एक दशक पहले नागपुर के तिलक यादव चाहते थे कि उनका छोटा बेटा उमेश सरकारी नौकरी करे। अपने पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उमेश ने पुलिस कॉन्सटेबल बनने के लिए परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
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10 साल बाद पूरा हुआ क्रिकेटर का सरकारी नौकरी का सपना
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उमेश यादव
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उमेश दुर्भाग्यशाली रहे और पुलिस कॉन्सटेबल बनने का मौका उनके हाथ से निकल गया। लेकिन एक दशक बाद टीम इंडिया के स्टार गेंदबाज उमेश यादव का सरकारी नौकरी करने का सपना पूरा हो गया है। उन्हें सिपाही से बेहतर सरकारी नौकरी करने का मौका मिला है।
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उमेश यादव
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उमेश को भारतीय रिजर्व बैंक के नागपुर कार्यालय में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर नियुक्त किया गया है। 29 वर्षीय उमेश ने सोमवार को ज्वाइनिंग की सारी औपचारिकताओं को पूरा किया। ज्वाइनिंग के बाद उमेश ने बताया कि इस बारे में आरबीआई के अधिकारियों से चैंपियंस ट्रॉफी के लिए इंग्लैंड रवाना होने से पहले मई से बात चल रही थी। लेकिन स्पोर्ट्स कोटा के तहत अधिकारियों ने उनकी नियुक्ति को हरी झंडी दिखा दी थी। लेकिन खेल की व्यस्ताओं के कारण उमेश अब तक नौकरी ज्वाइन नहीं कर सके थे।
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उमेश यादव
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उमेश को सीधे तौर पर सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी थी। वह हमेशा से इस जाने माने संस्थान के साथ जुड़ना चाहते थे लेकिन पहले बात नहीं बन सकी। लेकिन इसे लेकर उमेश भी किसी तरह की जल्दबाजी में नहीं थे। लेकिन अब उन्हें वो मिल गया है जो वो हासिल करना चाहते थे और जिसके काबिल थे।
10 साल बाद पूरा हुआ क्रिकेटर का सरकारी नौकरी का सपना
नई पीढ़ी के सभी क्रिकेट खिलाड़ियों के पास वित्तीय सुरक्षा है। बावजूद इसके वो इससे अच्छी नौकरी की आशा नहीं कर रहे थे। वह हमेशा से एक स्थाई नौकरी करना चाहते थे और अब वह उनके हाथ में है।