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Heatwave: दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया, क्या खत्म हो जाएगी पृथ्वी?

Sat, 04 Jul 2026 06:13 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Heatwave: दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर ऐसा ही रहा तो आने वाले समय में और हालात खराब होंगे। भीषण गर्मी का एशिया, यूरोप से लेकर अमेरिका तक को सामना करना पड़ रहा है। 
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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : AI
Heatwave: यूरोप और अमेरिका जैसे ठंडे इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है। गर्मी की वजह से यूरोप के कई देशों में हालात खराब हो चुके हैं। भारत में राजधानी दिल्ली समेत कई इलाकों में भयानक गर्मी पड़ रही है। लोगों को अभी बारिश का इंतजार है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में और भी हालात खराब हो सकते हैं। उन्होंने दुनिया में बढ़ती गर्मी को लेकर चेतावनी दी है। आइन जानते हैं कि दुनिया में पड़ रही भीषण गर्मी की आखिर वजह क्या है? बढ़ते तापमान से पृथ्यी को क्या खतरा है?

क्या है भीषण गर्मी की वजह?

साल 2026 में पड़ रही भयानक गर्मी के पीछे सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन की वजह हालात बिगड़ रहे हैं। ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, जर्मनी और इटली जैसे देशों में जून के तापमान ने कई नए रिकॉर्ड बना चुके हैं। वैज्ञानिकों ने कहा है कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस साल भीषण गर्मी पड़ रही है। उनका कहना है कि बीते वर्ष में रात के दौरान पड़ने वाली भीषण गर्मी का खतरा करीब 100 गुना बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर धरती का तापमान ऐसे ही बढ़ता रहा है, आने वाले वर्षों में हालात और खराब हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भी बढ़ती गर्मी को लेकर चेतावनी दी है।

 
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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : Adobe stock
इतना बढ़ चुका है दुनिया का औसत तापमान

यूरोपीय संघ की संस्था कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस और विश्व मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक, औद्योगिक क्रांति (1850-1900) के बाद से अभी तक दुनिया का औसत तापमान करीब 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। कछ दिनों पहले विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा था कि 2026 से 2030 के बीच 75 प्रतिशत संभावना है कि 5 साल का औसत तापमान 1.5 डिग्री से ऊपर पहुंच जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 91 फीसदी संभावना जताई गई है कि इन पांच वर्षों में कम से कम एक साल 1.5 डिग्री की सीमा को पार कर देगा। 86 फीसदी संभावना है कि इनमें से कोई एक साल 2024 की गर्मी का रिकॉर्ड तोड़ेगा। इसका मतलब है आने वाले वर्ष और भी ज्यादा गर्म होंगे। इसके लिए पूरी दुनिया को तैयार रहना होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया में बढ़ते तापमान के पीछे जलवायु परिवर्तन वजह है। 
 
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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : Adobe Stock Photos
क्या यूरोप में गर्मी के पीछे है अल नीनो? 

आमतौर पर अल-नीनो की वजह से दुनिया के कई इलाकों में तापमान में वृद्धि होती है और मानसून प्रभावित होता है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ पड़ रही भीषण गर्मी के पीछे अल-नीनो की भूमिका अधिक नहीं है। उनका कहना कि क्लाइमेट चेंज सबसे बड़ी वजह है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनहाउस गैसें कम नहीं होती हैं, तो भविष्य में ऐसी हीटवेव और अधिक देखने को मिलेगी। उन्होंने कहा कि 2022 में यूरोप में गर्मी ने 60 हजार से ज्यादा लोगों की जान ली थी। इसलिए ऐसी गर्मी को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 

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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : Adobe Stock Photos
चिंता बढ़ाने वाला है वैज्ञानिकों का निष्कर्ष

जलवायु परिवर्तन पर शोध करने वाली संस्था क्लाइमेट सेंट्रल ने एक नया विश्लेषण किया है, जो बेहद चौंकाने वाला है। इसके मुताबिक, पूरी दुनिया में खतरनाक उमस भरी गर्मी में तेजी से वृद्धि हो रही है। यह रिपोर्ट भारत जैसे घनी आबादी वाले देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 

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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : Adobe Stock
दोगुने से अधिक हो गए हैं गर्मी वाले खतरनाक दिन 

रिपोर्ट के मुताबिक, 50 वर्षों में दोगुने अधिक भीषण गर्मी के दिन हो चुके हैं। एक रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, 1970 के दशक में पूरी दुनिया में एक वर्ष के दौरान औसतन सिर्फ 10 दिन ऐसे होते थे। इस दौरान गर्मी और नमी का मेल इंसानों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता था, लेकिन वर्तमान समय में दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर 23 दिन प्रति वर्ष हो चुकी है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1970 के बाद से दुनिया में दर्ज करीब 64 फीसदी खतरनाक उमस भरे दिनों के पीछे सीधे तौर पर मानवजनित जलवायु परिवर्तन वजह है। वर्ष 2025 में और भयावह स्थिति देखने को मिली। इस दौरान 23 खतरनाक उमस भरे दिनों में से 19 दिन सीधे तौर पर जलवायु परविर्तन की वजह से थे। 

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दुनिया में बढ़ते तापमान के बीच जलवायु परिवर्तन ने वैज्ञानिकों को चौंकाया - फोटो : ANI
क्या खत्म हो जाएगी पृथ्वी?

जलवायु परिवर्तन की वजह से पूरी तरह से दुनिया खत्म नहीं होगी। हालांकि, यह मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए भारी तबाही और अपरिवर्तनीय नुकसान की वजह बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो भविष्य में दुनिया को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ेगा। 
 
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