मालविका ने बताया कि मई, 2002 की छब्बीस तारीख। उस दिन सबकी छुट्टी थी, रविवार का दिन था। मैं नवीं कक्षा में थी। मम्मी-पापा सभी लोग घर पर थे। कुछ मेहमान उनसे मिलने आए थे। पापा मेहमानों के साथ बैठक कक्ष में बैठे थे। मेरी बहन उनके लिए रसोई में चाय बना रही थी। गर्मी बढ़ गई थी, सो मां कूलर में पानी भरने गई हुई थीं। तभी मेरी नजर अपनी जींस की फटी जेब पर गई।