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अवैध कब्जा हटाने पहुंची पुलिस पर फायरिंग-बमबारी, SP और SHO समेत 24 की मौत

Fri, 03 Jun 2016 02:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा

सार

  • एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की मौत
  • दो सौ से ज्यादा कब्जाधारियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार
  • एक जनवरी, 2014 से जवाहर बाग में किया हुआ था कब्जा
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मथुरा हिंसा - फोटो : amar ujala bureau
जवाहरबाग से बृहस्पतिवार को अवैध कब्जाधारियों को हटाने पहुंची पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग और बमबारी में एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष यादव की मौत हो गई। यूपी के डीजीपी जाविद अहमद ने बताया कि कुल 24 लोगों की मौत हुई है। इनमें आठ शव रात करीब डेढ़ बजे चलाए गए सर्च आपरेशन के दौरान मिले हैं। इन शवों में तीन महिलाओं के शव भी हैं, जिनकी जलने से मौत हुई है।
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करीब 300 एकड़ में फैले जवाहरबाग के भीतर कई और शव पड़े होने की आशंका है, सर्च अभियान रात दो बजे तक जारी था, कुछ और शव बरामद सकते हैं। करीब 20 पुलिसकर्मी गोलीबारी और पथराव में घायल हुए हैं तो 30 कब्जाधारियों के भी घायल होने की सूचना है। इनमें तीन की हालत गंभीर है। सत्याग्रह के नाम पर जवाहर बाग पर यह लोग ढाई साल से कब्जा जमाए हुए थे। पुलिस ने दो सौ से ज्यादा कब्जाधारियों को गिरफ्तार भी किया है।
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वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मारे गए एसओ संतोष कुमार के आश्रितों को 20 लाख रुपये देने की घोषणा की है। देर रात तक बाग में कई जगह आग लगी हुई थी। मार्च, 2014 से जवाहर बाग पर इन अवैध कब्जाधारियों ने कब्जा जमा रखा था। इन्हें हटाने के प्रयास तभी से हो रहे हैं लेकिन लगातार बढ़ रही भीड़ के आगे सारे प्रयास विफल रहे।

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इन लोगों ने कई दफा पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हमला भी बोला। बृहस्पतिवार शाम पुलिस ने जवाहर बाग को खाली कराने के लिए आपरेशन शुरू किया। इस दौरान कब्जाधारियों की भीड़ में शामिल युवकों ने पेड़ों पर चढ़कर पुलिस पर बम फेंकने शुरू कर दिए और गोलियां चलाईं। एक गोली थानाध्यक्ष फरह संतोष कुमार के सीने में लगी। संतोष पर बम भी फेंके गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, सिर में गोली लगने से एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की भी अस्पताल में मौत हो गई।
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इन लोगों ने कई दफा पुलिस और प्रशासनिक अफसरों पर हमला भी बोला। बृहस्पतिवार शाम पुलिस ने जवाहर बाग को खाली कराने के लिए आपरेशन शुरू किया। इस दौरान कब्जाधारियों की भीड़ में शामिल युवकों ने पेड़ों पर चढ़कर पुलिस पर बम फेंकने शुरू कर दिए और गोलियां चलाईं। एक गोली थानाध्यक्ष फरह संतोष कुमार के सीने में लगी। संतोष पर बम भी फेंके गए। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, सिर में गोली लगने से एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी की भी अस्पताल में मौत हो गई।
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mathura firing - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
क्या है जवाहर बाग प्रकरण: एक जनवरी, 2014 को खुद को सत्याग्रही बताने वाले लोगों ने मथुरा स्थित जवाहर बाग में डेरा डाला था। करीब एक हजार लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचे थे। वे मध्य प्रदेश के सागर से दिल्ली जंतर-मंतर पर पहुंचने के लिए चले थे।
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उन्होंने आम, आंवला, बेर सहित अनेक बाग उजाड़ दिए। ठेकेदार के साथ मारपीट की। प्रशासनिक अफसरों ने इस समस्या को सुलझाने कोशिश की तो उन पर हमला कर दिया। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह से अपनी जान बचाई थी। ऐसे कई मामलों में 12 से अधिक रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। अब इनकी संख्या तीन हजार के करीब बताई जाती है।
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mathura firing - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, मथुरा
कौन है रामवृक्ष यादव: कब्जाधारियों का नेतृत्व रामवृक्ष यादव नाम का व्यक्ति कर रहा है। यह उनके साथ ही मध्यप्रदेश के सागर से दिल्ली के लिए चला था। इसके बारे ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। हां, जब भी प्रशासन से इनका टकराव हुआ, रामवृक्ष यादव की ओर से ही बयान जारी किए गए। अभी कुछ दिन पहले जवाहर बाग के लोगों के चंगुल से बचकर आए दो व्यक्तियों ने रामवृक्ष यादव पर खुद को बंधक बनाने का आरोप लगाया था।
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