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मुजफ्फरनगर रेल हादसाः ये हैं हादसे के बाद की भयावह तस्वीरें, देखकर नम हो जाएंगी आंखें

Sun, 20 Aug 2017 04:54 PM IST
amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंगा उत्कल एक्सप्रेस शनिवार की शाम मुजफ्फरनगर के खतौली में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना भयानक था कि ट्रेन की बोगियां पटरी से उतरकर एक इंटर कालेज और ट्रैक किनारे बने घर में घुस गईं। हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई, जबकि 156  से अधिक लोग घायल हुए हैं। हादसे को लेकर कल शाम से अब तक कई चीजें सामने आ चुकी हैं। इन्हीं तमाम छोटी-बड़ी बातों से आपको रूबरू कराते हैं, अगले 10 क्लिक में पढ़िए घटनाक्रम की पूरी कहानी।
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा - फोटो : ANI
हादसे का वक्त 
हादसा शनिवार की शाम करीब 5.40 बजे मुजफ्फरनगर के खतौली में हुआ। जब खतौली स्टेशन पार करते ही उड़ीसा के पुरी से हरिद्वार जा रही उत्कल एक्सप्रेस की 14 बोगियां पटरी से उतर गईं।
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य
हादसे के बाद तत्काल बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। थोड़ी ही देर में जिला प्रशासन की टीम, पुलिस और रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच कर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य में जुट गए। 

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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
मकान और स्कूल में घुसा ट्रेन का डिब्बा
डिब्बे काटकर लोगों को जैसे तैसे निकाला गया। ट्रेन की एक बोगी जगत कालोनी गेट के पास स्थित चौधरी जगत सिंह के मकान में घुस गई। यहां से पांच-छह घायलों को निकालकर अस्पताल भिजवाया गया। वहीं ट्रेन का एक डिब्बा पास के इंटर कॉलेज स्कूल पर जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों ने ट्रेन के पटरी से उतरने के बाद डिब्बे आपास में टकराए, जिनमें से एक डिब्बा उछला और स्कूल पर जा गिरा।
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
टूटी मिली पटरी
हादसे के बाद इसके कारणों की तलाश शुरू हुई तो प्रथ्‍ाम दृष्टया जांच में रेलवे ट्रैक का एक टुकड़ा कटा मिला। मुख्य रूप से इसी को हादसे की वजह बताया जा रहा है। लगभग ढाई मीटर लाइन कटी मिली है। यह पूरा टुकड़ा कटा हुआ अलग रखा था। पास में ही अन्य औजार और हथौड़ा ‌भी मिला है। बताया जा रहा है पिछले दो दिन से यहां पटरियों की मरम्मत का काम चल रहा था। शनिवार शाम तक भी यह काम जारी था, जिसकी वजह से सभी ट्रेनों को हल्की रफ्तार से खतौली स्टेशन से गुजारा जा रहा था लेकिन पुरी एक्सप्रेस को कोई कॉशन नहीं दिया गया और वो 100 किमी की रफ्तार से यहां से गुजरी। नतीजतन हादसा हो गया।

कम नहीं हुई ट्रेन की स्पीड
हादसे के वक्त मौजूद स्थानीय लोगों ने बताया कि रेल ट्रैक पर पिछले 2 दिनों से काम चल रहा था। उन्होंने बताया कि उत्कल एक्सप्रेस से कुछ ही देर पहले 2 अन्य ट्रेनें भी इस ट्रैक से होकर गुजरी थी, लेकिन उनकी स्पीड काफी कम थी। उन्होंने बताया कि जब उत्कल एक्सप्रेस यहां से गुजरी तब ट्रेन की स्पीड कम नहीं हुई। हालांकि रेलवे ने इस बारे में अभी कुछ भी नहीं कहा है। 
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट में कंट्रोल रूम
राहत और बचाव कार्य के लिए गाजियाबाद से 45 कर्मियों और खोजी कुत्तों के साथ एनडीआरएफ की दो टीमें घटनास्थल पर भेजी गईं। हादसे के तुरंत बाद मुजफ्फरनगर के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व ने मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट परिसर में कंट्रोल रूम स्थापित किया। एडीएम वित्त सुनील कुमार सिंह ने बताया कि कोई भी व्यक्ति दुर्घटना से संबंधित जानकारी के लिए फोन नंबर 0131- 2436918, 2436103, 2436564 पर संपर्क कर जानकारी का आदान-प्रदान कर सकता है।
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पीएम मोदी ने जताया दुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि रेल मंत्री और उत्तर प्रदेश सरकार पीड़ितों की हरसंभव सहायता कर रहे हैं।शनिवार रात मौके पर पहुंचे रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने बताया कि मृतकों के परिजनों को केंद्र की ओर से 3.5 लाख की सहायता दी जाएगी। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख का मुआवजा दिया जाएगा। दोनों सरकारों की ओर से घायलों को 50 हजार की सहायता दी जाएगी।

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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
20 साल पुराने हैं डिब्बे
सात हजार के करीब ऐसे सवारी डिब्बे रेलवे ट्रैक पर दौड़ रहे हैं जो 20 साल से अधिक पुराने हैं। आकड़े बताते हैं कि सवारी डिब्बों की होल्डिंग के अनुसार 20 वर्षो से अधिक पुराने सवारी डिब्बे, जो अब भी गाड़ियों में लगाए जा रहे है, उनकी संख्या 6739 है। इनमें सबसे अधिक उत्तर रेलवे की ट्रेनों में 821 कोच इस्तेमाल होता है।

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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
क्यों नहीं लगाया गया कॉसन? 
रेलवे के अधिकारियों ने बताया है कि पटरी पर निर्माण के दौरान कॉसन (लाल झंडी) लगा देते हैं, ताकि वहां से गुजरने वाली ट्रेन की स्पीड 20 से भी कम हो। धीमी गति में ट्रेन वहां से आसानी से निकली जाती हैं। कॉसन को देखकर ट्रेन ड्राइवर समझ जाते कि पटरी पर निर्माण चल रहा हैं। कई दिनों से रेलवे कर्मचारी पटरी पर काम कर रहे थे, लेकिन कॉसन नहीं लगा था।

डिब्बे का काटकर लोगों को बाहर निकाला गया
उत्कल एक्सप्रेस हादसा इतना भयानक था कि फंसे लोगों को निकालने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल करना पड़ा। लोगों को डिब्बे काट कर बाहर निकाला गया।

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हादसे के लिए जिम्मेदार कौन ?
रेल हादसे के बाद चौतरफा हमलों से घिरे रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन (सीआरबी) को रविवार शाम तक जांच करके यह तय करने के लिए कहा है कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है ? वहीं दूसरी तरफ इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।
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मुजफ्फरनगर ट्रेन हादसा
मदद को उमड़े स्‍थानीय लोग
हादसे के बाद स्‍थानीय लोग रेल हादसे के पीड़ितों के लिए देवदूत की तरह सामने आए। अपने अपने संसाधनों से उन्होंने लोगों की मदद की। स्‍थानीय युवाओं ने पूरी मेहनत के साथ डिब्बों में फंसे लोगों को बाहर निकाला। कुछ लोगों ने पीड़ितों के लिए खाने पीने और आराम करने का इंतजाम किया। देर शाम तक लोगों की सेवा जारी रही।
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