राजस्थान हाई कोर्ट के जज महेश चंद्र शर्मा के मोर पर दिए गए बयान पर अब देश भर में मोर पर चर्चा शुरू हो गई है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर चर्चा छिड़ी हुई है।
गौरतलब है कि बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान शर्मा ने कहा था 'जो मोर है, ये आजीवन ब्रह्मचारी है। वह कभी भी मोरनी के साथ सेक्स नहीं करता। इसके जो आंसू आते हैं, मोरनी उसे चुगकर गर्भवती होती है, मोर या मोरनी को जन्म देती है।' अब हम आपको बताते हैं कि इस बात में आखिर कितनी सच्चाई है।
पौराणिक कथाओं में भी मोर का जिक्र मिलता है। अगर रामायण की बात करें तो इसमें भी मोर की कहानी मिलती है। जब इंद्र को अहिल्या के साथ पकड़े जाने पर उन्हें मोर बनने का श्राप मिला था तो भगवान राम ने उनके पंखों में ही हजारों आंखें बना दी थीं।
अब अगर हम महाभारत पर आएं तो यहां भी हमें इससे जुड़ी एक कहानी मिलती है। महाभारत के अनुसार भीष्म ने अंबा का अपहरण कर लिया था, लेकिन बाद में वो अंबा से शादी करने से मुकर गए। अपने अपमान से तिलमिलाई अंबा ने आग में कूदकर जान दे दी। अपने अपमान का बदला लेने के लिए अंबा ने शिखंडी के रूप में पुनर्जन्म लिया। आपको बता दें शिखंडी का शाब्दिक अर्थ भी मोर होता है।
इसके अलावा भगवान कृष्ण द्वारा अपने मुकुट पर मोर का पंख लगाये जाने को लेकर ये कहा जाता है कि मोर पवित्रता का प्रतीक होता है। मोर और मोरनी के बीच शारीरिक संपर्क नहीं होता। मोर के आंसू पीकर ही वह अपने बच्चों को जन्म देती है। लेकिन अगर हम इस पर वैज्ञानिक तर्क देखे तो पता चलता है कि आंखों की रक्षा के लिए पक्षियों की आंखों से आंसू निकलता है। आंखों को सूखेपन से बचाने के लिए आंख की आंतरिक झिल्ली भी हर समय चलती रहती है।