दुनिया का एक छोटा सा देश सबसे ताकतवर देशों के खिलाफ सीना तान के खड़ा हो गया है। मार्शल आइलैंड के नाम से जाना जाने वाले इस देश ने जिन ताकतवर देशों को चुनौती दी है उसमें अमेरिका, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस, भारत, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और इजराइल जैसे देश शामिल हैं। इन देशों की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सभी देश परमाणु शक्ति संपन्न हैं।
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में लगाई गुहार
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मार्शल द्वीप
मार्शल आइलैंड ने इन देशों की इसी ताकत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में गुहार लगाकर ललकारने की कोशिश की है। तो आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और आखिर ऐसा क्या हो गया जिसने इस छोटे से देश को इन ताकतवर देशों के खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर होना पड़ा?
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धमकों का विरोध
- फोटो : Getty Images
दरअसल, मार्शल आइलैंड ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में परमाणु हथियारों की दौड़ में शामिल भारत के खिलाफ इसको रोकने के लिए कारगर प्रयास नहीं करने का आरोप लगाया। मार्शल ने भारत के अलावा आठ अन्य परमाणु शक्ति संपन्न देशों के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किए जिसमें से भारत. ब्रिटेन और पाकिस्तान के
खिलाफ ही सुनवाई तय हुई।
एनपीटी नियमों के उल्लंघन का आरोप
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अंतरराष्ट्रीय अदालत
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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इस मुद्दे पर सबसे पहले भारत को अपना पक्ष रखना है। इसके बाद पाकिस्तान और ब्रिटेन का नंबर आएगा। मार्शल आइलैंड का कहना है कि परमाणु शक्ति संपन्न इन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के नियमों का उल्लंघन किया है और परमाणु हथियारों के विकास पर रोक लगाने में नाकाम रहें हैं।
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परमाणु संय़ंत्र
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हालांकि, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया ऐसे देश हैं जिन्होंने एनपीटी पर अब तक दस्तखत नहीं किए हैं। इसके अलावा इजराइल ने कभी यह कबूल नहीं किया कि वह परमाणु शक्ति संपन्न देश है। नौ परमाणु शक्ति संपन्न देशों के खिलाफ मार्शल आइलैंड का प्रतिनिधित्व कर रहे टोनी डीब्रम ने अंतरराष्ट्रीय अदालत में कहा कि परमाणु धमाका उनसे करीब 200 किमी की दूरी पर हुआ। धमाके के बाद पूरा आकाश खून की तरह लाल हो गया।
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चली गई सैकड़ों की जान
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मानव श्रृंखला
उन्होंने बताया कि इस धमाके में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और कई जन्म से ही विकलांग पैदा हुए। परमाणु विकिरण के कारण कई लोग कैंसर के शिकार भी हो गए। इस धमाके ने सैकड़ों की जिंदगी बर्बाद कर दी।
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इतिहास के पन्नों में मार्शल आइलैंड
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मार्शल द्वीप का पोस्ट टिकट
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द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले मार्शल आइलैंड पर जापान का अधिकार था लेकिन 1944 के बाद इस पर अमेरिका का कब्जा हो गया। इस द्वीप पर अमेरिका ने करीब तीस साल तक शासन किया। 1986 में मार्शल आइलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया गया लेकिन उसके बाद भी वहां अमेरिकी सेना का नियंत्रण था।
कई साल तक किए परमाणु परीक्षण
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मार्शल द्वीप के लोग
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मार्शल पर कब्जे के बाद अमेरिका ने साल 1946 से 1958 के बीच इस द्वीप पर करीब 67 पहमाणु परीक्षण किए जिसकी वजह से इस द्वीप समूह के कई द्वीप गायब हो गए। इतना ही नहीं कुछ द्वीप तो इस कदर परमाणु विकिरणों का शिकार हुए कि हजारों साल तक इस पर जीवन संभव नहीं है।
यह वहीं द्वीप समूह है जिस पर अमेरिका ने 1 मार्च 1954 में पहली बार हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया था। यह बम जापान के हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम से 1000 गुना ज्यादा शक्तिशाली था। एक तरह से देखा जाए तो यह देश सबसे बड़ा परमाणु बम परीक्षण स्थल बन कर रह गया।