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Mohan Bhagwat: 'हिंदू परिवार में हों तीन बच्चे, कम होने पर लुप्त हो जाता है समाज', संघ प्रमुख भागवत का बयान

Fri, 29 Aug 2025 08:02 AM IST
अभिषेक दीक्षित अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

संघ प्रमुख ने कहा कि हमारे सभी सरकारों से संबंध ठीक हैं। हम सभी में परिवर्तन की संभावना देखते हैं। अच्छे कार्य के लिए किसी का भी समर्थन करने के लिए तैयार हैं।
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Mohan Bhagwat - फोटो : Amar Ujala
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने एक दंपती के तीन बच्चे की वकालत करते हुए कहा कि जिस समाज में परिवारों के तीन से कम संतानें हों, उनका अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। उन्होंने आबादी नियंत्रण के साथ पर्याप्त जनसंख्या को भी देश के लिए जरूरी बताया।
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Mohan Bhagwat - फोटो : Amar Ujala
विज्ञान भवन में आयोजित आरएसएस के शताब्दी वर्ष में आयोजित तीन दिवसीय संवाद के अंतिम दिन सवाल-जवाब सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा, जनसंख्या देश के लिए बोझ और अवसर दोनों है। जनसंख्या नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें आबादी की जरूरत को पूरा करने के साथ इसे नियंत्रित भी किया जा सके और संपूर्ण आबादी का ठीक से पालन-पोषण हो सके। इस नीति से देश की जरूरत और आबादी के बीच बेहतर संतुलन कायम होना चाहिए। 
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Mohan Bhagwat - फोटो : Amar Ujala
संघ प्रमुख ने कहा, शास्त्र के साथ विज्ञान भी यह कहता है कि जन्मदर उचित होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित वर्ग या समाज विलुप्त हो जाता है। इसी नीति के तहत सभी देश एक दंपती के कम से कम तीन बच्चों के सिद्धांत या नीति पर आगे बढ़ रहे हैं।

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Mohan Bhagwat - फोटो : Amar Ujala
उन्होंने कहा, नई परिस्थितियों में देश के हर वर्ग, समुदाय, धर्म की जन्मदर घटी है, लेकिन सबसे तेज गिरावट हिंदुओं की जन्मदर में आई है। उन्होंने कहा कि आबादी अधिक बढ़ने पर इसे नियंत्रित करने के लिए प्रकृति भी अपना काम करती है।
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Mohan Bhagwat - फोटो : Amar Ujala
तीन बच्चों वाला परिवार अधिक स्वस्थ... वैज्ञानिक भी करते हैं समर्थन
संघ प्रमुख ने कहा, देश की जनसंख्या नीति के मुताबिक एक दंपती के पास 2.1 बच्चे चाहिए। गणित में 2.1 का मतलब दो होता है। मगर सामाजिक जीवन में 2.1 का अर्थ कम से कम तीन बच्चों का है। रिसर्च बताते हैं कि तीन बच्चों वाले परिवार में मां-बाप और संतान अधिक स्वस्थ रहते हैं। स्वास्थ्य अध्ययन के मुताबिक इसके कारण परिवार में अहम की लड़ाई कम होती है। बच्चे ईगो मैनेजमेंट सीख जाते हैं।
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