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जयललिता की तरह इन 4 नेताओं का भी नहीं 'वारिस'

Thu, 08 Dec 2016 08:38 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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mamata banerjee
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का सोमवार को निधन हो गया। इसके बाद से उनकी पार्टी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईडीएमके) का वारिस कौन होगा बड़ा सवाल बना हुआ है। प्रदेश की स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बनी ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियां परिवारों में सिमट कर रह गई हैं। वहीं, कुछ पार्टियों के राजनीतिक वारिस पर अब भी संशय है।


उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाजवादी पार्टी मुखिया मायावती, पं. बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी और ओड़िशा में बिजू जनता दल के नवीन पटनायक ऐसे नेता हैं जिन्होंने वैकल्पिक नेतृत्व की मांग के साथ राजनीति में कदम रखा। जयललिता की ही तरह ये तीनों नेता भी अकेले हैं और अपनी करिश्माई नेतृत्व क्षमता से पार्टी को चला रहे हैं। 
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नवीन पटनायक

नवीन पटनायक की उम्र 70 साल है। अपने करिश्माई नेतृत्व क्षमता से वह अपनी पार्टी को साल 2000 से 2014 तक लगातार चार बार जीत दिला चुके हैं। अपनी साफ-सुथरी छवि और बेहतर प्रशासनिक योग्यता की वजह से वह अपनी जनता से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। 

बीते दिनों उनके तबीयत खराब होनी की सूचना आई थी। वहीं, यह भी कहा गया था कि उनके भतीजे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा रखते हैं। लेकिन, यह अब भी सवाल बना हुआ है कि उनके बाद उनकी पार्टी का वारिस कौन होगा।
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मायावती - फोटो : amar ujala

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के साथ भी जयललिता की ही तरह स्थिति है। उनकी पार्टी में उनके उत्तराधिकारी पर फिलहाल कोई चर्चा नहीं होता। अपने राजनीतिक गुरु कांशीराम के निधन के बाद मायावती ने दलित आंदोलन को जारी रखा और इसे अपना वोटबैंक बनाए रखा। हालांकि, बाद में उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग का भी कार्ड खेला।

मायावती उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं।  उनका उत्तराधिकारी कौन होगा इस पर बड़ा सवाल है। हालांकि, मायावती ने किसी भी कार्यक्रम में अब तक इस तरह की किसी भी योजना का खुलासा नहीं किया है।

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ममता बनर्जी - फोटो : pti
पं. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने दम पर राजनीतिक ऊंचाई पाई है। उन्होंने प्रदेश में कांग्रेस के समानांतर अपनी पार्टी को खड़ा किया। नोटबंदी के मुद्दे पर वह पूरे देश में घूम-घूम कर प्रचार कररही हैं और राष्ट्रीय रोल में खुद को देख रही हैं। 

ममता बनर्जी भले ही अपनी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर बनाने की तैयारी कर रही हों। लेकिन उनका उत्तराधिकारी कौन होगा, इस पर संशय बना हुआ है। हालांकि, उनके भतीजे की राजनीतिक महात्वाकांक्षा समय-समय पर सामने आती रही है।
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार - फोटो : amar ujala
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छात्र राजनीति से निकलकर प्रदेश की राजनीति में शीर्ष तक पहुंचे हैं। जाति पर आधारित बिहार की राजनीति में उन्होंने विकास पुरुष के रूप में अपनी पहचान बनाई। कभी भाजपा के करीबी रहे नीतीश, नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय राजनीति में आने के बाद पार्टी से अलग हो गए थे।

नीतीश कुमार भले ही राष्ट्रीय राजनीति में आने के उत्सुक दिख रहे हैं, लेकिन उनके भी राजनीति उत्तराधिकारी पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। उनके बेटे ने साफ कर दिया है कि राजनीति में उनका कोई रूझान नहीं है।
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