौत हो जाती है तो लोग शव को लेकर बनास नदी के बीच से गुजरते हैं। हालात ये हैं कि लोगों को गले तक पानी से निकलना पड़ता है। कई बार तो स्थिति ये हो जाती है कि उनके शरीर पर पानी के कीड़े काट लेते हैं।

 

और भी बढ़ जाता है दुख

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लोगों ने बताया कि एक तो अपने का दुनिया से चले जाना और ऊपर से अंतिम संस्कार करने के लिए ऐसा दुर्गम रास्ता, उनके दर्द को और बढ़ा देता है। ये समस्या उनके गांव में आज की नहीं, बल्कि पिछले करीब दस सालों से है। इसके बावजूद कोई जनप्रतिनिधि इसे दूर करने का प्रयास नहीं करता।
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बारिश में ज्यादा मुसीबत

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जानकारी के अनुसार यह नदी बनास नदी का हिस्सा है। ऐसे में बारिश के दौरान राशमी एनिकट में पानी का जल स्तर बढ़ जाता है और पानी रास्ते पर अपनी जगह बना लेता है। लोगों का कहना है कि प्रशासन से लेकर सरकार तक वे कई बार अपनी मुसीबत बता चुके हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला।
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कई बार गुहार लगाई, लेकिन सब बेकार

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सर्दियों के मौसम में बारिश हो जाए तो और भी मुसीबत बढ़ जाती है। लोग अंतिम संस्कार करने के लिए ठंडे पानी में से होकर गुजरते हैं। ऐसे में उन्हें बीमारी से भी सामना करना पड़ता है। लोगों ने मुख्यमंत्री से भी उन्हें इस मुसीबत से निजात दिलाने की गुहार लगाई है।

 
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