फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां तुझे सलाम: खिलाड़ी बेटी की सुरक्षा के लिए खुद बन गई कोच

Sat, 02 Apr 2016 06:08 AM IST
शालू अग्रवाल/अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
1 of 4
कोच की भूमिका में आ गई मां - फोटो : amar ujala bureau
आज महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। रेप, अपहरण और छेड़छाड़ के मामले बढ़ रहे हैं। खेलों में भी महिला खिलाड़ियों के शोषण की बातें सामने आती रही हैं। पुरुष कोच शोषण जैसे गंभीर आरोपों में फंस चुके हैं। इन्हीं सब बातों को देखते हुए एक मां खुद कोच की भूमिका में आ गई हैं। वह अपनी बेटी के साथ पांच घंटे कैलाश प्रकाश स्टेडियम में गुजराती हैं। उसकी गलतियां बताती हैं और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। मां अपनी बेटी का साया बन चुकी हैं।
विज्ञापन

2 of 4
पांच घंटे स्टेडियम में गुजराती हैं किरन की मां - फोटो : amar ujala bureau
मुजफ्फरनगर निवासी किरन बालियान शॉर्ट पुट में नेशनल स्तर पर सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। किरन के पिता सतीश बालियान पीएसी में हेडकांस्टेबल हैं। फिलहाल वे मेरठ में तैनात हैं। किरन रोजाना सुबह- शाम अपनी मां बॉबी के साथ स्टेडियम में प्रैक्टिस करती हैं। 12वीं की परीक्षा देने वाली किरन कहती हैं कि इससे पहले पिता की पोस्टिंग आगरा में थी। वहां कभी-कभी मम्मी मेरे साथ स्टेडियम जाती थीं, लेकिन मेरठ में रोजाना हम साथ में स्टेडियम आते हैं।
विज्ञापन

स्टेडियम में शार्ट पुट की कोई महिला कोच नहीं

3 of 4
स्टेडियम में शार्ट पुट की कोई महिला कोच नहीं - फोटो : amar ujala bureau
बकौल किरन यहां कोई महिला ट्रेनर नहीं है जो मुझे प्रैक्टिस कराए। मां बॉबी कहती हैं कि आज के जमाने में किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। इसलिए रोजाना स्कूटी पर इसके साथ स्टेडियम आती हूं। सुबह सवा छह बजे से आठ बजे तक स्टेडियम में रहती हूं। शाम चार बजे से साढ़े छह बजे तक फिर अभ्यास कराता हूं। बाकी टाइम में घर का काम, बेटी को खाना देना यह सब करती हूं। बेटा बास्केटबॉल खेलता है, लेकिन वो छोटा है। अब सपना है कि बेटी जल्दी से ओलंपिक में खेले और देश का नाम रोशन करे, तो मेरी तपस्या भी सफल हो जाए। 
विज्ञापन

बॉबी समझ चुकी हैं खेल की सभी बारीकियां

4 of 4
कैलाश प्रकाश स्टेडियम - फोटो : pti
स्टेडियम में शार्ट पुट की कोई महिला कोच नहीं है। जिस कारण अभ्यास में परेशानी होती है। बॉबी बताती हैं कि स्ट्रेचिंग कराना, प्रैक्टिस कराने में दिक्कत आती है। इसमें लड़कों की मदद नहीं ले सकते हैं। इसीलिए यह सब मैं खुद ही कराती हूं। बॉबी केवल बेटी को व्यायाम नहीं कराती, बल्कि वीडियो बनाकर उसकी गलतियां भी बताती हैं। बेटी के साथ रोजाना स्टेडियम आकर बॉबी इस खेल की सभी बारीकियों को समझ चुकी हैं। आठवीं पास बॉबी का कभी खेलों से ताल्लुक नहीं रहा, लेकिन बेटी के साथ आते-आते वह मंजे हुए कोच की तरह बन गई हैं
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें