हाल ही में भारतीय नौसेना के युद्धपोत में हुए एक हादसे और उसमें चीफ इंजीनियर आशु सिंह की मौत के बाद आईएनएस 'विराट' एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यह युद्धपोत इसी साल जून में रिटायर होने जा रहा है। आइए जानते हैं इस युद्धपोत से जुड़ी अन्य रोचक बातें।
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दूसरी बार होगा रिटायर
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आईएनएस विराट
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आईएनएस विराट दुसरी बार रिटायर होने जा रहा है। दूसरी बार इसलिए क्योंकि भारतीय नौसेना से पहले इस युद्धपोत का इस्तेमाल ब्रिटिश नौसेना करती थी।
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ब्रिटिश नौसेना का था हिस्सा
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ब्रिटिश नौसेना में इसे 'हर्मिस' के नाम से जाना जाता था। ब्रिटेन की रॉयल नेवी में इसे 25 नवंबर 1959 में शामिल किया गया और 1984 में यह पहली बार रिटायर हुआ।
1987 में भारतीय नौसेना में शामिल
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रिटायर होने के बाद इसे भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। 12 मई 1987 में इसे भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया गया और एक नया नाम 'विराट' दिया गया।
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30 साल तक की नौसेना की सेवा
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भारतीय नौसेना में विराट ने करीब 30 साल तक अपनी सेवा दी। इस दौरान इसने भारत की समुद्री सीमाओं की निगरानी करने में अहम भूमिका भी निभाई।
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खतरनाक हथियारों से लैस
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क्षमता- विराट एक ऐसा युद्धपोत है जो करीब 80 लाइटवेट टॉरपीडो ले जाने में सक्षम है। इसके अलावा कमांडो ऑपरेशन के दौरान यह 750 सैनिकों के ले जाने में भी सक्षम है।
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चार एलसीवीपी लैंडिंग क्रॉफ्ट ले जाने में सक्षम
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विराट में चार एलसीवीपी लैंडिंग क्रॉफ्ट भी आसानी से रखे जा सकते हैं जिसका इस्तेमाल जमीनी कार्रवाई के दौरान सैनिकों को ले जाने में किया जाता है।
26 लड़ाकू विमानों की तैनाती की जा सकती है
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युद्ध जैसी स्थिति में विराट पर 26 लड़ाकू विमानों की तैनाती की जा सकती है। यह दो तरह से मिशन को अंजाम देने में सक्षम है जिसमें पहला एंफिबियस ऑपरेशन और दूसरा एंटी सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शामिल है।
चार स्क्वाड्रन की तैनाती
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विराट पर नैसेना के चार स्क्वाड्रनों की तैनाती की जाती है। इसमें पहले स्क्वाड्रन को 'व्हाइट टाइगर्स' के नाम से जाना जाता है। इस स्क्वाड्रन में सी हैरियर लड़ाकू विमानों की तैनाती की जाती है।
सी हैरियर संभालते हैं मोर्चा
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दूसरा स्क्वाड्रन 'द ब्रेव्स' है और इसमें भी सी हैरियर विमान ही मोर्चा संभालते हैं। तीसरा स्क्वाड्रन 'एन्जेल्स' है जिसमें चेतक हेलीकॉप्टरों की तैनाती होती है। चौथा और अंतिम स्क्वाड्रन को 'हॉर्पून' के नाम से जाना जाता है।
रिटायमेंट के बाद इस ऐतिहासिक युद्धपोत को आंध्र प्रदेश सरकार के हवाले कर दिया जाएगा। राज्य सरकार इस पोत का इस्तेमाल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए करेगी और इसे पांच सितारा होटल के रूप में परिवर्तित किए जाने की योजना है।