इतिहास के पन्नों में सबसे खुंखार तानाशाह के रूप में माने जाने वाले जर्मनी के शासक एडोल्फ हिटलर के बारे में एक और दावा किया गया है। इस बार ये दावा राजस्थान सरकार की एक पत्रिका में किया गया है। इसमें कहा गया है कि हिटलर एक टाइम मशीन का निर्माण करने वाला था और इसके निर्माण करने का आइडिया उसे कहीं और से नहीं बल्कि भारतीय पौराणिक किताबों से मिला था।
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'शिविरा' में छपा है लेख
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shivira magazine
माध्यमिक शिक्षा विभाग राजस्थान सरकार की मासिक पत्रिका 'शिविरा' में छपे लेख 'प्राचीन भारत और विज्ञान' में लिखा गया है कि हिटलर भी प्राचीन भारतीय ग्रंथों पर अध्ययन कर टाइम मशीन बनाना चाहता था। इतना ही नहीं हिटलर ने स्वास्तिक जैसा दिखाई पड़ने वाला अपने प्रतीक चिन्ह का चुनाव भी भारतीय ग्रंथो में देखने के बाद किया था।
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आइंस्टीन को लेकर लिखा
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albert einstein
शिविरा पत्रिका के फरवरी माह के अंक में वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को लेकर कहा गया है कि वो भारतीय पुराणों से इतने प्रभावित थे कि उन्होनें कई बार बड़े मंचों से प्रशंसा भी की थी।
शिक्षक ने लिखा है लेख
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shivira
जानकारी के अनुसार इस लेख को बीकानेर के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले अध्यापक दीपक जोशी ने लिखा है। हालांकि पत्रिका के संपादक का कहना है कि ये इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार रखें है जिसे लेकर पत्रिका कोई दावा नहीं करती है। वहीं संपादक का ये भी कहना है कि उन्होनें भी कई वेबसाइटों और किताबों में ये बात पढ़ी है कि आइंस्टीन और हिटलर पौराणिक भारतीय ग्रंथो से काफी प्रभावित थे और उनका इस्तेमाल करना चाहते थे।
हालांकि कई बार पढ़ने और सुनने को मिला है कि विश्व में एयरोप्लेन का आविष्कार राइट बंधुओ ने 'वैमानिक शास्त्र' नाम की पौराणिक भारतीय किताब से प्रेरणा लेकर विमान का आविष्कार किया था और इस बात को सत्यार्थ करने के लिए रामायण काल में पुष्पक विमान से किया जाता है।