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लोकसभा में तीन तलाक बिल पर जोरदार बहस, जानिए किसने क्या कहा

Thu, 27 Dec 2018 09:44 PM IST
शशांक गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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triple talaq - फोटो : Amar Ujala

मुस्लिम समाज में एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल गई। विधेयक में सजा के प्रावधान का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया और इसे संयुक्त प्रवर समिति में भेजने की मांग की। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कि यह विधेयक किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं बल्कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लाया गया है। कांग्रेस, डीएमके और एआईएडीएमके ने वोटिंग से पहले सदन से वॉकआउट किया। चर्चा के बाद आखिरकार लोकसभा में तीन तलाक बिल को मंजूरी मिल गई। बिल के पक्ष में 245 और खिलाफ 11 वोट पड़े। इस बिल के वोटिंग से पहले कांग्रेस और AIADMK ने वॉकआउट किया। अब इसे राज्यसभा में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। इसके बाद ही यह कानून की शक्ल ले सकेगा। इस पर हुई बहस के दौरान किसने क्या क्या कहा जानिए। 

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रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री 

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रविशंकर प्रसाद - फोटो : PTI

रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इसे राजनीति के तराजू पर तौलने की बजाय इंसाफ के तराजू पर तौलते की जरूरत है। उनकी सरकार के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण वोट बैंक का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि हम मानते हैं कि महिलाओं का सम्मान होना चाहिए। प्रसाद ने विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति को भेजने की विपक्ष मांग को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इसे प्रवर समिति को भेजे जाने की मांग के पीछे एक ही कारण है कि इसे आपराधिक क्यों बनाया गया। उन्होंने कहा कि संसद ने 12 वर्ष से कम उम्र की बालिका से बलात्कार के मामले में फांसी की सजा संबंधी कानून बनाया। क्या किसी ने पूछा कि उसके परिवार को कौन देखेगा। दहेज प्रथा के खिलाफ कानून में पति, सास आदि को गिरफ्तार करने का प्रावधान है। जो दहेज ले रहे हैं, उन्हें पांच साल की सजा और जो इसे प्रात्साहित करते हैं, उनके लिये भी सजा है । इतने कानून बने, इन पर तो सवाल नहीं उठाया गया ।
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असदुद्दीन ओवैसी

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लोकसभा में तीन तलाक बिल पर बहस के दौरान असदुद्दीन ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी, एआईएमआईएम प्रमुख  

सरकार ने इस बिल पर किसी भी पक्ष से बात नहीं की है। जो लोग विरोध कर रहे हैं उनकी तो छोड़िए, जिनके लिए बिल लाया जा रहा है उनसे तक बात नहीं की गई है। आपने (सरकार) समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और तीन तलाक को आपराधिक करार दे दिया है। क्योंकि यह हमारे खिलाफ इस्तेमाल होगा। लैंगिक अल्पसंख्यकों को धारा 377 में अपनी पसंद की छूट दी गई, तब धार्मिक अल्पसंख्यकों को क्यों नहीं? 

सुष्मिता देव, सांसद, कांग्रेस 

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सुष्मिता देव - फोटो : Social Media

सुष्मिता देव, सांसद, कांग्रेस

हमारी पार्टी इस विधेयक के खिलाफ नहीं है, लेकिन सरकार के ‘मुंह में राम बगल में छुरी’ वाले रुख के विरोध में है क्योंकि सरकार की मंशा मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने और उनका सशक्तीकरण की नहीं, बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दंडित करने की है। उन्होंने तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में शामिल किए जाने का विरोध करते हुए कहा कि कांग्रेस ने 2017 के विधेयक को लेकर जो चिंताएं जताई थी उसका ध्यान नहीं रखा गया। सुष्मिता देव ने कहा कि एक वकील होने के बावजूद कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने तीन तलाक पर कानून बनाने को लेकर उच्चतम न्यायालय अल्पमत के फैसले का उल्लेख किया। उच्चतम न्यायालय के फैसले में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि तीन तलाक को अपराध की श्रेणी में रखा जाए। 1986 में राजीव गांधी के समय शाह बानो प्रकरण के बाद बनाया गया कानून मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण का सबसे महत्वपूर्ण कानून था जिसका उल्लेख उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में बार-बार किया। 
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मल्लिकार्जुन खड़गे

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मल्लिकार्जुन खड़गे - फोटो : PTI

मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद, कांग्रेस

यह कानून विधेयक समाज को बांटनेवाला है और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ है। उन्होंने अपने बयान मे आगे कहा कि इस विधेयक को संयुक्त प्रवर समिति के पास भेजे जाने की मांग को सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए हम वाकआउट कर रहे हैं।  
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स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री 

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स्मृति ईरानी - फोटो : Social Media

स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री

अगर सती प्रथा के खिलाफ कानून बनाया जा सकता है, बाल विवाह और दहेज उत्पीड़न के खिलाफ कानून बनाया जा सकता है तो तीन तलाक के खिलाफ कानून क्यों नहीं बन सकता। इस विधेयक का विरोध करने वालों के संबंध में स्मृति ने कहा कि जिन लोगों ने कारवां लूटा, आज वे ही लोग इंसाफ की दुहाई दे रहे हैं। यहां 1986 के कानून (शाहबानो प्रकरण पर उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद आया कानून) की दुहाई दी गई। यहां शब्दों के पीछे इंसाफ को छिपाने का प्रयास किया गया। 

जब महिलाएं प्रताड़ित की जा रही थी और इनके पास मौका था तो वे उनके पक्ष में क्यों खड़े नहीं हुए। 1986 के कानून में इतनी ताकत होती तो सायरा बानो को उच्चतम न्यायालय पर दस्तक नहीं देना होता। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अब तक तीन तलाक के 477 मामले आए हैं। । 477 तो बड़ी संख्या है। अगर एक भी महिलाएं प्रभावित होती, तो भी उसे न्याय दिलवाया जाना चाहिए ।
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मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पंसख्यक कार्य मंत्री

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मुख्तार अब्बास नकवी - फोटो : PTI

मुख्तार अब्बास नकवी, केंद्रीय अल्पंसख्यक कार्य मंत्री

तीन तलाक संबंधी विधेयक मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए है, किसी को निशाना बनाने के लिए नहीं। सती प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को खत्म करने के लिए संसद ने जिस प्रकार का कदम उठाया था, उसी प्रकार से मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुरीति से न्याय दिलाने के लिए इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित किया जाना चाहिए। तीन तलाक विधेयक पर लोकसभा में चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए नकवी ने कहा कि करीब तीन दशक पहले मुस्लिम महिलाओं को इंसाफ दिलाने के मुद्दे पर संसद में गंभीरता से चर्चा हुई थी, लेकिन कुछ कठमुल्लाओं के दबाव में उस समय की कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावित करने के लिए कानून बनाया था।

मीनाक्षी लेखी, सांसद, भाजपा 

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मीनाक्षी लेखी - फोटो : @loksabhatv

मीनाक्षी लेखी, सांसद, भाजपा

विधेयक  नरेंद्र मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम। तीन तलाक को उच्चतम न्यायालय ने असंवैधानिक बताया और इस प्रथा का कुरान में कहीं उल्लेख नहीं है। कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति के कारण यह प्रथा अब तक चलती आई है जिसका खामियाजा मुस्लिम महिलाओं को भुगतना पड़ा है। कई इस्लामी देशों में तीन तलाक में खत्म किया जा चुका है, लेकिन भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में चल रहा है। अगर कांग्रेस ने 30 साल पहले कदम उठाती तो उसी वक्त इतिहास बदल जाता। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में महिलाओं के लिए कई कदम उठाए हैं और यह भी मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए उठाया गया है।

मोहम्मद सलीम, सांसद, माकपा 

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मोहम्मद सलीम - फोटो : PTI

मोहम्मद सलीम, सांसद, माकपा 

यह लैंगिक समानता का विषय है। हम समझते हैं कि आज सबसे बड़ी समस्या मुसलमानों के सुरक्षा का है। इसे आपराधिक मामला बनाया जाना ठीक नहीं है।
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बदरुद्दीन अजमल, सांसद, एआईडीयूएफ

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बकरुदीन अजमल - फोटो : PTI

बदरुद्दीन अजमल, सांसद, एआईडीयूएफ

तीन तलाक उतना बड़ा मुद्दा नहीं जितना इसे बनाया जा रहा है। हमारी महिलाओं के हजारों मसले हैं। सरकार उन्हें भी सुलझाए। हम जेल की सजा का विरोध करते हैं।
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