राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के 'मंदिर-मस्जिद' विवाद नहीं उठाने के बयान के बाद संघ से जुड़ी पत्रिका ऑर्गनाइजर में संभल से सोमनाथ तक: ऐतिहासिक सत्य को जानने और सभ्यतागत न्याय को तलाशने की लड़ाई शीर्षक से संपादकीय प्रकाशित किया गया है। इस लेख में कांग्रेस पर कई आरोप लगाए गए हैं। साथ ही मौजूदा विवादों को दूर करने पर जोर दिया गया।
संपादकीय में लिखा गया है कि इन दिनों डॉ. बीआर आंबेडकर के अपमान को लेकर जारी शोरगुल के बीच ऐतिहासिक साक्ष्यों से बिल्कुल स्पष्ट है कि कांग्रेस ने संविधान मसौदा समिति के साथ कैसा व्यवहार किया। वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के संभल में हुए ताजा घटनाक्रम ने जनता के दिल को छू लिया है। उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर में श्री हरिहर मंदिर, जिसे जामा मस्जिद का रूप दिया गया, के सर्वेक्षण को लेकर दायर याचिका के बाद से शुरू हुए विवाद के बाद से लोगों और समुदायों के बीच सांविधानिक अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हुई है। हमें इस बहस को छद्म धर्मनिरपेक्षता के चश्मे से हिंदू-मुस्लिम तक सीमित नहीं रखना चाहिए। बल्कि समाज के सभी वर्गों को शामिल करते हुए सच्चे इतिहास पर आधारित सभ्यतागत न्याय की खोज पर एक विवेकपूर्ण और समावेशी बहस करने की जरूरत है।