देश में बढ़ रहे जातिगत संघर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बेहद चिंतित है। हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी और हरियाणा में उठी आरक्षण की आग ने संघ को बाबा साहब अंबेडकर और बाला साहब देवरस की शरण में जाने को मजबूर कर दिया है। दोनों महान व्यक्तियों के समरसता के विचार को संघ ने वर्तमान परिस्थितियों से निपटने का औजार बनाया है। संघ ने अपने वार्षिक बैठक के आयोजन स्थल का नाम भी डॉ. भीम राव अंबेडकर मंडप रखा है।
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योगदान को भुलाया नहीं जा सकता
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- फोटो : Rashtriya Swayamsevak Sangh FB Page
शुक्रवार से शुरू हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में समरसता पर बेहद जोर है। बैठक के विषयों की जानकारी देते हुए संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा कि समाज से भेदभाव समाप्त होना चाहिए। समाज में समरसता का भाव पैदा करने के लिए देशभर में प्रयास चल रहे हैं, इन्हें और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश इस वर्ष भीमराव अंबेडकर की 125वीं जन्मशती मना रहा है। बाबा साहब के समाज से छूआछूत मिटाने और सबको बराबरी का हक देने के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। संघ के तृतीय सर संघचालक बाला साहब देवरस की 100वीं जन्मशती है।
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समाज से छूआछूत को दूर करने का आह्वान
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उन्होंने भी समाज से छूआछूत को दूर करने का आह्वान किया था। इसके अलावा दक्षिण के महान संत रामानुजाचार्य के जन्म का यह 1000वां वर्ष है। उन्होंने भी समाज से छूआछूत हटाने के लिए अभियान चलाया। कृष्ण गोपाल ने कहा कि यह वर्ष संघ विचारक दीनदयाल की जन्मशती वर्ष है।
समरसता का भाव बढ़ाएगा संघ
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उन्होंने समाज से भेदभाव दूर करने के लिए ही अंत्योदय की कल्पना की थी। सह सरकार्यवाह के अनुसार संघ इन महापुरुषों के विचार को आगे रखकर समाज में समरसता भाव बढ़ाने का आह्वान करेगा। इसके लिए प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा।
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टूटेगी पुरानी परंपरा
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पुरानी परंपरा को छोड़ते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत अधिवेशन के समाप्ति से एक दिन पहले ही अपना संबोधन करेंगे। पहले संघ प्रमुख अधिवेशन के अंतिम दिन सभा को संबोधित करते थे। संघ ने सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रस्ताव पारित किया।
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महिलाओं का मंदिर प्रवेश विवाद
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महिलाओं के मंदिर प्रवेश विवाद पर संघ ने कहा है कि इस प्रकार के विषयों का राजनीतिकरण न हो। ऐसे संवेदनशील विषयों का समाधान संवाद और आपसी चर्चा से हो न कि आंदोलन से।
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देश की सुरक्षा को सक्षम बनाने पर जोर
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सैन्य संस्थानों पर हो रहे हमले को देश के लिए चुनौती बताते हुए संघ ने कहा है सुरक्षा बलों ने अपने साहस और संघर्ष के साथ देश विरोधी शक्तियों के प्रयास को विफल करने में अच्छी सफलता पाई है। मुंबई से लेकर पठानकोट तक के हमलों को पाकिस्तान प्रायोजित करार देते हुए संघ ने कहा है कि भारत के संदर्भ में पाकिस्तान की नीति वहां की चयनीत सरकार नहीं बल्कि सेना तय करती है।
सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सक्षम बनाने की आवश्यक्ता
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संघ ने सरकार से भी आग्रह किया है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृति न हो इसके लिए सुरक्षाबलों की कार्यक्षमता, साधन और नियुक्त अधिकारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधारों पर ध्यान देना होगा। तो सुरक्षा व्यवस्थाओं को और अधिक सक्षम बनाने की आवश्यक्ता है।