ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा
- फोटो : Amar Ujala
जागरूकता ही बचाव है -
साइबर अपराधों को लेकर भारत में जागरुकता का अभाव है। महिलाएं अक्सर साइबर अपराध को लेकर चुप रह जाती हैं या फिर कदम नहीं उठा पाती हैं। सितंबर 2015 में यूनाइटेड स्टेट्स ब्रॉडबैंड कमीशन की एक रिपोर्ट "कॉम्बेटिंग ऑनलाइन वायलैंस अगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स: ए वर्ल्डवाइड वेकअप कॉल" के मुताबिक 'इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली करीब एक तिहाई महिलाएं किसी-न-किसी रूप में साइबर अपराध का शिकार होती हैं।'
- संयुक्त राष्ट्र संघ की सितंबर 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक,
- भारत में केवल 35 फीसदी महिलाओं ने अपने खिलाफ हुए साइबर क्राइम की शिकायत की।
- साइबर अपराध से पीड़ित करीब 46.7 फीसदी महिलाओं ने कोई भी शिकायत नहीं की।
- 18.3 फीसदी महिलाओं को इस बात का पता ही नहीं था कि वे साइबर अपराध का शिकार हो रही हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने महिलाओं के मानवाधिकार पर खतरे को लेकर जांच की...जिसके तहत 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं से साइबर एब्यूज पर ऑनलाइन सर्वे किया गया।
सर्वे के मुताबिक हर पांच में से एक महिला सोशल मीडिया पर एब्यूज से प्रभावित है. इसमें 18-24 उम्र वर्ग की महिलाएं ज्यादा एब्यूज का शिकार हुईं...वहीं इसी उम्र वर्ग में से 37% महिलाओं ने कहा कि वो ऑनलाइन एब्यूज और उत्पीड़न का शिकार हैं. सर्वे से ये भी बात पुष्ट हुई कि साइबर एब्यूज करने वालों में पीड़ित महिला के जानने वालों की संख्या 27% है।
'ऑनलाइन गेम, क्विज और अन्य मनोरंजन ऐप मजेदार होते हैं, लेकिन वे अक्सर आपके पेज से जानकारी लेते हैं और इसे आपकी जानकारी के बिना पोस्ट करते हैं। सुनिश्चित करें कि आप किसी भी ऐप, गेम या सेवा के दिशा-निर्देशों को जानते हैं और इसे आपकी जानकारी तक अनफिल्टर एक्सेस की अनुमति नहीं देते हैं'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट
एमनेस्टी इंटरनेशनल के सर्वे के अनुसार
- 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं का एक सर्वे कराया जिसका विषय साइबर एब्यूज था।
- 18-24 साल की उम्र की महिलाएं सबसे ज्यादा एब्यूज की शिकार हुईं।
- 37% महिलाएं ऑनलाइन एब्यूज और हैरेसमेंट का शिकार हुईं।
- साइबर एब्यूज करने वालों में परिचित लोगों की संख्या करीब 27% है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने महिलाओं के मानवाधिकार पर खतरे को लेकर जांच की...जिसके तहत 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं से साइबर एब्यूज पर ऑनलाइन सर्वे किया गया।
सर्वे के मुताबिक हर पांच में से एक महिला सोशल मीडिया पर एब्यूज से प्रभावित है. इसमें 18-24 उम्र वर्ग की महिलाएं ज्यादा एब्यूज का शिकार हुईं...वहीं इसी उम्र वर्ग में से 37% महिलाओं ने कहा कि वो ऑनलाइन एब्यूज और उत्पीड़न का शिकार हैं. सर्वे से ये भी बात पुष्ट हुई कि साइबर एब्यूज करने वालों में पीड़ित महिला के जानने वालों की संख्या 27% है।
'एक आपराधिक मामलों की वकील होने के नाते ... मैं यौन शोषण, हमले में शामिल लोगों से मिलती रहती हूं और उन्होंने कबूल किया है कि उन्होंने इस अपराध को अंजाम देने से ठीक पहले इंटरनेट पर उपलब्ध कामुक वीडियो देखे और मुझे यह जानकर धक्का लगा कि कोई उम्र नहीं , कोई भी संबंध अछूता नहीं है इस तरह के अपराध में, बहन के साथ यौन संबंध, माँ के साथ सेक्स,महिला बच्चे के साथ, पुरुष बच्चे के साथ ... सब कुछ वहाँ उपलब्ध है ... मुझे समझ में नहीं आता .... क्या कोई बाधा नहीं है कोई सुरक्षा उपाय?'
सुनीति सचान त्रिपाठी, वकील, लखनऊ हाई कोर्ट
'ऑनलाइन गेम, क्विज और अन्य मनोरंजन ऐप मजेदार होते हैं, लेकिन वे अक्सर आपके पेज से जानकारी लेते हैं और इसे आपकी जानकारी के बिना पोस्ट करते हैं। सुनिश्चित करें कि आप किसी भी ऐप, गेम या सेवा के दिशा-निर्देशों को जानते हैं और इसे आपकी जानकारी तक अनफिल्टर एक्सेस की अनुमति नहीं देते हैं'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट