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अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए नायडू ने इसलिए वरिष्ठ सासंदों की बजाए गल्ला को चुना

Sat, 21 Jul 2018 10:54 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जयदेव गल्ला
संसद भवन में जब सरकार के खिलाफ तेलुगू देशम पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर बहस करनी शुरू की तो सभी को लगा था कि नारा चंद्रबाबू नायडू इसके लिए किसी अनुभवी और वरिष्ठ सांसद को चुनेंगे। लेकिन इससे इतर उन्होंने पहली बार चुनकर संसद भवन पहुंचे 52 साल के जयदेव गल्ला को चुना। इस वजह से बहुत से लोग हैरान रह गए थे। हालांकि आंध्र प्रदेश की राजनीति को करीब से देखने वाले लोगों के लिए गल्ला कोई अजनबी नहीं है। वह लोग यह देखकर भी नहीं चौंके कि नायडू ने संसद में उन्हें पार्टी की तरफ से भाजपा पर हमला करने के लिए चुना। 
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जयदेव गल्ला
गुंटूर से सांसद गल्ला एक प्रभावशाली राजनीतिक वंश से आते हैं। उनके नाना पटूरी राजगोपाल नायडू एक स्वतंत्रता सेनानी थे और सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह कि वह चंद्रबाबू के राजनीतिक गुरू रहे हैं। राजगोपाल को प्यार से लोग राजन्ना कहते हैं। वह और नायडू दोनों ही आंध्र के चित्तौड़ से ताल्लुक रखते हैं।
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जयदेव गल्ला
राजगोपाल खुद दो बार स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर सासंद चुने गए हैं। प्रोफेसर एनजी रंगा के साथ मिलकर राजन्ना ने कांग्रेस के खिलाफ स्वतंत्र पार्टी को राज्य में बनने में मदद की। लेकिन बाद में उन्होंने कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। राजन्ना की राजनीतिक उत्तराधिकारी उनकी बेटी अरुणा कुमारी थीं।

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जयदेव गल्ला
राजन्ना ने जल्द ही चंद्रबाबू में नेतृत्व करने की क्षमता को पहचाना और उन्हें ना केवल आगे बढ़ने में मदद की बल्कि उन्हें चंद्रागिरी से विधायक बनने में भी मदद की। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस कैबिनेट में नायडू को मंत्री बनाया। नायडू इस बात को कभी नहीं भूले। हालांकि कुछ समय बाद वह कांग्रेस छोड़कर अपने ससुर एनटी रामा राव की पार्टी टीडीपी में शामिल हो गए।
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जयदेव गल्ला
अरुणा कुमारी जिनकी उस समय रामचंद्र नायडू गल्ला से शादी हुई थी, एक एनआरआई जिसने अमार राजा बैटरीज की स्थापना की। वह तीन बार चंद्रागिरी से विधायक चुनी गईं। अरुणा कई बार अविभाजित आंध्र की मंत्री बनीं। आंध्र के टूटने और 2014 के चुनाव से पहले अरुणा टीडीपी में शामिल हो गईं।
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जयदेव गल्ला
जयदेव गल्ला जो उस समय अपनी मां के राजनीतिक करियर के मैनेजर हुआ करते थे उन्होंने साल 2012 में कांग्रेस के टिकट पर तिरुपति से चुनाव लड़ना चाहा लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। जिसके बाद उन्होंने भी अपनी मां के साथ टीडीपी का दामन पकड़ लिया।
 
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जयदेव गल्ला
जयदेव अमारा राजा बैटरी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उनके पिता रामचंद्र नायडू गल्ला कंपनी के मालिक हैं। राजनीति में आने से पहले जयदेव अमेरिका की जीएनबी बैटरी टेक्नोलोजी में इंटरनेशनल सेल्स हेड रह चुके हैं।
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जयदेव गल्ला- महेश बाबू
अरुणा कुमारी को 2014 के चुनावों में हार मिली लेकिन गूंटूर से गल्ला जीत गए। इसी वजह से आंध्र के राजनीतिक पर्यवेक्षकों को लगता है कि नायडू ने पढ़े-लिखे गल्ला को संसद में पार्टी की तरफ से बोलने का मौका दिया। अपनी चर्चा के दौरान गल्ला ने महेश बाबू की एक फिल्म का जिक्र किया था। बता दें कि महेश बाबू उनके बहनोई हैं।
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