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दादी इंदिरा से लेकर पोते राहुल तक यूं रहा महामहिम प्रणब दा का सफर, देखिए ऐतिहासिक तस्वीरें...

Tue, 18 Jul 2017 10:10 PM IST
amarujala.com- Presented by: मुकेश झा
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प्रणब मुखर्जी और इंदिरा गांधी - फोटो : lallantop
भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इस महीने के अंत में समाप्त हो रहा है। मुखर्जी कांग्रेस के एक दिग्गज नेता के रूप में माने जाते हैं। वो शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन से विदा लेंगे। प्रणब मुखर्जी का राजनीतिक करियर लगभग छह दशकों का है। मुखर्जी शायद एकमात्र ऐसे राजनीतिज्ञ हैं,जो कई मौकों पर प्रधान मंत्री बनने के करीब आ गए थे, लेकिन नियति के पास उनके लिए कुछ और योजनाएं थीं। राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान मुखर्जी ने 30 क्षमा याचिका खारिज की।
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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
प्रणब मुखर्जी 28 दिसंबर, 1983 को तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के साथ थे। जब कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता कलकत्ता सत्र में वापस आ रहे थे, तब इंदिरा ने 1969 में बंगाल की राजनीति से प्रणब को चुना था और उसी समय उन्हें राज्यसभा सदस्य बना दिया था।
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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
प्रणब को पूर्व प्रधान मंत्री नरसिम्हा राव और पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलापति त्रिपाठी के साथ मंच साझा करने का मौका मिला। प्रणब ने 15 वर्षों के लिए कांग्रेस के हाई कमांड के साथ करीबी रिश्ते साझा किए। वह हमेशा पार्टी के लिए खड़ा होते थे। 

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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
ये उस वक्त की तस्वीर है जब राष्ट्रपति भवन में वेंकटराम उपराष्ट्रपति के रूप में शपथ ले रहे हैं। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के साथ मुखर्जी बैठे हैं। साथ में पूर्व प्रधान मंत्री वीपी सिंह और उस समय के कट्टर नेता कल्याण नाथ राय भी दिख रहे हैं।
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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान प्रणब ने उच्च पद संभाला था। उन्होंने प्रधान मंत्री के मानदंडों पर फिट बैठे क्योंकि उनके पास अनुभव, योग्यता और राजनीतिक कौशल थे।पिछले छह दशकों में अगर कोई प्रधानमंत्री पद संभालने की क्षमता रखता था, तो वह थे प्रणब मुखर्जी।
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Rajeev gandhi - फोटो : india today
31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद प्रणब मुखर्जी प्रधानमंत्री होने की कगार पर थे। उस घटना के समय वह राजीव गांधी के साथ पश्चिम बंगाल के दौरा पर थे।
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प्रणब मुखर्जी और राजीन गांधी - फोटो : india today
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा की मौत की जानकारी सुनने के बाद प्रणब राजीव गांधी के साथ दिल्ली पहुंच गए। इंदिरा के अचानक निधन के बाद उनके पद के भरने के लिए कांग्रेस पार्टी ने सर्वसम्मति से राजीव गांधी के चुनाव का फैसला किया।

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- फोटो : india today
1984 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रणब मुखर्जी को सबसे पावरफुल मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही मुखर्जी को पार्टी की राजनीति कमान सौंप दिया गया था। इस माध्यम से प्रणब मुखर्जी ने गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
 

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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
1984 में मध्यकालीन चुनाव के बाद राजीव गांधी ने सरकार बनाई। हालांकि, उस समय किसी भी शीर्ष मंत्रालयों के लिए मुखर्जी का नाम नहीं चुना गया था। मार्च 1985 में मुखर्जी को बंगाल कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन सितंबर 1985 में उनको हटाकर  प्रियरंजन दास मुंशी को यह प्रभार दिया गया।

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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
राजीव गांधी की मृत्यु के बाद कांग्रेस कमजोर हो गई थी। नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए और सीताराम केसरी को कांग्रेस पार्टी का प्रमुख बनाया गया। हालांकि, प्रणब खुद पार्टी प्रमुख बनना चाहते थे, लेकिन राव को उनके बारे में संदेह था क्योंकि वे गांधी परिवार के करीब थे।

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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
सोनिया गांधी चाहती थी कि एक बार फिर पार्टी की बैटन का पद खुद संभाले। लेकिन सीताराम केसरी पार्टी प्रमुख थे और इसलिए प्रणब ने एक कार्यकारी बैठक बुलाया और बैठक में कहा कि सोनिया को पार्टी प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपना संभव नहीं है।

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प्रणब मुखर्जी और सोनिया गांधी - फोटो : india today
हालांकि, बाद में सोनिया गांधी को एक बैठक के बाद पार्टी प्रमुख बनाया गया था। एक बार फिर मुखर्जी कांग्रेस पार्टी के बाकी लोगों से हटकर खड़े हुए।

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प्रणब मुखर्जी - फोटो : india today
प्रणब मुखर्जी को सोनिया गांधी के कांग्रेस कार्यकाल में दिग्गज बनाया गया। सोनिया ने राजीव गांधी की गलतियां नहीं कीं। श्रीमती गांधी अब भी उन दिनों याद करते हैं, जब मुखर्जी इंदिरा के साथ बैठते थे और गंभीर राजनीति के बारे में चर्चा करते थे।
 

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Pranab Mukherjee - फोटो : india today
इस सब के बावजूद, एक बार फिर प्रणब मुखर्जी प्रधान मंत्री की दौड़ के लिए आगे थे। लेकिन उनके बदले में उनके कनिष्ठ डॉ मनमोहन सिंह को अवसर दिया गया।
 

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प्रणब मुखर्जी और मनमोहन सिंह - फोटो : india today
इस समय तक प्रणब मुखर्जी को पता था कि उनको पॉवरफुल पोजिशन से नहीं हटाया गया है। इस सब के बावजूद भी उन्होंने कांग्रेस पार्टी की अखंडता के साथ सेवा करने के लिए रखा गया।
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प्रणब मुखर्जी, पीएम मोदी और बराक ओबामा - फोटो : india today
सोनिया गांधी ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब मुखर्जी का नाम दिया था। हालांकि इसे मुखर्जी के लिए एक मुआवजे के रूप में माना जाता है। ताकि देश में शीर्ष स्थान ना पाने पर उन्हें अफसोस न हो।
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