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भारत मां के इस सपूत ने 21 साल बाद लिया था जलियांवाला बाग का बदला

Sat, 13 Apr 2019 11:59 AM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरदार उधम सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
आज जलियांवाला बाग नरसंहार की 100वीं बरसी है। देश की आजादी के इतिहास में 13 अप्रैल का दिन एक दुखद घटना के साथ याद किया जाता है। 13 अप्रैल 1919 को जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा के लिए जमा हुए हजारों भारतीयों पर अंग्रेज हुक्मरान ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। ये सभी जलियांवाला बाग में रौलट एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। 
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- फोटो : सोशल मीडिया
सरदार उधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार का 21 साल बाद बदला लिया था। इस नरसंहार का बदला लेने के लिए सरदार उधम सिंह लंदन पहुंच गए। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की एक बैठक में उधम सिंह ने माइकल ओ’ड्वायर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद उनको फांसी दी गई थी। 
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जलियांवाला बाग में गोलियां चलवाने वाला जनरल डायर (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
जलियांवाला बाग नरसंहार में मारे गए थे हजारों बेकसूर

13 अप्रैल 1919 को हजारों लोग रौलट एक्ट के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। जनरल डायर करीब 100 सिपाहियों के सीथ बाग के गेट पर पहुंचा। उसके करीब 50 सिपाहियों के पास बंदूकें थीं। वहां पहुंचकर बिना किसी चेतावनी के उसने गोलियां चलवानी शुरु कर दीं। गोलियां चलते ही सभा में भगदड़ मच गई। जलियांवाला बाग कांड के समय माइकल ओ' ड्वायर पंजाब का गर्वनर था। और लोगों पर गोली चलवाने वाला जनरल डायर था। 

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जलियांवाला बाग (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
कई इतिहासकारों का मानना है कि यह हत्याकांड ओ' ड्वायर व अन्य ब्रिटिश अधिकारियों का एक सुनियोजित षड्यंत्र था, जो पंजाब पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए पंजाबियों को डराने के उद्देश्य से किया गया था। यही नहीं, ओ' ड्वायर बाद में भी जनरल डायर के समर्थन से पीछे नहीं हटा था।
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जलियांवाला बाग का कुआं (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
गोलीबारी से घबराई बहुत सी औरतें अपने बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए बाग में स्थित एक कुएं में कूद गईं। निकलने का रास्ता बंद होने के कारण बहुत से लोग भगदड़ में कुचले गए और हजारों लोग गोलियों की चपेट में आए। गोलीबारी के बाद कुएं से 200 से ज्यादा शव बरामद हुए थे।
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सरदार उधम सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
उधम सिंह ने 21 साल बाद लिया इस नरसंहार का बदला

सरदार उधम सिंह का नाम भारत की आजादी की लड़ाई में पंजाब के क्रांतिकारी के रूप में दर्ज है। इस नरसंहार का बदला लेने के लिए वीर उधम सिंह ने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर माइकल ओ’ड्वायर को सबक सिखाने की प्रतिज्ञा ली थी। अपने मिशन को अंजाम देने के लिए उधम सिंह ने विभिन्न नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा की। 
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जलियांवाला बाग में गोलियां चलवाने वाला जनरल डायर (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
1934 में उधम सिंह लंदन पहुंचे और वहां 9, एल्डर स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर रहने लगे। वहां उन्होंने यात्रा के उद्देश्य से एक कार खरीदी और साथ में अपना मिशन पूरा करने के लिए छह गोलियों वाली एक रिवाल्वर भी खरीद ली। भारत का यह वीर क्रांतिकारी माइकल ओ’ड्वायर को ठिकाने लगाने के लिए उचित वक्त का इंतजार करने लगा।

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प्रतीकात्मक तस्वीर
13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की एक बैठक चल रही थी। जहां उधम सिंह हाथ में एक किताब लिए पहुंचे। उन्होंने उस किताब के पन्नों को काटकर उसमें एक बंदूक छिपा रखी थी। 
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ओ’ड्वायर (फाइल फोटो)
बैठक के खत्म होने पर उधम सिंह ने किताब से बंदूक निकाली और माइकल ओ’ड्वायर पर गोली चला दी। ड्वॉयर को दो गोलियां लगीं और पंजाब के इस पूर्व गवर्नर की मौके पर ही मौत हो गई। ओ’ड्वायर को गोली मारने के बाद वो वहां से भागे नहीं बल्कि वहीं खड़े रहे। ब्रिटेन में ही उन पर मुकदमा चला और 4 जून 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।

 
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