पेशी के लिए अदालत ले जाने के नाम पर बंदियों से पैसे मांगने पर वाराणसी जिला जेल में शनिवार को जमकर उपद्रव हुआ। नाराज बंदियों ने बंदी रक्षकों पर हमला कर दिया। इस खूनी संघर्ष में डिप्टी जेलर समेत आधा दर्जन जेल कर्मी जख्मी हो गए। बंदियों के पथराव के जवाब में जेल पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इस बीच बंदियों ने जेल अधीक्षक आशीष तिवारी को बंधक बना लिया।
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वाराणसी जिला जेल पर कैदियों का कब्जा खत्म, अधीक्षक व जेलर छूटे
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
सुबह नौ बजे से सात घंटे बाद शाम करीब चार बजे उन्हें मुक्त किया गया। हालांकि उनके सिर के पिछले हिस्से में भी गंभीर चोटें आई हैं। उधर, बंदियों की मांग पर जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और डिप्टी जेलर अजय राय को तत्काल कार्यमुक्त करते हुए एसीएम चतुर्थ राम शिरोमणि को जेल का प्रभार सौंप दिया गया है।
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Varanasi
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वहीं डीएम ने घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट एसएन शुक्ला पूरे मामले की जांच करेंगे। बताया जा रहा है कि जेल अधीक्षक आशीष तिवारी के बंधक होने से जेल प्रशासन बैकफुट पर आ गया। जेल पहुंचे डीएम राजमणि यादव ने बंदियों से वार्ता करनी चाही मगर नाराज बंदियों ने इससे इनकार करते हुए जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
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सुलह के लिए बंदियों की मांग पर सपा के महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल को जेल बुलाया गया, मगर बंदियों की सभी सात मांगों को मानने के आश्वासन के बाद भी बात नहीं बनी और बंदियों ने जेल अधीक्षक को रिहा नहीं किया। सुबह साढ़े आठ बजे से शुरू यह घमासान आठ घंटे से ज्यादा समय तक चला। हालांकि जिलाधिकारी ने बंधक जैसी स्थिति से इनकार किया।
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घटना के तत्काल बाद अर्धसैनिक बल और पीएसी बुला ली गई। जेल में उपद्रव की सूचना पर इलाहाबाद से डीआईजी जेल संतोष कुमार, वाराणसी के डीआईजी डॉ. संजीव कुमार गुप्ता के अलावा आईबी, जिला और पुलिस प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके अलावा सीआरपीएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की दो कंपनी की भी वहां तैनाती की गई। बंदी जेल से भागने न पाएं इसके लिए जिला जेल को चारों ओर से घेर लिया गया था।
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जेल में हंगामा कर रहे बंदियों ने मीडिया से जेल में घटिया खाना दिए जाने की शिकायत की। आरोप लगाया कि उन्हें जेल की कैंटीन से महंगा खाना खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। कैदियों ने जेल के अंदर से ही अधिकारियों के मोबाइल फोन से बाहर मौजूद मीडिया कर्मियों से बातचीत की। बताया कि पेशी पर जाने के लिए पैसा देने से इनकार करने पर बंदी रक्षकों ने अजय यादव नामक बंदी को बुरी तरह पीटा। हम लोगों के साथ अक्सर ऐसा सलूक होता है।
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फोन पर मीडिया कर्मियों से बातचीत में नाराज बंदियों का कहना था (कुछ बंदियों ने जेल अधिकारियों के फोन से बात की है) कि जेल में उन्हें बेहद घटिया खाना दिया जाता है। इनकार करने पर पिटाई की जाती है। पेशी पर ले जाने के लिए भी पैसा मांगा जाता है। जेल में कैंटीन से सामान खरीदने पर तीन से चार गुना पैसा देना पड़ता है। यह सब जेल प्रशासन की शह पर होता है।
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पैसा न देने वाले बंदियों की सुबह-शाम पिटाई होती है। घरवालों से मुलाकात के नाम पर भी उगाही की जाती है। कई दफा पैसे देने के बाद भी मुलाकात नहीं कराई जाती। चौकाघाट स्थित जिला जेल में क्षमता से दोगुना बंदी रखे गए हैं। जेल की क्षमता 800 बंदियों की है जबकि यहां मौजूदा समय में 1860 बंदी हैं। जेल कर्मचारियों की संख्या सौ के आसपास है। इसमें बंदी रक्षक भी शामिल हैं।