लाहौर में खुली थी पंजाब नेशनल बैंक की पहली शाखा। तब भारत और पाकिस्तान का विभाजन नहीं हुआ था। 19 मई 1894 को लाहौर के अनारकली बाजार स्थित डाकखाने के सामने किराये के मकान से शुरू हुआ था। 23 मई को पहली बोर्ड मीटिंग के बाद इसे आम लोगों के लिए खोला गया था। पीएनबी की पहली ब्रांच लाहौर के बाहर कराची-पेशावर में 1900 में खुली थी। वहीं भारत में पहली ब्रांच 1940 में देहरादून में खुली और बाद में 'भगवान दास बैंक' का इसमें विलय कर दिया गया था। 1947 में आजादी के बाद बैंक को अपना लाहौर ऑफिस खोना पड़ा था। 1969 में 13 अन्य बैंकों के साथ इसका राष्ट्रीयकरण हुआ।
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स्वदेशी अभियान से जुड़े थे संस्थापक
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बैंक के संस्थापक सदस्यों और पहले निदेशक मंडल में दयाल सिंह मजीठिया (ट्रिब्यून के संस्थापक), लाला हरकिशन लाल (पंजाब के पहले उद्योगपति), काली प्रसन्न रॉय (वकील), ईसी जेस्सावाला (पारसी उद्योगपति), प्रभु दयाल (मुल्तान के धनी), जयशी राम बक्शी (वकील), लाला डोलन दास (बैंकर) व लाला लाजपत राय शामिल थे। इनमें ज्यादातर स्वदेशी अभियान से जुड़े थे।
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गांधी जी का भी था खाता
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इस बैंक में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं के खाते थे।
हांगकांग और काबुल में भी हैं शाखाएं
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पंजाब नेशनल बैंक का राष्ट्रीयकरण 13 अन्य बैंकों के साथ जुलाई, 1969 में हुआ। छोटी सी शुरुआत से आगे बढ़ते हुए यह आज देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन गया है। पंजाब नेशनल बैंक का ब्रिटेन में बैंकिंग सहायक उपक्रम है। हांगकांग और काबुल में शाखाएं और अल्माटी, शंघाई और दुबई में प्रतिनिधि कार्यालय हैं।
दुनिया के टॉप 1000 पब्लिक सेक्टर बैंकों में पंजाब नेशनल बैंक की 191वीं रैंक है। इसे (द बैंकर-2017), फोर्ब्स ग्लोबल में 717वीं रैंक (2013) ,फॉर्चून 500 इंडिया में 26वीं रैंक (2011) ,गोल्डन पीकॉक अवॉर्ड (2011) और नेशनल ट्रेनिंग अवॉर्ड (2011) भी मिल चुका है।
पीएनबी में आज 70 हजार से ज्यादा कर्मचारी हैं। बैंक की 6941 शाखाएं हैं और 10 करोड़ से भी ज्यादा ग्राहक हैं। जबकि देशभर में 10,700 एटीएम, 764 शहरों में सेवाएं है।