प्रधानमंत्री मोदी के तीन साल पुरे हो चुके है। कुछ नेता उन्हें भारत के अदभूत प्रधानमंत्री को तौर पर पेश करते हैं। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ उनकी तुलना करते है। इसलिए जानने ऐसे 10 बातें जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंदिरा गांधी में एक समान है।
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1. दोनों में राष्ट्रवाद
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी की बात करें तो इन दोनों नेताओं की सोच भारतीय राष्ट्रवाद के लेकर एक जैसी रही है। ये दोनों ही नेता अपने मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे हैं।
बात करें इंदिरा के समय की तो उनके समय इंदिरा गांधी की इमेज 'इंडिया इज इंदिरा, इंदिरा इज इंडिया, जब तक सूरज चाँद रहेगा इंदिरा तेरा नाम रहेगा, इंदिरा लाओ, देश बचाओं देश की जनता के बीच यही नारा था। वहीं इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात करे तो 'मैं नया भारत हूँ, एक भारत-श्रेष्ठ भारत, हर-हर मोदी घर-घर मोदी जैसे नारों के साथ मोदी की भी लोकप्रियता नजर आती हैं।
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2. अपनी पार्टी में दोनों नेताओं की पकड़
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1970 के दशक में कांग्रेस पार्टी का मतलब इंदिरा गांधी थी। वैसा ही कुछ इस समय बीजेपी में देखा जाता है। इस समय जिस भी राज्य में बीजेपी पार्टी जीत हासिल करती है। वहां के सभी नेता जीत का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को ही देते है। इससे पार्टी में मोदी के वर्चस्व का पता चलता है। इंदिरा गांधी के समय भी कांग्रेस पार्टी इंदिरा को ही पार्टी में सबसे ऊपर रखती थी।
3. यूथ आइकन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की युवाओं के बीच की लोकप्रियता के बात करें तो तमाम सोशल मीडिया प्लेफॉर्म पर आज के युवा प्रधानमंत्री को फोलो करते हैं। वहीं इंदिरा गांधी के समय भी ऐसा ही कुछ आलाम था। उनके समय पर सोशल मीडिया जैसी कोई जगह तो नहीं थी, लेकिन नये युवाओं के बीच इंदिरा एक सशक्त प्रधानमंत्री के रूप में लोकप्रिय थीं।
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4. राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ बेहतर संबंध
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1970 के दशक में भारत आर्थिक रूप से कमजोर देश था। जिसके कारण हर राज्य की माला हालत थी। मगर इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति को हर राज्य में लागू किया और सभी राज्यों में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अच्छे संबंध के चलते इस क्रांति को अपनाया।
वहीं वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी ऐसे की व्यक्तित्व रहा है। मुख्यमंत्रियों के साथ मोदी के संबंध का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। गैर भाजपा राज्यों में भी उनकी बातों का सम्मान किया जाता है।
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5. विदेश में लोकप्रियता और सशक्त इमेज
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश में लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं। पड़ोसी देश चीन से लेकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक पीएम मोदी ने अपनी छाप छोड़ी है। विदेश में रह रहे सभी भारतीयों ने प्रधानमंत्री मोदी का बेहद उत्साह के साथ सम्मान किया है। साथ ही विदेश के प्रधानमंत्रियों ने भी मोदी के मजबूत नेतृत्व का लोहा माना है। वहीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बात करें तो 1971 के युद्ध के बाद महाशक्ति देश अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने इंदिरा को मजबूत महिला प्रधानमंत्री माना।
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6. आम जनता के बीच लोकप्रियता
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दोनों प्रधानमंत्री आम जनता के बीच बहुत लोकप्रिय रहे हैं। सत्तर के दशक इंदिरा गांधी जितनी लोकप्रिय प्रधानमंत्री थीं। लोगों के बीच उतने की लोकप्रिया प्रधानमंत्री मोदी हैं। यह लोकप्रियता इनकी रैलियों में देखी जा सकती है।
7. अपनी-अपनी पार्टी को दी नई दिशा
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अगर पार्टी के तौर पर बात करें तो ये दोनों ही नेता अपनी पार्टी के लिए मजबूत साबित रहे हैं। साथ ही दोनों ने अपनी पार्टी के नई दिशा भी दी है। अगर 1970 के समय कांग्रेस पार्टी में इंदिरा गांधी की बाद करें तो उस समय कांग्रेस मतलब इंदिरा गांधी हुआ करता है। ऐसा ही कि कुछ बीजेपी में देखा जा सकता है। पार्टी के अंदर सभी बड़े फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुमति के बिना नहीं लिए जाते है।
8. जनता के इरादों को जनाने में माहिर
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ये दोनों प्रधानमंत्री देश की जनता के इरादों को जनाने में भी माहिर रहे हैं। इंदिरा गांधी ने अपने काल देश की गरीबी को जानते हुए और गरीबी को हटाने के लिए 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया। वहीं वर्तमान समय में देश में भ्रष्टाचार को कम करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी जैसा लिया। जिसका लोगों ने जमकर समर्थन किया।
9. राष्ट्र-विरोधी छवि
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ये दोनों प्रधानमंत्री अपनी कार्यशैली को लेकर भले ही सबसे बेहतर रहे हों, लेकिन राष्ट्रविरोधी छवि को लकेर भी इन्हे एक जैसा कहा जा सकता है। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में राष्ट्रविरोध कार्यवाई की बात करें तो सन 1973-74 में बिहार और गुजरात का छात्र आंदोलन इंदिरा सरकार के खिलाफ था तो यही हाल मोदी काल में भी देखने को मिला। मोदी का समय जेएनयू और दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्रों का प्रदर्शन रहा ।
इंदिरा गांधी ने अपनी समय में बहुत ही कड़े और मजबूत फैसले लिए थे। उनका अंजाम भले ही कुछ भी रहा हो लेकिन इंदिरा गांधी हमेश अपने फैसलों को लेकर संदेह में रही हैं। चाहे फिर आपातकाल का समय रहा है या फिर ऑपरेशन ब्लू स्टार। इंदिरा के इरादे और फैसले हमेशा साफ रहे है। ऐसे ही प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी कहा जा सकता है। सर्जिकल स्ट्राइक का फैसला हो या फिर नोटबंदी का फैसला। मोदी ने भी अपने फैसलों को कभी भी संदेह नहीं रखा है।