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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: देखिए सरदार पटेल की प्रतिमा के अनावरण की एक-एक तस्वीर 

Wed, 31 Oct 2018 07:33 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
देश के पहले गृहमंत्री और सरदार के नाम से मश्हूर वल्लभ भाई पटेल के सम्मान में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का अनावरण हो गया है। दो भारतीय कंपनियों ने मिलकर 45 महीने में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को तैयार किया है। 
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
विश्व के इस सबसे ऊंची (182 मीटर) प्रतिमा को दो देशी कंपनियों ने बनाया है। इस प्रतिमा को बनाने के लिए करीब 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से अधिकांश पैसा गुजरात सरकार ने दिया है। हालांकि केंद्र सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए मदद दी थी।
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
गुजरात सरकार ने इसके लिए एक ट्रस्ट का गठन भी किया था। सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट के जिम्मे ही पूरी निर्माण प्रक्रिया थी। देश की दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी लार्सन एंड टुर्बो (एलएंडटी) और सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड के 250 इंजीनियर और 3400 मजदूरों ने मिलकर 3 साल 9 महीने में इस प्रतिमा को तैयार किया। 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
182 मीटर (597 फुट) ऊंची 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा हो गई है। इसके बाद चीन का स्प्रिंग बुद्ध मंदिर (153 मीटर) दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। जापान की उशिकु दायबुत्सु (120 मीटर) और अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (93 मीटर) का नंबर है।  
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
इस प्रतिमा के निर्माण में करीब 24 हजार टन लोहा (स्टील) का इस्तेमाल किया गया है। 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' को बनाने में 5,700 मीट्रिक टन यानी करीब 57 लाख किलोग्राम स्ट्रक्चरल स्टील का इस्तेमाल हुआ। साथ ही 18,500 मीट्रिक टन छड़ का इस्तेमाल किया गया है। 18 हजार 500 टन स्टील नींव में और 6,500 टन स्टील मूर्ति के ढांचे में लगी।
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
1,850 टन कांसा बाहरी हिस्से में लगा है। 1 लाख 80 हजार टन सीमेंट कंक्रीट का इस्तेमाल निर्माण में किया गया, जबकि 2 करोड़ 25 लाख किलोग्राम सीमेंट का इस्तेमाल किया गया।
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं को झेल सकती है। इस स्टैच्यू के बेस में भी इंजीनियरिंग का कमाल देखने को मिला है। स्टैच्यू के बेस में चप्पल पहने पांव दिखाएं गए हैं। दोनों पैरों के बीच करीब 6.4 मीटर का गैप है। यह स्टैच्यू 6.5 रिक्टर के भूकंप को भी आसानी से झेल सकता है। 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
यह स्टैच्यू नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। साधू हिल पर बनाए गए इस स्टैच्यू तक पहुंचने के लिए सड़क से एक पुल तैयार किया गया है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा के लिए दोनों तरफ दो लिफ्ट भी लगाई गई हैं, जो कि ऊपर से करीब 7 किलोमीटर दूर तक नजारा दिखाएंगी।
 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि आज पूरा देश सरदार पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है। नर्मदा के तट पर आज हम सभी खुश हैं। देशभर में कई लोग 'एकता के लिए दौड़' (रन फॉर यूनिटी) में भाग ले रहे हैं। आज का यह दिन भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। भारत के सम्मान के लिए समर्पित एक विराट व्यक्तित्व का उचित स्थान देने का और अपने इतिहास को उजागर करने का काम भारत के वर्तमान ने किया है। 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि आज के दिन को भारत के इतिहास में याद किया जाएगा। इस दिन को कोई भी भारतीय कभी नहीं भूल पाएगा। आज जब धरती से लेकर आसमान तक सरदार साहब का अभिषेक हो रहा है, तब भारत ने न सिर्फ अपने लिए एक नया इतिहास रचा है, बल्कि भविष्य के लिए प्रेरणा का गगनचुंबी आधार भी रखा है। 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे सरदार साहब की इस विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का लोकार्पण करने का मौका मिला है। गुजरात के लोगों ने मुझे जो अभिनंदन पात्र दिया है, उसके लिए मैं गुजरात के लोगों का बहुत-बहुत आभारी हूं। आज मैं आपके यह सम्मान पत्र में आशीर्वाद की अनुभूति कर रहा हूं। 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
पीएम ने कहा, 'दुनिया की ये सबसे उंची प्रतिमा पूरी दुनिया और हमारी भावी पीढ़ियों को सरदार साहब के साहस, सामर्थ्य और संकल्प की याद दिलाती रहेगी। सरदार पटेल के योगदान के कारण ही आज भारत एकजुट है। सरदार साहब का सामर्थ्य तब भारत के काम आया था, जब मां भारती साढ़े पांच सौ से ज्यादा रियासतों में बंटी थी। दुनिया में भारत के भविष्य के प्रति घोर निराशा थी। निराशावादियों को लगता था कि भारत अपनी विविधताओं की वजह से ही बिखर जाएगा।' 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
उन्होंने कहा, 'सरदार पटेल ने तब 5 जुलाई, 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए कहा था कि विदेशी आक्रांताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी, वैर का भाव, हमारी हार की बड़ी वजह थी। अब हमें इस गलती को नहीं दोहराना है और न ही दोबारा किसी का गुलाम होना है। सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों रजवाड़ों ने त्याग की मिसाल कायम की थी। हमें इस त्याग को भी कभी नहीं भूलना चाहिए।' 

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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
मोदी ने कहा, 'ये प्रतिमा, सरदार पटेल के उसी प्रण, प्रतिभा, पुरुषार्थ और परमार्थ की भावना का प्रकटीकरण है। ये प्रतिमा भारत के अस्तित्व पर सवाल उठाने वालों को ये याद दिलाने के लिए है कि ये राष्ट्र शाश्वत था, शाश्वत है और शाश्वत रहेगा। 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' हमारे इंजीनियरिंग और तकनीकी सामर्थ्य का भी प्रतीक है। बीते करीब साढ़े तीन वर्षों में हर रोज कामगारों ने, शिल्पकारों ने मिशन मोड पर काम किया है।
 
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Sardar Vallabh Bhai Patel - फोटो : PTI
प्रधानमंत्री ने कहा, 'राम सुतार जी की अगुवाई में देश के अद्भुत शिल्पकारों की टीम ने कला के इस गौरवशाली स्मारक को पूरा किया है। दुनिया की यह सबसे ऊंची प्रतिमा पूरी दुनिया को सरदार साहब के साहस, सामर्थ्य और संकल्प की याद दिलाती रहेगी। सरदार साहब ने मां भारती को खंड-खंड टुकड़ों में करने की साजिश को नाकाम कर दिया था ऐसे लौहपुरुष को मैं शत शत नमन करता हूं।'
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