राजकुमारी थापा ने कहा कि भानु जयंती जैसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने इस आयोजन को राज्य स्तर से राष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे नेपाली भाषा और साहित्य को व्यापक पहचान मिली है।
सिक्किम के सोरेंग जिले में आयोजित 212वें राष्ट्रीय भानु जयंती समारोह के चौथे दिन भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश प्रमुखता से उभरा। 'भाषा, साहित्य विकास एवं जातीय सद्भाव' विषय पर आयोजित इस समारोह में सिक्किम विधानसभा की उपाध्यक्ष राजकुमारी थापा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और युवाओं से अपनी मातृभाषा तथा सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नेपाली भाषा को भारतीय संविधान की मान्यता प्राप्त है और यह केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि देश की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने युवाओं से भाषा और साहित्य के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
इस समारोह के दौरान आयोजित अंतर-विश्वविद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता का उल्लेख करते हुए विधानसभा उपाध्यक्ष ने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तार्किक सोच, समय प्रबंधन और प्रभावी अभिव्यक्ति की क्षमता विकसित करती हैं। उन्होंने छात्रों से सफल पेशेवर बनने के साथ-साथ जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने का भी आह्वान किया।
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राष्ट्रीय भानु जयंती समारोह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
फाइनल में दो विश्वविद्यालय पहुंचे
राष्ट्रीय भानु जयंती समारोह के तहत आयोजित अंतर-विश्वविद्यालय वाद-विवाद प्रतियोगिता के सेमीफाइनल मुकाबलों में कंचनजंघा राज्य विश्वविद्यालय, सिक्किम और सिक्किम विश्वविद्यालय ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर 13 जुलाई को होने वाले फाइनल में प्रवेश किया। पहले सेमीफाइनल में कंचनजंघा राज्य विश्वविद्यालय ने खरसांग कॉलेज को हराया, जबकि दूसरे मुकाबले में सिक्किम विश्वविद्यालय ने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय को पराजित किया। कंचनजंघा राज्य विश्वविद्यालय के भूपेन तिम्सिना और सिक्किम विश्वविद्यालय की मंदीरा रावत को सर्वश्रेष्ठ वक्ता चुना गया।
'मेरा वृक्ष, मेरी संतति' अभियान में भी लिया हिस्सा
इस समारोह की शुरुआत राज्य सरकार के वन विभाग के "मेरा वृक्ष, मेरी संतति" अभियान के तहत पौधरोपण से हुई। मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों ने रोडोडेंड्रॉन (लालीगुरांस) का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। सुखिम डांस अकादमी और कलाकार राकेश शर्मा ने नेपाली लोक-संस्कृति पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
राष्ट्रीय भानु जयंती समारोह
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिला सहयोग
इस कार्यक्रम के दौरान राज्यसभा सांसद डी.टी. लेप्चा की पहल पर कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत सोरेंग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को एक नई एंबुलेंस भी सौंपी गई। इससे जिले की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की उम्मीद जताई गई। इस समारोह में विभिन्न जनप्रतिनिधियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों, सरकारी अधिकारियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लिया। आयोजकों ने इसे नेपाली भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कौन थे आचार्य भानुभक्त?
आचार्य भानुभक्त आचार्य (1814–1868) नेपाली भाषा के प्रथम महाकवि माने जाते हैं। उन्हें सबसे अधिक प्रसिद्धि संस्कृत में रचित *रामायण* का सरल और सहज नेपाली भाषा में अनुवाद करने के लिए मिली। उनके इस कार्य ने रामकथा को आम लोगों तक पहुंचाया और नेपाली भाषा को साहित्यिक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भानुभक्त ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक चेतना, नैतिक मूल्यों और जनभाषा के महत्व को स्थापित किया। उनके सम्मान में हर वर्ष उनकी जयंती भानु जयंती के रूप में भारत, नेपाल और दुनिया के विभिन्न देशों में बसे नेपाली भाषी समुदाय द्वारा मनाई जाती है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में नेपाली भाषा को मिली मान्यता के बाद यह आयोजन भारत में भी विशेष सांस्कृतिक महत्व रखता है।