प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल असम स्थित देश के सबसे बड़े पुल का उद्घाटन करेंगे। ये पुल ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर स्थित धोला को उत्तरी तट पर स्थित सादिया से जोड़ेगा। 9.15 किलोमीटर लंबा ये पुल मुंबई स्थित प्रसिद्ध बांद्रा-वर्ली सी लिंक (5.6 किलोमीटर) से भी करीब दो-तिहाई लंबा है।
क्या आप जानते हैं देश में पहले भी कई ऐसे पुल बन चुके हैं जिनकी लंबाई ने कई किलोमीटर की दूरी को कम किया। इन पुल को देखने टूरिस्ट भी आते हैं। आइए जानते हैं भारत के टॉप 5 पुल के बारे में-
विज्ञापन
ये हैं नदी के ऊपर बने भारत के पांच सबसे लंबे पुल, जानिए खासियतें
2 of 6
महात्मा गांधी सेतु
यह पटना से हाजीपुर को जोड़ने को लिए गंगा नदी पर उत्तर-दक्षिण की दिशा में बना है। यह भारत का नदी पर बना सबसे लंबा पुल है। इसकी लंबाई 5.6 किलोमीटर है। राज्य के प्रमुख पर्यटक आकर्षण में से एक है।
ये भी पढ़ें- चीन को चुनौती है देश का सबसे बड़ा पुल, नॉर्थ ईस्ट को होंगे बड़े फायदे
विज्ञापन
ये हैं नदी के ऊपर बने भारत के पांच सबसे लंबे पुल, जानिए खासियतें
3 of 6
बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु
बांद्रा-वर्ली समुद्रसेतु या आधिकारिक तौर पर राजीव गांधी सागर सेतु के नाम से जाना जाता है। यह भारत में मौजूद नदी के ऊपर बना पुल है। यह बांद्रा को बोर्ली से जोड़ती है। इसकी लंबाई 5.5 किलो मीटर है। रोजाना करीब 45000 वाहन इस पर चलते हैं।
ये हैं नदी के ऊपर बने भारत के पांच सबसे लंबे पुल, जानिए खासियतें
4 of 6
विक्रमशिला सेतु
विक्रमशिला सेतु, गंगा पर निर्मित एक पुल है जिसका नाम विक्रमशिला यूनीवर्सिटी के नाम पर रखा गया था। इसकी लंबाई 4.7 किलोमीटर है। विक्रमशिला सेतु, भारत का तीसरा सबसे बड़ा पुल है और यह राष्ट्रीय राजमार्ग 80 और 31 के समानांतर और गंगा के विपरीत दिशा में बनाया गया है।
विज्ञापन
ये हैं नदी के ऊपर बने भारत के पांच सबसे लंबे पुल, जानिए खासियतें
5 of 6
वेम्बानाड पुल
केरल में स्थित इस पुल की लंबाई 4.62 किलोमीटर है। यह केवल माल गाड़ियों और यातायात के लिए प्रयोग किया जाता है। यह 3 छोटे द्वीपों से होकर गुजरता है। यह झील के ऊपर बना हुआ है।
इस पुल का निर्माण हाल ही में किया गया है। बिहार में स्थित यह पुल दीगाह घाट और पहलेजा घाट को जोड़ता है। इसकी लंबाई 4.5 किमी है। लंबी सड़क और रेलवे लिंक पुल दूसरा रेलवे पुल है, जिसका उद्घाटन 3 फरवरी 2016 को हुआ।
ये भी पढ़ें- 'महासेतु' से असम-अरुणाचल की दूरी हुई 4 घंटे कम, दुश्मन पर नजर रखना हुआ आसान