गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों ने भाजपा की रणनीति को पूर्ण रूप से बदल दिया है। अभी तक भाजपा का संसदीय बोर्ड प्रदेश स्तर से भेजे गए संभावित जिताऊ माने जाने वाले प्रत्याशियों के नाम पर मुहर लगाता आया है। लेकिन राजस्थान में होने वाले उपचुनाव शायद भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व के लिए भी चुनौती बन गए हैं। क्योंकि 29 जनवरी को होने वाले तीन महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए भाजपा ने अभी तक प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं, जबकि इन चुनावों के लिए नामांकन प्रक्रिया दस जनवरी को समाप्त हो रही है।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री का है समर्थन इन्हें
2 of 5
डॉ जसवंत सिंह यादव
जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा पेंच अलवर लोकसभा सीट के लिए फंसा हुआ है। भाजपा सूत्रों के अनुसार राजस्थान से संभावित उम्मीदवारों की दो लिस्ट भेजी गईं, जिसमें राज्य सरकार में श्रम मंत्री डॉ. जसवंत यादव को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का समर्थन है। जबकि दूसरी लिस्ट में अलवर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष संजय शर्मा और बाबा बालकनाथ का नाम है। अभी तक वसुंधरा राजे की दावेदारी को पुख्ता माना जा रहा था।
विज्ञापन
दिल्ली के नेताओं का है समर्थन
3 of 5
संजय शर्मा
लेकिन शुक्रवार को राजनीति तब तेज हो गई जब संजय शर्मा के सहयोगी ने नामांकन पत्र खरीदा। अब बताया जा रहा है कि तीनों उम्मीदवारों की दावेदारी बराबर की है इसलिए केन्द्रीय नेतृत्व कोई निर्णय नहीं ले सका है। वहीं दूसरी और डॉ जसवंत यादव बीते कई दिनों से चुनाव प्रचार कर रहे हैं, जबकि टिकिट की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। वहीं संजय शर्मा के सहयोगियों ने भी चुनाव कार्यालय के लिए स्थान तलाशना प्रारंभ कर दिया है।
कांग्रेस कर रही है इंतजार
4 of 5
फाइल फोटो।
ऐसा ही कुछ हाल कांग्रेस का भी है। हालांकि कांग्रेस ने अलवर से उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। जबकि अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस ने भी उम्मीदवार घोषित नहीं किए है। हालांकि कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उनकी ओर से अजमेर और मांडलगढ़ के लिए उम्मीदवार तय कर दिए गए है। लेकिन वे भाजपा के उम्मीदवारों के इंतजार में है।
गौरतलब है कि अजमेर से कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार डॉ. रघु शर्मा बताए जा रहे हैं। लेकिन यदि भाजपा किसी जाट उम्मीदवार पर दांव लगाती है, तो कांग्रेस भी उम्मीदवार बदल सकती है। दोनों ही पार्टियों जातिगत समीकरणों को बिठाने में लगी हैं, क्योंकि जहां अलवर में यादव वोट बैंक जीत में अहम भूमिका निभाएगा, वहीं अजमेर में जाट व गुर्जर के जरिए जीत का सेहरा बंधना तय माना जा रहा है।