कांग्रेस और सपा के गठबंधन की बात पिछले कई महीने से अटकी थी। दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की उम्मीद न के बराबर हो गई थीं, लेकिन कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने खुद मोर्चा संभालते हुए सपा नेताओं से बातचीत की। शनिवार को प्रियंका गांधी ने सपा नेता रामगोपाल यादव से बातचीत की। इसके बाद रविवार को उनकी बात अखिलेश यादव से हुई।
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मीडिया में ये चर्चा थी कि प्रियंका गांधी के अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव के साथ अच्छे संबंधों को भी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा गया। ये भी माना गया कि कांग्रेस और सपा में गठबंधन की शुरुआत इन दोनों के बीच बातचीत से शुरू हुई थी। यूपी में कई जगहों पर पोस्टर भी दिखे, जिनमें प्रियंका गांधी और डिंपल यादव के साथ लोकल उम्मीदवार दिखे।
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- फोटो : facebook
जानकारों की मानें तो कांग्रेस की ओर से 120 सीटों की मांग रखी गई जबकि अखिलेश 99 सीट पर अड़े थे। हालांकि अब कांग्रेस आलाकमान की ओर से भेजे गए दूतों की अखिलेश के साथ हुई लंबी बातचीत का कोई ठोस नतीजा निकलता दिख रहा है।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व प्रियंका वाड्रा
- फोटो : amar ujala
अखिलेश यादव को सपा और साइकिल मिलने के बाद कांग्रेस इस कदर उत्साहित थी मानो कुछ घंटों में गठबंधन और सीटों के तालमेल की घोषणा हो जाएगी। न तो सपा की ओर से अधिकारिक तौर पर स्पष्ट हुआ कि कितनी सीट देने को तैयार है और न ही कांग्रेस के वार्ताकार स्पष्ट आंकड़ा बता पाए कि उन्हें कितनी सीट चाहिए।
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राज बब्बर व गुलाम नबी आजाद
- फोटो : amar ujala
कांग्रेस को रविवार सुबह का इंतजार था। यूपी कांग्रेस से जुड़े नेता शनिवार को सुबह से देर शाम तक खामोश रहे। देर शाम यूपी के प्रभारी और पार्टी महासचिव गुलाम नबी आजाद दस जनपथ सोनिया गांधी के आवास से बाहर निकले। कार का शीशा थोड़ा सा खोला और संक्षिप्त बातचीत में मीडिया से कहा कि गठबंधन पर सुबह तक पता चलेगा। सुबह गठबंधन हो ही गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रियंका गांधी के सहयोग से ही गठबंधन संभव हो पाया। गठबंधन के लिए सपा ने कांग्रेस को 105 सीटें दी हैं। वहीं सपा खुद 298 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अब यह स्पष्ट हो गया है कि सपा-कांग्रेस मिलकर 2017 का यूपी विधानसभा चुनाव लड़ेगी। अखिलेश यादव इस गठबंधन के मुखिया व मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे।