भारत में आर्थिक सुधारों के जनक कहे जाने वाले डॉ. मनमोहन सिंह का 92 वर्ष उम्र में गुरुवार रात को दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया है। वे 2004 से 2014 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे थे। सियासत में कोई भी व्यक्ति, वो चाहे राज्य में शीर्ष पद पर हो या केंद्र में, खुफिया जानकारी को लेकर बेहद संजीदा रहता है। प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या गृह मंत्री, ऐसे पदों पर आसीन अधिकांश व्यक्ति, 'खुफिया' सूचनाएं पाने के लिए सक्रियता दिखाते रहे हैं।
डॉ. मनमोहन सिंह, ऐसे शख्स थे, जिन्होंने सरकारी प्रोटोकॉल को छोड़कर अन्य कामकाज के लिए खुफिया एजेंसियों की सूचनाओं में कोई रूचि नहीं दिखाई। उन्हें, अपने ही सहयोगियों पर निगरानी रखना पसंद नहीं था। इस मामले में वे अन्य प्रधानमंत्रियों की 'इंटेलिजेंस' थ्योरी के अपवाद थे। डॉ. मनमोहन सिंह ने 'रॉ' और 'आईबी' चीफ से कह दिया था, मुझे रोजाना ब्रीफ करने की कोशिश न करें। आप अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, 'एनएसए' को सौंप दें। उनके इस कदम से खुफिया महकमे के वे अधिकारी सकते में आ गए थे, जो प्रधानमंत्री को कुछ जानकारी देने के बहाने उनसे मुलाकात का अवसर तलाशते रहते थे।