दिवंगत पूर्व सीएम जयललिता की मौत पर उठ रहे सवालों के बीच ब्रिटिश डॉक्टर ने कहा है कि जया के इलाज और उसके बाद हुई मौत में कोई षड्यंत्र या रहस्य नहीं है।
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अपोलो अस्पताल और सरकारी डॉक्टरों ने भी जहर के कारण जया की मौत की आशंका को खारिज किया।
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डॉक्टरों ने दावा किया कि 75 दिन के इलाज के दौरान जयललिता के पैर नहीं काटे गए थे। डॉ. बील के साथ मद्रास मेडिकल कॉलेज के पी. बालाजी और अपोलो अस्पताल के के. बाबू भी मौजूद थे। जयललिता के शरीर के अंगों का ट्रांसप्लांट या कोई सर्जरी नहीं की गई थी।
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डॉ. रिचर्ड बील ने कहा कि जया को जब घर से एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया था तब वह सचेत अवस्था में थीं। उन्हें जिस प्रक्रिया से इलाज दिया गया वह ‘बिल्कुल सरल’ थी।
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डॉ. रिचर्ड बील ने कहा कि मैंने पहले भी इस तरह के मामले देखें हैं और पहली बार है कि मुझे इलाज की प्रक्रिया को न्यायोचित ठहराना पड़ रहा है।
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दिवंगत मुख्यमंत्री का इलाज करने वाले डॉक्टरों में शामिल मद्रास मेडिकल कॉलेज के पी बालाजी ने संवाददाताओं को बताया कि उन्हें दिए गए इलाज के लिए अस्पताल का बिल पांच से साढ़े पांच करोड़ रुपए था।
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जयललिता को 'सेप्टीसीमिया के साथ अनियंत्रित मधुमेह के इलाज के लिए भर्ती किया गया था।
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दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता के शव पर लेप लगाने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने जयललिता के चेहरे पर कोई गहरा निशान नहीं देखा था।