जगदीप धनखड़
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आखिर मायावती धनखड़ को ही क्यों दिया समर्थन?
ये समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय सिंह से बात की। उन्होंने कहा, धनखड़ को समर्थन देने के पीछे बसपा सुप्रीमो मायावती का सियासी गणित है। जो वह विधानसभा चुनाव में हारने के बाद से मजबूत करने में जुटी हैं। इसके लिए हम प्रमुख तौर पर तीन कारण मान सकते हैं।
1. जातिगत समीकरण मजबूत करना: जगदीप धनखड़ जाट समुदाय से आते हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा समेत कई राज्यों में जाट समुदाय के वोटर्स की अच्छी खासी संख्या है। अलगे साल राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां 20 फीसदी जाट वोटर्स हैं। मायावती की पार्टी भी यहां मैदान में उतरेगी। ऐसे में वह जाट समुदाय को नाराज नहीं करना चाहती है। राजस्थान में बसपा पांच से छह विधानसभा सीट जीत लेती है। इसलिए वह धनखड़ का समर्थन करके जाट बिरादरी को यह संदेश देना चाहती हैं कि वह उनके साथ खड़ी हैं। हरियाणा में भी चुनाव होने हैं। यहां भी जाट बिरादरी काफी संख्या में है।
2. सम्मान न मिलने की नाराजगी: विपक्ष ने जब-जब बैठक की है, बहुजन समाज पार्टी को नहीं बुलाया गया है। इस एलान से मायावती अपनी नराजगी भी जाहिर कर ना चाहती हैं। इसके साथ ही मायावती उपराष्ट्रपति चुनाव में जगदीप धनखड़ को समर्थन देने का एलान करके विपक्ष को यह बताना चाहती हैं कि भले ही उनका समय खराब चल रहा है, लेकिन अभी वह कमजोर नहीं हुई हैं।
3. भाजपा को लेकर सॉफ्ट रवैया: प्रो. अजय सिंह कहते हैं कि भले ही सार्वजनिक तौर पर मायावती कहती हैं कि वह भाजपा से नहीं डरती हैं, लेकिन उनके फैसलों और बयानों से काफी कुछ खास होता है। जहां एक तरफ विपक्ष भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर लड़ाई लड़ता है, वहीं मायावती के बयान काफी सॉफ्ट नजर आते हैं। मायावती भाजपा के खिलाफ ज्यादा हमलावर नहीं दिखती हैं।
लंबे समय तक उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर यूपी में राज किया और भाजपा ने ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया। ये उसकी वजह हो सकती है। हालांकि, उनके आलोचक इसे ईडी, सीबीआई जैसी एजेंसियों का डर बताते हैं। अक्सर उन पर आरोप लगता है कि वो सरकार को नाराज नहीं करना चाहती हैं। इसलिए सत्ताधारी दल के प्रति नर्म रुख दिखाती है।