लोंगेवाला राजस्थान के जैसलमेर का वह गांव है जहां हमारे 120 रियल हीरोज ने तीन हजार पाकिस्तानियों को उल्टे पांव दौड़ाया था। 1971 में हुए इस युद्ध की आज वर्षगांठ है। इसको लेकर 1998 में जेपी दत्ता की फिल्म बॉर्डर भी रिलीज हो चुकी है।
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ऐसे लड़ा गया था लोंगेवाला का युद्ध
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battle of longewala
- फोटो : Amar Ujala
1971 में पांच और छह दिसंबर। स्थान-जैसलमेर का रेतीला इलाका। पाकिस्तान ने अपने नापाक इरादों के चलते भारत पर हमला बोल दिया। पाकिस्तानी सेना की मंशा थी कि रात को हमला किया जाए और लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर..। लेकिन भारतीय सेना ने जज्बे का पाकिस्तान को अंदाजा नहीं था। संख्या बल के लिहाज से बहुत कम होने के बावजूद हौसला कम नहीं था। ऐसा जबाव दिया कि पाकिस्तान के तीन हजार सैनिक उल्टे पांव भागने लगे।
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120 भारतीय जवानों के सामने थे 3 हजार पाकिस्तानी
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फाइल फोटो
थार रेगिस्तान में लोंगेवाला की लड़ाई पांच और छह दिसंबर 1971 को लड़ी गई थी । इस लड़ाई के दौरान 23वी पंजाब रेजीमेंट के 120 भारतीय सिपाहियों की एक टोली ने पाकिस्तानी सेना के तीन हजार फौजियों को धूल चटा दी थी। भारतीय वायुसेना ने इस लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी ।
पाकिस्तान की चाल उसी पर पड़ी भारी
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लोंगेवाला गांव
शायद आपको जानकारी हो कि 1971 की भारत पाकिस्तान लड़ाई का मुख्य फोकस था सीमा का पूर्वी हिस्सा । पश्चिमी हिस्से की निगरानी सिर्फ इसलिए की जा रही थी ताकि याहया खान के नेतृत्व में लड़ रही पाकिस्तानी सेना इस इलाके पर कब्जा करके भारत सरकार को पूर्वी सीमा पर समझौते के लिए मजबूर ना कर दे ।
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लोंगेवाला में नाश्ता, रामगढ़ में लंच और जोधपुर में डिनर के थे मंसूबे
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लोंगेवाला
- फोटो : Amar Ujala
पाकिस्तान ने पंजाब और राजस्थान के इलाकों में अपने जासूस फैला रखे थे । उनकी योजना किशनगढ़ और रामगढ़ की ओर से राजस्थान में घुसपैठ करने की थी । पाकिस्तान के ब्रिगेडियर तारिक मीर ने अपनी योजना पर विश्वास प्रकट करते हुए कहा था..इंशाअल्लाह हम नाश्ता लोंगेवाला में करेंगे। दोपहर का खाना रामगढ़ में खाएंगे और रात का खाना जैसलमेर में होगा। यानी उनकी नजर में सारा खेल एक ही दिन में खत्म हो जाना था।
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मेजर चांदपुरी से लेकर लेफ्टिनेन्ट धरमवीर तक सबकुछ असली
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डेमो इमेज
पांच दिसंबर की सुबह लेफ्टिनेन्ट धरमवीर को गश्त के दौरान सीमा पर घरघराहट की आवाजें सुनाई दीं । जल्दी ही इस बात की पुष्टि हो गई कि पाकिस्तानी सेना अपने टैंकों के साथ लोंगेवाला पोस्ट की तरफ बढ़ रही है । फौरन मेजर चांदपुरी ने बटालियन के मुख्यालय से संपर्क करके हथियार और फौजियों की टोली को भेजने का निवेदन किया । इस समय तक लोंगेवाला पोस्ट पर ज्यादा हथियार नहीं थे । मुख्यालय से निर्देश मिला कि जब तक मुमकिन हो भारतीय फौजी डटे रहें। पाकिस्तानी सेना को आगे ना बढ़ने दिया जाए । मदद भेजी जा रही है। संख्या और हथियारों में पीछे होने के बावजूद भारतीय सिपाहियों ने हिम्मत नहीं हारी। सवेरा हो गया, लेकिन पाकिस्तानी सेना लोंगेवाल पोस्ट पर कब्जा नहीं कर सकी ।
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इंडियन एयरफोर्स ने पाक सेना को दौड़ाया था उल्टे पांव
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फाइल फोटो
भारतीय वायुसेना के हॉकर हंटर एयरक्राफ्ट में नाइट विजन उपकरण नहीं लगे थे, इसलिए दिन का उजाला होने तक वायुसेना हमला नहीं कर सकती थी । बहरहाल दोपहर तक भारतीय हवाई हमले ने पाकिस्तानी सेना के चालीस टैंकों और 100 गाड़ियों को तबाह कर दिया और उसकी कमर तोड़ दी। भारतीय वायुसेना के पहले दो हंटर विमानों ने जब उड़ान भरी तो लोंगेवाला पर पाकिस्तानी सेना का हमला जारी था। हालांकि वो बहुत ज्यादा कामयाबी नहीं हासिल कर पाई थी।
फ्लाइट लेफ्टिनेन्ट डीके दास और फ्लैग ऑफिसर आरसी गोसाईं अपने विमान को काफी कम ऊंचाई पर लेकर आए और पाकिस्तान के टी-59 टैंकों पर निशाना साधा । अब लड़ाई भारतीय वायुसेना और पाकिस्तान तोपखाने के बीच थी । हमारे हवाई जांबाज पाकिस्तानी टैंकों को ध्वस्त कर रहे थे। पर पाकिस्तानी सेना लोंगेवाल की ओर बढ़ती चली जा रही थी । एक के बाद एक भारतीय वायुसेना के विमान उड़ान भर रहे थे और हमले कर रहे थे । आखिरकार भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर ही दिया। भारत पाकिस्तान के इस युद्ध में पाकिस्तान ने आक्रमण कर लोंगेवाला तक कब्जे का प्रयास किया परन्तु माता तनोट की कृपा से भारतीय फौज ने शत्रु को परास्त कर दिया और विजय प्राप्त की। युद्ध के दौरान यहां 3000 बम गिराए गए परन्तु माता तनोट की कृपा से एक दो बम ही फटे तथा कोई जनहानि नहीं हुई।