गुजरात विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। जहां कांग्रेस अपने नए अध्यक्ष के नेतृत्व में मंदिर के करीब दिखना चाहती है, वहीं भाजपा दलितों और पिछड़े वर्गों को साधने का प्रयास कर रही है। राजस्थान में 29 जनवरी को होने वाले तीन महत्वपूर्ण उपचुनाव में दोनों पर्टियों की इस नई रणनीति की परीक्षा हो जाएगी। इन सीटों के उपचुनावों को राजस्थान में दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ये चुनाव जनता का रुख बता देंगे। अजमेर व अलवर लोकसभा उपचुनाव के अतिरिक्त मांडलगढ़ विधानसभा चुनाव में करीब 40 लाख मतदाता भाजपा के सुशासन के दावे या फिर कांग्रेस बदलाव की मांग पर मुहर लगाएंगे। वहीं इन उपचुनाव में मतदाताओं के लिए वीवीपैट मशीनें भी उत्सुकता का कारण हैं।
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मामूली था जीत का अंतर
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फाइल फोटो।
हाल ही में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा ने छठी बार सत्ता में वापसी की है। लेकिन पार्टी को जीत के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। राजनीतिक जानकारों के अनुसार गुजरात के चुनाव नतीजों का असर पड़ोसी राज्य राजस्थान में होने वाले उपचुनावों पर अवश्य पड़ेगा। क्योंकि राजस्थान सीमा से लगते गुजरात के कई जिलों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा था। हालांकि राजस्थान में जहां उपचुनाव होने हैं, वे जिले गुजरात की सीमा से नहीं लगते है, लेकिन फिर भी असर की संभावना व्यक्त की जा रही है।
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बदलाव की भी बयार
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फाइल फोटो।
राजस्थान में अलवर व अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा सीट अभी तक भाजपा के पास थी। इसलिए राजनीतिक जानकाररों के अनुसार इन सीटों के चुनावी नतीजों में बदलाव की पूर्ण संभावना है। क्योंकि अजमेर में सचिन पायलट और अलवर में पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह कांग्रेस के लिए खासे फायदेमंद साबित होंगे। जबकि भाजपा के पास इन जिलों में केन्द्रीय स्तर का कोई नेता नहीं है।
पहली बार होगा उपयोग
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फाइल फोटो।
ईवीएम को लेकर उठते सवालों के बीच चुनाव आयोग यह स्पष्ट कर चुका है कि सभी चुनावों में अब वीवीपैट मशीन का भी उपयोग होगा। इसी क्रम में राजस्थान में पहली बार उपचुनावों में वीवीपैट का उपयोग होने जा रहा है। इसके लिए हिमाचल व अन्य स्थानों से ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनें भी चुनाव वाले जिलों में पहुंच गई। जानकारी के अनुसार जल्द ही जिला चुनाव अधिकारी की अगुवाई में पहली बार उपयोग में आने वाली वीवीपैट मशीनों के बारे में राजनीतिक पार्टियों व स्थानीय मीडिया को इसकी प्रक्रिया समझाई जाएगी।
वीवीपैट मशीन को लेकर आम मतदाता में खासी उत्सुकता है। दरअसल ईवीएम में जुड़ी होने वाली इन मशीनों में मतदाता मतदान करने के बाद करीब छह सैकेण्ड के लिए अपना मत देख सकेगा। मशीनों को उपयोग करने का प्रमुख कारण यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता ने जिसे वोट दिया है वह सही जगह गया है या नहीं फिलहाल उपचुनाव में उपयोग होने वाली इन वीवीपैट मशीनों की जांच की जा रही है।