संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म 'पद्मावती' को लेकर भले ही विरोध बढ़ता जा रहा हो, कई राज्यों ने इस पर बैन भी लगा दिया हो, लेकिन यहां इसकी भी खासी चर्चा है कि आखिर जयपुर में इसकी शूटिंग की अनुमति कैसे मिली? जानिए, इसके पीछे का राज...
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सभी गतिविधियों पर पूर्व राजपरिवार से संबंधित ट्रस्ट का नियंत्रण
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करणी सेना ने की थी तोड़फोड़
- फोटो : फाइल फोटो
दरअसल, इन दिनों राजस्थान में फिल्म 'पद्मावती' को लेकर खासा विरोध हो रहा है। इसमें मुख्य तौर पर नाम जयपुर के पूर्व राजघराने की सदस्य और बीजेपी एमएलए दीया कुमारी का है। लोगों की जुबां पर ये चर्चा है कि आखिर जयपुर के जयगढ़ किले में शूटिंग कैसे हो गई थी। इसके पीछे किसी ने तो इजाजत दी होगी। इस किले पर होने वाली सभी गतिविधियों पर नियंत्रण पूर्व राजपरिवार से संबंधित ट्रस्ट का है।
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शूटिंग की अनुमति से पहले, स्क्रिप्ट की नहीं ली जानकारी
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लोगों का कहना है कि आज दीया कुमारी फिल्म को लेकर अपना विरोध जता रही हैं, लेकिन जब जयगढ़ में शूटिंग की अनुमति दी गई, तो स्क्रिप्ट क्यों नहीं पढ़ी गई। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि उस समय शूटिंग की इजाजत नहीं दी जाती तो ये विवाद इतना नहीं बढ़ता। अब सवाल उठ रहा है कि जयगढ़ में शूटिंग के दौरान ही क्यों नहीं फिल्म को लेकर आपत्ति जताई गई।
शूटिंग के एवज में रोजाना लिए दो-दो लाख रुपए!
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सूत्रों के अनुसार फिल्म को लेकर बाकायदा जयपुर के पूर्व राजपरिवार और भंसाली के बीच अनुबंध हुआ है। जिसके तहत ही यहां शूटिंग की इजाजत मिली। चर्चा ये भी है कि इसके लिए रोजाना शूटिंग की दर भी निर्धारित हुई थी, जो करीब दो-दो लाख बताई जा रही है।
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ट्विटर और हस्ताक्षर अभियान को बनाया हथियार
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दीया कुमारी ने ये लिखा
लोगों का आरोप है कि पहले जो लोग भंसाली के साथ थे, वे ही आज कभी अपने ट्विटर हैंडल पर तो कभी हस्ताक्षर अभियान चलाकर विरोध जता रहे हैं। दीया कुमारी ने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि एक फिल्म के जरिए मुझे राजस्थान के इतिहास से किसी भी तरह की छेड़छा़ड़ बर्दाश्त नहीं है।
जयपुर के जयगढ़ किले में फिल्म 'पद्मावती' की शूटिंग के दौरान सेट पर राजपूत करणी सेना के लोगों ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक संजय लीला भंसाली की पिटाई भी कर दी थी। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म में इतिहास से छेड़छाड़ के आरोप लगाए थे। लोगों का कहना है कि शूटिंग के समय ही इतना विवाद हो गया था, तो रिलीज के समय होने वाला विवाद की ओर इशारा था। इजाजत देने वाले ये समझ नहीं पाए।