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वाराणसी ही नहीं, यूपी की इन जेलों में भी हो चुका है बवाल

Sat, 02 Apr 2016 07:23 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के वाराणसी जेल में हुआ हंगामा पुलिस व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाने के लिए कोई नया उदाहरण नहीं है बल्कि यहां के अन्य जिला कारागारों में हंगामा होता रहता है। बीते सालों में शायद ही ऐसा कोई साल गुजरा हो जब प्रदेश की किसी जेल में हंगामा न हुआ हो और जेल के अधिकारियों के साथ साथ जेल की संपत्ति को नुकसान न पहुंचा हो।
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जेल की दीवार पर चढ़े कैदी - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित जिला जेल में हुए हंगामे से पूरा प्रशासन हलकान रहा। हंगामे की अब तक जो वजह सामने आई है उसे कैदियों से पेशी के वक्त जाते हुए रिश्वत मांगा माना जा रहा है। इस दौरान कैदियों ने डिप्टी जेलर अजय राय का सिर फोड़ दिया और जेल के अन्य अधिकारियों ने बैरकों में छुपकर किसी तरह से जान बचाई। कैदियों का कहना था कि उनसे पेशी पर जाते वक्त बंदी राइटर पैसे मांगता था और उन्होंने जेल का भोजन सुधारने, कई जेल अधिकारियों के निलंबन सहित कई अन्य मांगे की जिन्हें जिलाधिकारी राजमनि यादव ने मौका ए वारदात पर मान लिया। मौके पर प्रशासन के आला अधिकारी पहुंचे और कैदियों को मनाने में जुट गए लेकिन जब ये काम उनसे बनता हुआ नहीं दिखाई दिया तो स्थानीय मीडिया को अंदर जाने की अनुमति दी गई और उनके जरिए कैदियों की बात सुनी गई।
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
शनिवार सुबह साढ़े नौ बजे से परेड के दौरान शुरू हुआ ये हंगामा शाम तक चलता रहा। कैदी जेल की दीवार तक चढ़ गए और बैरक नंबर 12 एवं 13 को लोहे के गेट को अंदर से बंद कर लिया। जिसे काटने के लिए राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ) को बुलाया गया। शाम होते होते करीब 7 घंटे के हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद जेल अधीक्षक आशीष तिवारी और जेलर विजय राय कैदियों के कब्जे से छूट गए। हालांकि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की जिला जेलों में ये हंगामा कोई नई बात नहीं थी। इससे भी पहले यहां के बलिया, गाजीपुर, जौनपुर, बस्ती, इलाहाबाद में खासा बवाल हो चुका है जिसकी वजह से जेल में कई दिनों तक अशांति रही और प्रशासन हलकान रहा। अमूमन जो जेलों में जो भी हंगामा होता है उनमें आपसी गुटबाजी का बड़ा हाथ होता है।

वाराणसी ही नहीं, यूपी की इन जेलों में भी हो चुका है बवाल

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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
बलिया की जिला जेल में छह माह पूर्व कैदी व बंदी रक्षकों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसके लिए जेल परिसर में बंदियों ने कई दिनों तक भूख हड़ताल की थी। ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि बंदियों के साथ भेदभाव करने, इलाज न कराने तथा भोजन में कटौती करने को लेकर किया था। इसके पूर्व दो चर्चित बंदियों के बीच मारपीट हुई थी। जिससे कई दिनों तक जेल अशांत रहा।
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- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
जौनपुर स्थित जेल में  बीते साल मई और जुलाई में बवाल हुआ था। 4 जुलाई को महिला बंदीरक्षक के साथ छेड़छाड़ की बात पर जेल प्रशासन  ने लाठीचार्ज किया जिसमें एक बंदी श्यामा यादव की मौत हो गई। इस मामले में जेलर सहित दर्जन भर बंदीरक्षको के खिलाफ मृतक के परिवार वालों ने हत्या का केस दर्ज कराया था। मई में तलाशी की बात पर मारपीट हुई थी।
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वाराणसी जेल में कैदियों की मांगों की सूची - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
गाजीपुर में 14 फरवरी 2014 को चेकिंग के दौरान मोबाइल का चार्जर पकडे जाने पर जेल प्रशासन और बंदी आमने सामने आ गए थे और मारपीट तोड़फोड़ हुई थी। इस घटना में भी प्रभारी जेलर का सिर फोड़ दिया गया था। दो बंदी रक्षको की बंदियो की पिटाई की थी। इस दौरान एक बंदी को गोली लगी थी। पथराव  भी हुआ था। इससे पहले 2009 में जेल में कोल्डड्रिंक पीने से दो बंदियो की मौत हुई थी । इसको लेकर भी बवाल हुआ था। बंदी रक्षकों को गोलियां चलानी पड़ी थी।
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वाराणसी जेल में रोटी दिखाते बंदी - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
उत्तर प्रदेश के ही बस्ती जिले में 10 मार्च, 2012 को बस्ती मंडलीय जेल में बंदियों और बंदी रक्षकों के बीच जमकर गोलीबारी हुई थी। बंदियों ने जेल के गेट तोड़ डाले थे और आग लगा दी थी। जिसके बाद बस्ती पुलिस की ओर से डेढ़ सौ राउंड फायरिंग की गई , जिसमें कई बंदी घायल हुए और दो की मौत हो गई थी।

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डिप्टी जेलर अजय राय को ट्रामा सेंटर ले जाते लोग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद के नैनी स्थित केंद्रीय कारागार में जांच के दौरान पाए गए मोबाइल जब्त करने पर बंदियों ने डिप्टी जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी पर तीन सौ बंदियों ने हमला कर दिया था। यह मामला बीती जनवरी का है। जिसके बाद वहां अफरा-तफरी का माहौल हो गया था। वहां जांच के दौरान एक सिम मिल जाने पर जेलर ने फटकार लगाई जिसके बाद बंदियों ने थाली, चम्मच, छन्ना, भगोना जो भी मिला उसे हथियार के रूप में इस्तेमाल कर जेलर पर हमला किया और बड़ी मुश्किल से वो हाई सिक्योरिटी बैरक तक पहुंचे और फिर सायरन बजवा कर और फोर्स बुलाई गई थी।

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वाराणसी जेल में जाती सीआरपीएफ की टुकड़ी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
जेलों में हंगामे का आलम सिर्फ पूर्वांचल की जेलों में ही नहीं है बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी आए दिन हंगामा होता रहता है। अमूमन ये हंगामें तभी होते हैं जब प्रशासन की ओर से जेल के बैरकों की जांच की जाती है। 16 मार्च, 2012 को यूपी के रमाबाईनगर स्थित माती जेल में बंदी रामशहूरण भदौरिया की संदेहास्पद मौत के बाद कैदियों ने उपद्रव किया और पुलिस को बंधक बना लिया था। बंदियों का आरोप था कि रामशहूरण को जेल के अधिकारियों ने पीट-पीट कर मार डाला था।

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लोहे की सलाखें काटने के लिए बुलाई गई एनडीआरएफ की टीम - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, वाराणसी
18 अप्रैल 2012 को मेरठ की जेल में बंदियों और बंदी रक्षकों के बीच हुए विवाद ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया था। बंदियों ने जेलकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाकर उन पर हमला किया था। बंदियों ने एक बैरक और जेल की रसोई में आग लगा दी थी। तीन घंटे चली हिंसा में दर्जनों लोग घायल हुए थे। वहीं एटा की जेल में बीते साल 3 मार्च को जांच के दौरान मोबाइल मिलने पर उपद्रव हो गया। कैदियों ने जांत करने आए सिपाहियों पर हमला बोल दिया था और जेलर को भी चोट आई थी।
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वाराणसी जेल में महिला बंदीरक्षकों को बाहर कर दिया गया था। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
बीते साल 18 अगस्त को रायबरेली जिला कारागार में बैरकों में मोबाइल समेत अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं की तलाशी के दौरान बवाल हो गया था और बंदियों ने जेल कर्मियों पर हमला बोल दिया। जेलर धीरज कुमार सिन्हा को लात-घूसों से इतना पीटा गया था कि उनका दाहिना पैर टूट गया था। बंदियों ने डिप्टी जेलर, तीन बंदीरक्षकों को भी जमकर पीटा था।
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