2019 के लोकसभा चुनाव में अभी तक नरेंद्र मोदी जीत के प्रबल दावेदार दिख रहे हैं। लेकिन इसकी उम्मीद कम ही है कि भाजपा 2014 का प्रदर्शन दोहरा पाएगी, जब इसने अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर यूपी की 80 में से 73 और बिहार की 40 में से 31 सीटों पर कब्जा जमाया था। कार्यकाल के अंतिम वर्ष में मोदी के सामने मौजूद चुनौतियों पर एक नजर:-
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1. पहली चुनौती राजनीतिक है। 2014 की तरह इस बार विपक्ष बिखरा हुआ नहीं है और भाजपा के पास पहले जितने सहयोगी भी नहीं हैं। टीडीपी साथ छोड़ चुकी है और शिवसेना साथ छोड़ने की धमकी दे रही है।
ऐसे में 2019 के चुनाव के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पुराने सहयोगियों को गठबंधन में बांधे रखना होगा और नए सहयोगी भी साथ लाने होंगे। खास तौर से यूपी में उनका मुकाबला बसपा-सपा के गठजोड़ से होगा।
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2. अच्छे दिन के वैसे तो कई मायने हो सकते हैं, लेकिन आम आदमी के लिए इसका अर्थ सिर्फ एक ही है कि उसे रोजगार मिले और उसकी आमदनी बढ़े। लेकिन दुर्भाग्यवश मोदी सरकार के चार साल में रोजगार के अवसर ज्यादा नहीं बढ़े हैं। दो बार लगातार सूखे से किसानों पर मार पड़ी है। नोटबंदी और जीएसटी का भी रोजगार सृजन पर असर पड़ा।
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3. दो बार लगातार सूखा पड़ने और फसल के गिरते दामों के चलते किसानों में भारी गुस्सा है। एनडीए सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने और एमएसपी भी ज्यादा देने का वादा किया है, लेकिन इस पर स्थिति खरीफ की फसल आने के बाद ही साफ हो सकेगी।
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4. मोदी की भ्रष्टाचार के खिलाफ चौकीदार की छवि को पंजाब नेशनल बैंक में सामने आए घोटाले और विजय माल्या के देश छोड़कर भागने से चोट पहुंची है। जनता में अपना भरोसा जगाने के लिए मोदी सरकार को नीरव मोदी, मेहुल चोकसी या विजय माल्या में से किसी को वापस लाना होगा।
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5. बैंकों का फंसा हुआ कर्ज लगातार बढ़ रहा है और अब 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्टसी कोड के जरिए इसमें से कुछ राशि को वापस लाया जा सकता है, लेकिन यह राशि 2018-19 में धीमे-धीमे आनी शुरू होगी। इससे साफ है कि बैंक अभी फिलहाल कुछ वक्त तक ज्यादा कर्ज नहीं दे सकेंगे और इससे अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में देरी होगी।
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- फोटो : SELF
6. आर्थिक विकास को रफ्तार देने के लिए सरकारी खर्च, निजी निवेश, निर्यात और निजी खपत चार इंजन हैं। इन चार में से मात्र दो (सरकारी खर्च और निजी खपत) ही काम कर रहे हैं। निजी निवेश बैंक क्रेडिट ग्रोथ पर निर्भर है और निर्यात की निर्भरता व्यापार के लिए वैश्विक परिस्थितियों पर टिकी है। यदि वर्तमान हालात देखें तो ये दोनों ही परेशानी की स्थिति में हैं।
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7. मोदी सरकार की एक बड़ी उपलब्धि मुद्रास्फीति की दर को लगातार काबू में रखना है। लेकिन पेट्रोलियम के बढ़ते दामों और किसानों से किए गए फसल के ऊंचे दाम के वादे के साथ 2018-19 का साल ऊंची मुद्रास्फीति वाला रह सकता है।
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8. आंतरिक और बाहरी खतरों से सुरक्षा एक अन्य चुनौती है। माओवादी खतरा कम हुआ है तो कश्मीर के हालात में सुधार का कोई संकेत नहीं है और चीन के साथ रिश्तों को कुछ इस तरह संतुलित रखना होगा कि मई 2019 से पहले हम एक और दोकलम पर न खड़े हो जाएं।
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- फोटो : amar ujala
9. आयुष्मान भारत योजना एक प्रमुख गेमचेंजर साबित हो सकती है। इस योजना में 10 करोड़ से ज्यादा परिवारों को 5 लाख रुपये का चिकित्सा बीमा कवर मिलेगा, जिसमें लगभग आधा देश आ जाता है। माना जा रहा है कि अक्तूबर में लागू होने वाली इस योजना को पूर्णतया लागू होने में करीब एक साल लगेगा और सबसे खास यह है कि इसके अच्छे नतीजे दिखने लगेंगे।
10. 2018 में आने वाले महीनों में राजनीतिक चुनौती यह भी है कि भाजपा कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में कैसा प्रदर्शन करती है। कर्नाटक में 15 को ही नतीजे आने हैं। विपरीत परिणाम मोदी मैजिक के बरकरार रहने पर असर डाल सकता है।