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धार्मिक स्थल: कहीं महिलायें तो कहीं पुरुषों का जाना है वर्जित...क्या खत्म होंगी मान्यता?

Thu, 26 Jul 2018 04:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाओं का प्रवेश निषेध
सबरीमाला में अयप्पा मंदिर में भगवान के सामने 10 से 50 वर्ष के आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाती और ये मामला अब सर्वोच्च न्यायालय के सामने विचाराधीन है। दिलचस्प है कि सबरीमाला एक अनूठा मंदिर है जहां हिंदुओं के अलावा ईसाइयों, मुसलमानों और यहां तक कि विदेशियों को भी प्रवेश करने की अनुमति है लेकिन रिवाज और लंबे वक्त से चली आ रही परंपरा के मुताबिक 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं को अनुमति नहीं है।
 
आपको याद होगा कि इससे पहले शनि शिंगनापुर और हाजीअली में महिलाओं के प्रवेश के अधिकार की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी और सर्वोच्च न्यायलय में महिलाओं को समानता के अधिकार के तहत प्रवेश को रोकने वाले नियम को असंवैधानिक बताया था। इन दोनों ही धार्मिक स्थलों पर महिलाओं को पूजा-अर्चना करने की अनुमति मिल गई और अब सबरीमाला मंदिर में भी सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद है।
 
लेकिन हमारे देश में कई एसे धार्मिक स्थल हैं जहां पुरूषों को प्रवेश करने की इजाजत नहीं है। आईयें आपको उन अनूठे धार्मिक सथानों के बारे में बताते हैं जहां महिला या पुरुष के प्रवेश पर है पाबंदी :-
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यहां महिलायें नहीं जा सकती अंदर

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भगवान अय्यप्पा मंदिर, शबरीमाला
भगवान अय्यप्पा मंदिर, शबरीमाला
केरल के शबरीमाला में बना हुआ है भगवान अय्यप्पा का मंदिर। इस मंदिर में 10 वर्ष से लेकर 50 वर्ष तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। इस पाबंदी की वजह है मासिक चक्र। एक बार एक 35 वर्षीय महिला ने मंदिर में प्रवेश पा लिया था, तो वहां के पंडितों ने पूरे मंदिर का शुद्धीकरण करवाया था।
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श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर

श्रीपद्मनाभस्वामी मंदिर में तो महिलाओं के प्रवेश को लेकर बड़ा अजीब कायदा बना हुआ है। यहां महिलाएं मंदिर परिसर में आकर पूजा कर सकती हैं, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकती हैं। हालांकि ऐसा क्यों है, इसका जवाब मंदिर प्रबंधन के पास भी नहीं है।

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पतबौसी सत्र, असम

असम के पतबौसी सत्र मंदिर काफी प्राचीन है और पिछले 500 वर्षों से स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है। हालांकि इस बात की लिखित सूचना या जानकारी मंदिर या आसपास कहीं भी नहीं है। लेकिन एक परंपरा का अनुसरण करते हुए इसका पालन किया जा रहा है।
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कार्तिकेय मंदिर, पुष्कर

राजस्थान के पुष्कर में बने कार्तिकेय मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में प्रवेश करने पर महिलाओं को आशीर्वाद के स्थान पर श्राप मिलता है। कहा जाता है कि जब कार्तिकेय इस स्थान पर तपस्या कर रहे थे, तब इंद्र उनसे भयभीत हो गए थे। उन्हें भय था कि कार्तिकेय के तप से खुश होकर भगवान ब्रह्मा उन्हें इंद्र से ज्यादा शक्तियां दे देंगे। इसलिए उन्होंने कार्तिकेय के तप को भंग करने के लिए अप्सराओं को भेजा। नाराज होकर कार्तिकेय ने अप्सराओं को पत्थर का बना दिया और श्राप दिया कि जो भी स्त्री इस स्थान पर आएगी वह भी श्राप की भागी बन जाएगी। बस, तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
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बालोद, मध्य प्रदेश

महिलाओं के मंदिर में प्रवेश वर्जित होने के पीछे एक पुरानी किवंदिती यहां प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां के पुजारी को एक बार स्वप्न में भूगर्भ से निकली माता मावली दिखाई दी। जिसमें माता नकहा कि मैं अभी तक कुंवारी हूं, इस लिए यहां महिलाओं का आना मना है। तब से इस मंदिर मे सिर्फ पुरूष ही दर्शन व पूजा के लिए पहुंचते हैं।
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जैन मंदिर,रनकपुर

राजस्थान के पाली जिले के रनकपुर में बने इस जैन मंदिर में भी स्त्रियों का प्रवेश वर्जित है। मासिक चक्र की वजह से उन्हें अशुद्ध माना जाता है और यही वजह है कि मंदिर में उनके जाने की मनाही है।

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स्त्री के सृजन की ताकत को क्यों कम आंकते हुए ये नियम बने ये आधुनिक युग में समझ पाना मुशकिल है। लेकिन भारत जैसे देश में जहां सदियों से पितृ सत्ता रही है और महिलाओं को उनसे कमतर समझा गया है वहां कुछ धार्मिक स्थलों में पुरूषों का प्रवेश क्यों निषेध है? ये सवाल भी कम रहस्यमयी नहीं हैं। अगर आप इन मंदिरों से अन्जान हैं तो आईये हम आपकी जिज्ञासा दूर करते हैं :-

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नारी सबरीमाला,केरल

केरल के तिरुवनंतपुरम में देवी पार्वती मंदिर है। इस मंदिर में हर साल करीब 30 लाख महिलाएं दर्शन के लिए आती हैं। इसे 'नारी सबरीमला' के नाम से भी जाना जाता है। इसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

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अलापुझा मंदिर, केरल

केरल के अलापुझा जिले में स्थित एक ओर मंदिर है जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर में हर साल पोंगल का त्योहार मनाया जाता है, जिसमें हजारों महिला श्रद्धालु हिस्सा लेती हैं। यह कार्यक्रम करीब एक हफ्ते तक चलता है, जिसे नारी पूजा के नाम से भी जानते हैं। इस दौरान यहां पुरुषों का प्रवेश विशेष तौर पर वर्जित होता है।

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कन्याकुमारी मंदिर ,तमिलनाडु
 
तमिलनाडु के देवी कन्याकुमारी मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। देवी भगवती के इस स्वरूप को संन्यास की देवी के रूप में भी जाना जाता है। यही कारण है कि इस मंदिर के गर्भगृह में विवाहित पुरुषों का प्रवेश सख्त वर्जित है।
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4 ब्रह्मा मंदिर, राजस्थान

राजस्थान के पुष्कर में ब्रह्मा का यह एक मात्र मंदिर है। यहां देवी के गर्भगृह में विवाहित पुरुष श्रद्धालुओं का जाना वर्जित है। दरअसल एक मान्यता के अनुसार देवी सरस्वती के शाप के कारण विवाहित पुरुषों को भीतर जाने से रोका जाता है।
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