हाई स्पीड पर ट्रायल कराने के लिए टेल्गो ट्रेन अपने ही इंजन से चलेगी। यह ट्रायल तेज रफ्तार में पलवल - मथुरा और मुंबई तथा दिल्ली के बीच में होगा। यदि भारतीय इंजन को लेकर ट्रेन को खींचा तो इन दोनों ट्रायल के दौरान ट्रेन हाई स्पीड में होने के कारण कई व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इसीलिए स्पेन से इंजन मंगाया जा रहा है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
4500 एचपी के भारतीय इंजन से टेल्गो ट्रेन के संचालन के दौरान तकनीकी टीम ने व्यावहारिक दिक्कतें महसूस की हैं। जिनकी वजह से अपनी कंपनी के इंजन की जरूरत महसूस की गई है, इस बारे में स्पेन स्थित टेल्गो के अधिकारियों को बता दिया गया है। उसी के आधार पर संकेत मिले हैं कि जल्द ही वहां से इंजन आएगा। साथ में चार ड्राइवरों के भी आने की संभावना है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
टेल्गो की तकनीकी टीम का मानना है कि ट्रेन को दौड़ाने के समय हाइड्रोलिक सिस्टम से कोच को डेढ़ फीट ऊंचा करने में दिक्कत आती है। हालांकि ट्रेन संचालन के समय कोच स्वत: ही ऊंचे हो जाते हैं। प्लेटफार्म पर यह कोच स्वत: ही नीचे हो जाते हैं। भारतीय इंजन सामान्य है जबकि टेल्गो का इंजन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड है। वह सेंसर के माध्यम यह भी संकेत देता है कि जिस ट्रैक पर वह दौड़ रहा है, इसके आगे का ट्रैक कैसा है। उसी आधार पर ड्राइवर ट्रैक पर ट्रेन की स्पीड को कम और अधिक करते हैं।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ट्रेन के कोच के बारे मे भी इंजन में बैठे ड्राइवर को सेंसर तथा अन्य उपकरणों के माध्यम से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती रहती हैं। इसी वजह से कई मोड़ और घुमाव वाले पलवल-मथुरा और दिल्ली - मुंबई ट्रेक पर अधिक स्पीड में इस ट्रेन को दौड़ाने के लिए आधुनिक तकनीक से इंजन को इस्तेमाल करने की जरूरत महसूस की गई है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
रविवार को इज्जतनगर से बरेली जंक्शन और मुरादाबाद के बीच स्पेन की हाई स्पीड ट्रेन टेल्गो के पहले दिन का ट्रायल सक्सेस माना गया है। यह संकेत आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन) की टीम ने सेंसर रिपोर्ट के आधार पर दिए हैं। टीम असली परीक्षा तो दिल्ली-पलवल और मथुरा के बीच मान रही है, यहां पर सांप - सीढ़ी के खेल की तरह के कई मोड़ हैं। जहां पर 170 से 200 की स्पीड से ट्रेन को दौड़ाना चुनौती हो सकता है। हालांकि टेल्गो की टीम इस चुनौती को सामान्य मान कर चल रही है। टीम का तर्क है कि इस तरह के मोड़ पर इस तकनीकी की ट्रेन को संचालित करना दूसरे देशों में आम बात है।
टेल्गो के इंजीनियरों की टीम कई मोड़ वाले दिल्ली से पलवल और मथुरा ट्रैक का निरीक्षण कर आई है। यहां तक जानकारी कर ली गई है कि कितने किलोमीटर पर कितने घुमाव का मोड़ है और उस मोड़ पर ट्रेन की स्पीड को कम करना होगा या नहीं। हालांकि टीम का तर्क है कि इस तरह के मोड़ पर स्पीड पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन ट्रैक बिजी न हो और लाइन क्लियर मिलनी चाहिए।