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महिला दिवस विशेष: इंदिरा गांधी से ममता बनर्जी तक, इन महिलाओं ने बदल दिया राजनीति का नजरिया

Mon, 08 Mar 2021 07:09 AM IST
कुमार संभव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
वैसे तो उन्हें 'आधी आबादी' का दर्जा दिया गया है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब उन्हें सिर्फ घर की चारदीवारी में ही कैद रखा जाता था। ...लेकिन बदलते वक्त के साथ उन्होंने पुरुष प्रधान समाज की हर जंजीर को तोड़ा और अपने रास्ते में आने वाली हर दीवार ढहा दी। आज ट्रेन से लेकर प्लेन चलाने में महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं और राजनीति में भी उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। दरअसल, महिलाओं ने देश की आजादी से लेकर सरकार चलाने तक में अहम भूमिका निभाई है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। ऐसे में हम रूबरू होते हैं उन महिला नेताओं से, जिन्होंने फौलादी इरादों से भारतीय राजनीति का नजरिया ही बदल दिया। साथ ही, हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद कैसे साल-दर-साल राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ती चली गई।
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राजकुमारी अमृत कौर

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राजकुमारी अमृत कौर - फोटो : Facebook/Alexander Dean Williams
बात भारतीय राजनीति में महिलाओं की हो और उसमें राजकुमारी अमृत कौर का जिक्र न हो, ऐसा होना नामुमकिन है। दरअसल, राजकुमारी अमृत कौर देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं। आजाद भारत में पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार बनी तो 20 मंत्रियों की कैबिनेट में जगह पाने वाली वह पहली महिला थीं। नेता बनने से पहले राजकुमारी ने आजादी की लड़ाई में भी योगदान दिया था। इसके अलावा महात्मा गांधी के साथ उन्होंने सचिव के रूप में भी काम किया था। वहीं, दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम ने उन्हें साल 1947 की वुमन ऑफ द ईयर भी चुना था। देश में एम्स बनाने का श्रेय भी राजकुमारी अमृत कौर को ही दिया जाता है। 
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सरोजिनी नायडू

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सरोजिनी नायडू
बात साल 1947 की है। देश को आजादी मिली थी और राज्यों का गठन हो रहा था। उस वक्त देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश का निर्माण हुआ तो उसके राज्यपाल की जिम्मेदारी सरोजिनी नायडू को दी गई। वह देश की पहली महिला राज्यपाल थीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल का पद 1947 से 1949 तक संभाला।

इंदिरा गांधी

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इंदिरा गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके फौलादी इरादों और फैसलों के लिए आज भी याद किया जाता है। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री पद को संभाला। हालांकि, चौथे कार्यकाल के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि, उनके राजनीतिक काल में एक वक्त ऐसा भी था, जब उनकी ही पार्टी के नेता उन्हें 'गूंगी गुड़िया' कहकर बुलाते थे, लेकिन अपने फैसलों के दम पर इंदिरा ने न सिर्फ उन नेताओं की बोलती बंद की, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी धमक कायम की।
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सुचेता कृपलानी

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सुचेता कृपलानी - फोटो : अमर उजाला
देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी थीं। प्रसिद्ध गांधीवादी नेता आचार्य कृपलानी की पत्नी सुचेता ने साल 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। बता दें कि देश की आजादी में अहम योगदान निभाने वाली सुचेता अंग्रेजों के शासनकाल में कई बार जेल भी गई थीं। 
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मीरा कुमार

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मीरा कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
कांग्रेस पार्टी की प्रमुख नेताओं में से एक मीरा कुमार लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष बन चुकी हैं। बता दें कि बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाली मीरा कुमार कई साल तक स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं, लेकिन अफसरशाही उन्हें रास नहीं आई। ऐसे में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। बता दें कि मीरा कुमार की सास सुमित्रा देवी बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री थीं। 
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निर्मला सीतारमण

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
निर्मला सीतारमण उन महिला नेताओं में से एक हैं, जो बेहद कम समय में राजनीति के शिखर पर पहुंचीं। देश की पहली महिला रक्षा मंत्री बनने के अलावा वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री भी हैं। बता दें कि उनसे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पीएम पद के साथ-साथ वित्त मंत्री और रक्षा मंत्री का पदभार संभाला था, लेकिन सीतारमण से पहले किसी भी महिला को ये दोनों पद स्वतंत्र प्रभार के रूप में नहीं मिले थे।

सोनिया गांधी

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सोनिया गांधी - फोटो : ANI
जब भी बात सोनिया गांधी की होती है तो उनके विदेशी मूल का मुद्दा हावी हो जाता है, लेकिन देश की राष्ट्रीय पार्टी का नेतृत्व करने वाली वह पहली विदेशी महिला हैं। साल 1999 के दौरान जब कांग्रेस पूरी तरह तितर-बितर हो चुकी थी, तब उन्होंने पार्टी को मजबूती से संभाला और सत्ता के शिखर तक पहुंचाया। सबसे लंबे समय तक कांग्रेस अध्यक्ष बनने की उपलब्धि भी सोनिया के नाम पर ही दर्ज है। इसके अलावा वह यूपीए की अध्यक्ष भी हैं।

मायावती

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बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती का कद बेहद अहम है। वह प्रदेश की राजनीति का मजबूत स्तंभ हैं और चार बार इस सूबे की मुख्यमंत्री बन चुकी हैं। मायावती देश के सबसे कमजोर वर्गों अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व करती हैं। बता दें कि एक वक्त ऐसा भी था, जब मायावती भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी कर रही थीं, लेकिन 1977 में वह बसपा संस्थापक कांशीराम के संपर्क में आईं और राजनीति में आने का फैसला कर लिया। 

शीला दीक्षित

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शीला दीक्षित - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली को सजाने का सपना भाजपा नेता मदनलाल खुराना ने देखा था, लेकिन उसे संवारने का श्रेय शीला दीक्षित को ही जाता है। लगातार तीन बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनने वाली शीला दीक्षित का कद राजनीति में बेहद अहम रहा। उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस को मजबूती दी। हालांकि, राष्ट्रमंडल खेलों में कथित घोटाले और अन्ना आंदोलन का खमियाजा शीला दीक्षित को भी भुगतना पड़ा था। 

सुषमा स्वराज

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सुषमा स्वराज - फोटो : PTI
सुषमा स्वराज उन महिला नेताओं में से एक रहीं, जिनके फैन न सिर्फ उनकी पार्टी भाजपा में थे, बल्कि विपक्षी राजनीतिक दल भी उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे। बता दें कि सुषमा दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी बनी थीं। इसके अलावा उन्होंने भाजपा सरकार में विदेश मंत्री का कार्यभार भी संभाला।

जयललिता

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जयललिता
तमिलनाडु की राजनीति का जिक्र हो और उसमें जयललिता का नाम न आए, ऐसा हो नहीं सकता। वह चार बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। बता दें कि महज 15 साल की उम्र से जयललिता फिल्मों में काम करने लगी थीं। 1965 से 1972 के दौरान उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ कीं, जो 1982 में उन्हें राजनीति में खींच लाए। गौरतलब है कि जयललिता तमिलनाडु की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री भी रहीं।

शशिकला

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शशिकला - फोटो : सोशल मीडिया
तमिलनाडु की राजनीति में जयललिता के बाद अगर किसी महिला नेता का नाम लिया जाता है तो वह शशिकला ही हैं। जयललिता की खास दोस्त शशिकला उनकी राजनीतिक सफरनामे की गवाह बनीं। बता दें कि शशिकला शुरुआत में जयललिता के कार्यक्रमों में फोटोग्राफी करती थीं और धीरे-धीरे उनकी खास सहेली बन गईं। जयललिता के निधन के बाद शशिकला एआईएडीएमके की महासचिव बनीं, लेकिन आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चार साल की सजा सुना दी। इसके बाद पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से शशिकला को बाहर कर दिया गया। अब उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने का एलान भी कर दिया है।

किरण बेदी

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देश की पहली महिला आईपीएस अफसर किरण बेदी
किरण बेदी की पहचान भले ही देश की पहली महिला आईपीएस होने से है, लेकिन राजनीति के क्षेत्र में भी उन्होंने अपना दमखम दिखाया है। साल 2015 के दौरान उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वह 2016 में पुडुचेरी की उपराज्यपाल नियुक्त की गई थीं।

प्रतिभा पाटिल

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प्रतिभा पाटिल
देश की आजादी को 74 साल बीत चुके हैं। इस दौरान भारत में सिर्फ एक ही महिला राष्ट्रपति बनी हैं और उनका नाम प्रतिभा पाटिल है। उन्होंने 2007 से 2012 तक राष्ट्रपति पद संभाला। साथ ही, साबित किया कि नीति निर्णायक मामलों में भी महिलाएं आगे रह सकती है। बता दें कि प्रतिभा पाटिल को विदेशियों को दिए जाने वाले मैक्सिको के सर्वोच्च पुरस्कार ऑर्डेन मैक्सिकाना डेल एग्वेला एज्टेका से भी नवाजा गया। 

महबूबा मुफ्ती

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महबूबा मुफ्ती - फोटो : ANI
देश की सियासत में जाने-माने महिला चेहरों का जिक्र करें तो महबूबा मुफ्ती का नाम भी सामने आता है। वह जम्मू-कश्मीर में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष हैं। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले वह राज्य की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं।

वृंदा करात

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वृंदा करात - फोटो : ANI
वृंदा करात देश की कम्युनिट नेता हैं। साल 2005 में वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से राज्यसभा सदस्य चुनी गई थीं। इसके अलावा वह सीपीआई में शामिल होने वाली पहली महिला सदस्य भी हैं।

ममता बनर्जी

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI
पश्चिम बंगाल की राजनीति का जिक्र करें तो वह तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। राज्य में वामपंथी दलों को उखाड़ फेंकने के बाद वह राज्य में 10 साल तक मुख्यमंत्री के पद पर काबिज हैं और लगातार तीसरी जीत पर नजरें बनाए हुए हैं।

उमा भारती

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उमा भारती (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
मध्यप्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री उमा भारती की पहचान भाजपा के फायर ब्रांड नेताओं में से है। उन्होंने मध्यप्रदेश में भाजपा को सत्ता का स्वाद उस वक्त चखाया था, जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी और दिग्विजय सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने अकेले पूरे अभियान की कमान संभाली और कांग्रेस को ऐसे उखाड़ा कि वह 15 साल तक सत्ता से बाहर रही।

वसुंधरा राजे सिंधिया

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वसुंधरा राजे - फोटो : PTI
राजस्थान की राजनीति के दिग्गजों का जिक्र हो और उसमें वसुंधरा राजे सिंधिया का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता। राजस्थान में भाजपा का वर्चस्व कायम रखने से लेकर मुख्यमंत्री पद संभालने की जिम्मेदारी वह बखूबी निभाती रही हैं। उन्होंने कई बार अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है।

प्रियंका गांधी

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प्रियंका गांधी - फोटो : पीटीआई
साल 2014 से राजनीतिक बिसात में चौतरफा मात खा रही कांग्रेस के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा को संजीवनी की तरह माना जा रहा है। उनमें पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अक्स देखा जाता है। माना जाता है कि अगर वह पूर्णरूप से राजनीति में कदम रखती हैं तो इंदिरा जैसे फौलादी फैसले ले सकती हैं। फिलहाल, प्रियंका उत्तर प्रदेश की महासचिव हैं और 2022 के दौरान यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव का दारोमदार उन पर है। 
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राजनीति में ऐसे बढ़ा महिलाओं का दखल

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संसद - फोटो : सोशल मीडिया
इस रिपोर्ट में हमने आपको उन महिला नेताओं के बारे में बताया, जिन्होंने राजनीति में अपना दमखम दिखाया है। अब हम आपको बताते हैं कि देश को आजादी मिलने के बाद से अब तक राजनीति में महिलाओं का दखल किस तरह बढ़ा। साल 1952 में जब पहली लोकसभा बनी, तब कुल 22 महिला उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, लेकिन कैबिनेट में सिर्फ राजकुमारी अमृत कौर को जगह मिली। इसके बाद हर लोकसभा चुनाव में जीतने वाली महिला नेताओं की संख्या बढ़ती चली गई। 
 
लोकसभा कुल सीटें महिला सांसद
पहली लोकसभा (1952) 489 22
दूसरी लोकसभा (1957) 494 27
तीसरी लोकसभा (1962) 494  34
चौथी लोकसभा (1967) 523 31
पांचवीं लोकसभा (1971) 521 22
छठी लोकसभा (1977) 544  19
सातवीं लोकसभा (1980) 544 28
आठवीं लोकसभा (1984)  544 44
नौवीं लोकसभा (1989) 529 28
दसवीं लोकसभा (1991) 509 36
ग्यारहवीं लोकसभा (1996) 541 40
बारहवीं लोकसभा (1998) 545 44
तेरहवीं लोकसभा (1999) 543 48
चौदहवीं लोकसभा (2004) 543 45
पंद्रहवीं लोकसभा (2009) 543 59
सोलहवीं लोकसभा (2014) 543 61
सत्रहवीं लोकसभा (2019) 543 78
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