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करतारपुर गुरुद्वारे में 'जजिया' लगाने पर क्यों अड़े हैं इमरान खान, जानें क्या है वजह

Thu, 17 Oct 2019 06:18 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज जितेंद्र भारद्वाज, करतारपुर कॉरिडोर से
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पाक की तरफ से अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा से आगे तैयार किया जा रहा करतारपुर कॉरिडोर, सफेद रंग की बिल्डिंग पैसेंजर टर्मिनल है - फोटो : AmarUjala
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उस वक्त हमारी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा, जब पहली दफा यह खबर आई कि पाकिस्तान करतारपुर साहिब तक कॉरिडोर बनाने के लिए तैयार हो गया है। दुनिया के कई हिस्सों में रह रही सिख संगत के फोन आने लगे। बधाईयों का दौर शुरु हो चुका था। मोदी सरकार ने भी दो कदम आगे बढ़कर करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की बात कह दी। दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर आगे बढ़ने लगा। कामकाज ने जब गति पकड़ी, तो पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर आने वाले श्रद्धालुओं पर 20 डॉलर प्रति व्यक्ति के हिसाब से फीस लगा दी।

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सब हैरान रह गए कि इमरान खान करतारपुर गुरुद्वारे में 252 करोड़ रुपये सालाना का 'जजिया' लगाने के लिए क्यूं अड़े हैं। खेती किसानी या मजदूरी करने वाले लोग 20 डॉलर देकर कैसे करतारपुर पहुंच सकते हैं। खैर कोई बात नहीं, अभी हम ना-उम्मीद नहीं हुए हैं। भारत सरकार और सिख संगत की अपील पर इमरान खान को अपनी 'जजिया' कम करनी होगी या उसे खत्म करना पड़ेगा, ऐसी हमें उम्मीद है।

 

 

गुरु नानक देव जी के वंशज ने उठाए सवाल

गुरु नानक जी के 17 वें वंशज बाबा सुखदेव सिंह बेदी - फोटो : AmarUjala

भारत-पाकिस्तान सीमा के अंतिम गांव डेरा बाबा नानक, जहां से पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने के लिए करतारपुर कॉरिडोर शुरु होता है, वहां बाबा सुखदेव सिंह बेदी ने यह बात कही है। ग्राउंड जीरो पर अमर उजाला डॉट कॉम के साथ विशेष बातचीत करने वाले बाबा बेदी को गुरु नानक देव जी के 17वें वंशज के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने कहा, इमरान खान यह 'जजिया' यानी टैक्स या फीस क्यों लगाना चाहते हैं। गुरु जी को तो हिंदू मुस्लिम, सभी का एक समान भाव से प्यार और सम्मान मिला। आप देखिये, सिख संगत और दूसरे समुदाय गुरु नानक जी को कितना मानते हैं।

गरीब किसान-मजदूर कैसे चुकाएंगे फीस

यहां से पाकिस्तान में प्रवेश करेगी संगत। - फोटो : AmarUjala
डेरा बाबा नानक पर फेंसिंग से पहले एक दूरबीन लगी है, विभिन्न हिस्सों से लोग यहां आकर इस दूरबीन की मदद से करीब चार किलोमीटर दूर स्थित करतारपुर गुरुद्वारे का दर्शन करते हैं। इनमें अमीर भी हैं और गरीब भी। किसान, दिहाड़ीदार और मजदूरों को भी गुरुद्वारे जाना है। आसपास खेती किसानी करने वाले लोग हैं, वे अपने परिवार के साथ आएंगे। ऐसे में हर व्यक्ति बीस डॉलर यानी 14 सौ रुपये कैसे देगा। कई श्रद्धालुओं की भावनाएं ऐसी होती हैं कि वे एक महीने में दो बार दर्शन करना चाहें तो यह फीस कैसे चुकाएंगे। बतौर बाबा सुखदेव सिंह बेदी, इतनी उम्मीद तो है कि इमरान खान इस फीस को कम करेंगे या उसे माफ कर सकते हैं।

पाक को सालाना 250 करोड़ रुपये का राजस्व

पाकिस्तान ने अपने हिस्से का पुल नहीं बनाया - फोटो : AmarUjala
डेरा बाबा नानक पर आए सरदार बलविंदर सिंह बताते हैं कि भारत सरकार ने पाकिस्तान से रोजाना पांच हजार श्रद्धालुओं के आने की बात कही है। हालांकि हमारी सरकार का प्रयास है कि इस संख्या को आठ से दस हजार तक बढ़ा दिया जाए। करतारपुर कॉरिडोर के जरिए अगर रोजाना पांच हजार श्रद्धालु वहां आते हैं, तो एक महीने में डेढ़ लाख श्रद्धालु पहुंचेंगे। एक साल में यही संख्या 18 लाख तक पहुंच जाती है। प्रति व्यक्ति 14 सौ रुपये फीस का हिसाब लगाएं, तो यह सालाना 252 करोड़ रुपए होती है। यानी पाकिस्तान के खाते में इतना राजस्व चला जाएगा। इसके अलावा श्रद्धालुओं की ओर से जो चढ़ावा भी आएगा वह राशि भी करोड़ों में पहुंचेगी।

बलविंदर सिंह के अनुसार, इमरान खान चाहें तो इस फीस से वह नरोवाल जिला, जिसमें करतारपुर स्थित है, उसके आसपास के दूसरे अति पिछड़े जिलों का विकास कर सकते हैं। पाकिस्तानी की आर्थिक हालत आज किसी से छिपी नहीं है। इमरान खान को मालूम है कि गुरुद्वारे की दर्शन फीस और चढ़ावे को मिलाकर सालाना पांच-सात सौ करोड़ रुपया एकत्रित हो जाएगा।

विकास में पिछड़ा नरोवाल जिला

पुल के नीचे से बनाया जा रहा है वैकल्पिक मार्ग - फोटो : AmarUjala
पाकिस्तान की मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) रिपोर्ट बताती है कि पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले का अधिकांश हिस्सा विकास की रैंकिंग में 0.700 से 0.799 के बीच रहा है। इस जिले में तीन तहसील और 74 यूनियन काउंसिल हैं। इसके आसपास के जिले, गुजरांवाला, मुल्तान, चकवाल, शेखुपुरा, टोबा टेक सिंह, ननकाना साहिब और फैसलाबाद आदि जिले विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। तीन साल पहले की जिलेवार एचडीआई रिपोर्ट में नरोवाल का नंबर 15वां था। स्वास्थ्य सुविधा संतुष्टि की बात करें, तो वह 64.5 रहा है।

स्कूली शिक्षा का औसत 11.6 साल था। रहन-सहन का स्तर 83.5 रहा है। डेरा बाबा नानक गांव के लोग बताते हैं कि नरोवाल में भी तो हालत बहुत ठीक है, लेकिन उसके साथ लगे जिलों में ज्यादा पिछड़ापन है। अगर उसे गुरुद्वारे की मदद से सालाना सात सौ करोड़ रुपये मिल जाते हैं, तो वह उसे पिछड़े जिलों के विकास पर खर्च कर सकता है।

डेढ़ साल का काम 45 दिन में पूरा

पाकिस्तान ने गुरुद्वारे के निकट अभी तक यही ढाँचा खड़ा किया है। - फोटो : AmarUjala

लैंड पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के चेयरमैन गोविंद मोहन का कहना है कि अभी तक हमने 75 फीसदी काम पूरा कर लिया है। इस माह के अंत तक सब कुछ तैयार होगा। हमनें डेढ़ साल का काम 45 दिन में पूरा कर दिखाया है। इस मामले में हमने चीन को पीछे छोड़ दिया है। 24 अगस्त को पहला आधार रखा गया था। मुख्य भवन, जिसे पैसेंजर टर्मिनल का नाम दिया गया है, वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ एयरपोर्ट की तर्ज पर बना है। यह ढांचा देश की टॉप 15 स्टेट ऑफ आर्ट बिल्डिंग्स में शामिल है। जब तक पाकिस्तान अपनी ओर का पुल नहीं बनाता, भारत ने पुल के नीचे से एक वैकल्पिक रास्ता बनाकर उसे अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर तक पहुंचा दिया है। उससे आगे गुरुद्वारे तक कॉरिडोर का निर्माण करना पाकिस्तान की जिम्मेदारी है।

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बेहतरीन स्थलों में शुमार होगा कॉरिडोर और पैसेंजर टर्मिनल

अगले माह जब पीएम मोदी यहां आएंगे तो ऐसा दिखेगा हमारा पैसेंजर टर्मिनल - फोटो : AmarUjala
अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान ने सीमा से करीब चार सौ मीटर दूर एक पैसेंजर टर्मिनल बनाया है। हालांकि गुरुद्वारे के आसपास अभी कुछ खास नहीं बनाया गया है। वहां नॉर्मल शैड बनाने का ढांचा खुला पड़ा है। हमारे पास पचास एकड़ जमीन है। अभी तक बीस एकड़ जमीन पर ढांचा बना है। तीस एकड़ जमीन बची है। इसे दूसरे चरण के प्रोजेक्ट में इस्तेमाल किया जाएगा। नवंबर में जब पीएम नरेंद्र मोदी यहां आएंगे, तो उस वक्त तक यह कॉरिडोर और पैसेंजर टर्मिनल दुनिया के बेहतरीन स्थानों में शुमार हो चुका होगा।
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