लगातार ओटीटी सीरीज और फिल्मों में दिखीं अभिनेत्री राधिका आप्टे से पब्लिक बोर हो चुकी है। वह खुद भी लंबे अरसे से ब्रेक पर हैं। अब ओटीटी वालों को एक ऐसी नई मराठी बाला की तलाश है जो राधिका आप्टे की देहयष्टि को परदे पर टक्कर दे सके। नेटफ्लिक्स ने अपनी वेब सीरीज शी में इसीलिए अदिति पोहनकर को और जी5 ने अपनी चर्चित सीरीज सेक्स, ड्रग्स और थिएटर में नयना मूके को मौका दिया। अब बारी एमएक्स प्लेयर की है जिसने अनुजा साठे को एक थी बेगम में लीड किरदार के तौर पर पेश किया है। अनुजा से अमर उजाला की एक खास बातचीत।
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ek thi begum
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फिल्म 'परमाणु' में जॉन अब्राहम की पत्नी का किरदार और 'ब्लैकमेल' में इरफान खान को ब्लैकमेल करने के बाद अब आप अशरफ भटकर बनी हैं। एक थी बेगम में बोल्ड सीन्स और गाली-गलौज की भरमार है। क्या एक वेब सीरीज इनके बिना नहीं बन सकती?
मैं दूसरी सीरीज के बारे में कुछ नहीं कह सकती क्योंकि यह उन मेकर्स की पसंद, नापसंद पर निर्भर करता है। लेकिन 'एक थी बेगम' के बारे में बात करूं तो यह असलियत के करीब है। हम जिस समय और जिस कहानी को पेश कर रहे हैं उस माहौल से जुड़े लोग हमेशा अच्छी भाषा का इस्तेमाल नहीं करते थें। अशरफ की कहानी भी ऐसे ही लोगों को पार करते हुए आगे बढ़ती है। उसकी जिंदगी बिल्कुल भी आसान नहीं होती है। वह सीधी-साधी लड़की से एक बार डांसर बन जाती है। ऐसी कहानियों को पेश करने में अगर एडल्ट कंटेंट का इस्तेमाल होता है तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है।
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आप कई सुपरस्टार्स अभिनीत फिल्मों का हिस्सा रह चुकी हैं। उन फिल्मों के चयन का कारण क्या सिर्फ बड़े कलाकारों की मौजूदगी थी?
नहीं, 'बाजीराव मस्तानी' से लेकर 'पेशवा बाजीराव', 'खूब लड़ी मर्दानी...' की बात करें तो मुझे निजी तौर पर इतिहास अच्छा लगता है। मैं हिस्ट्री लवर हूं। मैं पुणे से हूं इसलिए पेशवा बाजीराव का इतिहास मुझे शुरू से ही आकर्षित करता है। बचपन से मैं वीरता की कहानी सुनते हुए बड़ी हुई हूं इस वजह से जब इन प्रोजेक्ट्स के मेरे पास ऑफर आए तो मुझे इसे स्वीकार करना ही था। मुझे इरफान खान के साथ फिल्म 'ब्लैकमेल' और 'परमाणु' में जॉन अब्राहम के साथ काम करने का मौका मिला जिसके लिए मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं।
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आपने अपने करियर में कई बड़ी फिल्मों में अभिनय किया है, उन प्रोजेक्ट्स की तुलना में 'एक थी बेगम' किन मायनों में अलग है?
एक थी बेगम में अशरफ का मेरा किरदार चुनौतीपूर्ण रहा जिसने मुझे भी सीखने की लिहाज से काफी मदद की। इस किरदार की तैयारी के लिए मैंने अपने निर्देशक के साथ बैठकर बहुत काम किया। बातचीत के दौरान कहानी के अंदर की चीज निकाली। किरदार को करीब से समझा। रिसर्च टीम ने भी अपनी तरफ से काफी मेहनत की हुई थी। लेकिन कंटेंट इतना अधिक हो गया था कि भटकाव से बचने के लिए मैंने अपने निर्देशक की सुनी। मैंने उनसे समझा कि आखिर उनकी सोच क्या है और उन्हें मुझसे क्या चाहिए। उन्होंने मुझे जैसा समझाया मैंने वैसा ही किया।
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क्या शूट के दौरान कभी कोई ऐसा क्षण आया जब आपक भावुक हुई हों या किसी सीन को करने से पहले हिचकिचाहट हुई हो?
हां, शूट के दौरान कुछ क्षण ऐसे रहे जहां मैंने थोड़ी भावुक हुई और किरदार के इमोशन्स से जुड़ गई जो अभिनय के दृष्टिकोण से अच्छा ही है। वैसे भी थियेटर की वजह से मैं झट से किरदार के अंदर और बाहर जा सकती हूं। किरदार की तैयारी करते समय भी मैं घर में अनुजा और सेट पर अशरफ रहती थी और वैसा ही बर्ताव करती थीं। हालांकि शूट के दौरान मैं चाहे जितना ही रम क्यों ना गई हूं लेकिन निर्देशक के द्वारा पैकअप कहते ही वापस सामान्य हो जाती थी। रही हिचकिचाहट की बात तो ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
मेरे माता पिता एसबीआई में मैनेजर रहे। मेरे करीबियों में कोई भी इस इंडस्ट्री से नहीं था। परिवार को भी इस बारे में बहुत कुछ पता नहीं था लेकिन उन्होंने इसके बावजूद मुझे पूरी तरह से सपोर्ट किया। मैं जब जो करना चाहती थी उन्होंने वह करने दिया। साइकोलॉजी में पढ़ाई करने के बाद पोस्ट ग्रेजुएशन छोड़ कर मैंने पूरी तरह से अभिनय को समय देने का फैसला किया और मेरे घरवाले उस निर्णय के भी साथ में खड़े रहे।
लॉकडाउन के दौरान आप घर में कैसे समय व्यतीत कर रही हैं।
इन दिनों मैं वह सभी काम कर रही हूं जो पहले वक्त की कमी से नहीं कर पाती थी। मैं ओटीटी पर वक्त गुजार रही हैं। बहुत सारी ऐसी वेब सीरीज और फिल्में थी जिन्हें देखना बाकी था। खाना बना रही हूं, घर की सफाई कर रही हूं। पहले इन सभी चीजों के लिए मौका नहीं मिल पाता था लेकिन अब समय का सदुपयोग मैं इस तरह से कर रही हूं।