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Cough Syrup Row: भारतीय कंपनी के कफ सिरप को बच्चों की मौत से जोड़ना चिंताजनक, विशेषज्ञ बोले- जांच जरूरी

Sat, 08 Oct 2022 05:46 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉ. वाई के गुप्ता ने कहा, डब्ल्यूएचओ द्वारा गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत को एक भारतीय दवा निर्माता कंपनी के कफ सिरप से जोड़ना चिंताजनक है। हालांकि, इसमें कुछ लिंक गायब हैं जिनका सावधानीपूर्वक पता लगाने और जांच करने की आवश्यकता है। 
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cough syrup - फोटो : istock
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में एक भारतीय दवा कंपनी द्वारा निर्मित कफ सिरप (खांसी की दवा) को लेकर चेतावनी जारी की है। इसको लेकर एक विशेषज्ञ ने शनिवार को कहा कि इस कफ सिरप को गाम्बिया में हुई 66 बच्चों की मौत से जोड़ना चिंताजनक है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी कुछ कड़ियां गायब हैं जिनकी जांच की आवश्यकता है। 
 
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डब्ल्यूएचओ ने इन चार कफ सिरप को लेकर जारी की चेतावनी

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विश्व स्वास्थ्य संगठन - फोटो : पिक्साबे
डब्ल्यूएचओ की ओर से जारी चेतावनी में कहा गया था कि मेडेन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए चार दूषित कफ सिरफ पश्चिम अफ्रीकी देश गाम्बिया में बच्चों की मौत का कारण हो सकते हैं। स्वास्थ्य संगठन ने जिन चार कफ सिरफ को लेकर चेतावनी जारी की, उनमें प्रोमेथाजिन ओरल सॉल्यूशन, कोफेक्समालिन बेबी कफ सिरफ, मकॉफ बेबी कफ सिरप और मैग्रीप एन कोल्ड कफ सिरप शामिल हैं।
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भारतीय दवा कंपनी को गाम्बिया में बच्चों की मौत से जोड़ना चिंताजनक

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कफ सिरप से गंभीर दुष्प्रभावों का खतरा - फोटो : istock
सीनियर फार्माकोलॉजिस्ट एंड स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स (एसएनसीएम) के उपाध्यक्ष डॉ. वाई के गुप्ता ने कहा, डब्ल्यूएचओ द्वारा गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत को एक भारतीय दवा निर्माता कंपनी के कफ सिरप से जोड़ना चिंताजनक है। हालांकि, इसमें कुछ लिंक गायब हैं जिनका सावधानीपूर्वक पता लगाने और जांच करने की आवश्यकता है।

जुलाई में भी सामने आया ऐसा ही मामला

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cold cough syrup - फोटो : फाइल फोटो
प्रोफेसर गुप्ता ने कहा, इसी कारण होने वाली एक संदिग्ध मौत जुलाई में दर्ज की गई थी। डीजीसीआई (ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) को 29 सितंबर को डब्ल्यूएचओ से एक संचार मिला था। इसके बाद भारत सरकार और ड्रग रेगुलेटर तुरंत हरकत में आए और उन्होंने पूरे विवरण के साथ पत्र का तुरंत जवाब दिया। 1 अक्तूबर को रविवार और 2 अक्तूबर को राष्ट्रीय अवकाश होने के बावजूद जांच शुरू की गई।
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एक ही देश के भीतर दवाओं के निर्यात का दिया गया था लाइसेंस

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा, यहां यह समझना जरूरी है कि डीजीसीआई केवल नई दवा को मंजूरी देता है, जबकि निर्माण और बिक्री का लाइसेंस स्टेट ड्रग कंट्रोलर द्वारा दिया जता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में स्टेट ड्रग कंट्रोलर द्वारा निर्माण और बिक्री का लाइसेंस दिया गया था। कंपनी को केवल एक ही देश के भीतर दवाओं को निर्यात करने का लाइसेंस दिया गया था, न कि किसी अन्य देश या भारतीय घरेलू बाजार में।
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दवाओं के निर्यात को लेकर भारत की जीरो टॉलरेंस की नीति

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा, डब्ल्यूएचओ द्वारा 23 नमूनों (सैंपल्स) का परीक्षण किया गया था, इनमें केवल चार सैंपल्स में इथाइलीन ग्लाइकॉल पाया गया। उन्होंने कहा, यह चौंकाने वाला है, और अधिक स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। डॉ. गुप्ता ने कहा, इसके अलावा प्रत्येक देश अपने मानकों के अनुसार इन दवाओं का परीक्षण करवाता है। उन्होंने कहा भारत के मानक और नियम बहुत सख्त हैं और ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति है।
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